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    आगरा। Freedom Fighter और वरिष्ठ समाज सेवी सरोज गौरिहार का निधन, शहर मानता था उन्हें मां, संगठनों में शाेक की लहर।

    आगरा। उत्तर प्रदेश आगरा की प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी रानी सरोज गौरिहार का रविवार को निधन हो गया। उन्होंने सुबह करीब चार बजे अंतिम सांस ली। रानी सरोज गौरिहार को आगरा के लोग 'दीदी' कहकर पुकारते थे। साहित्यकार सरोज गौरिहार, नागरी प्रचारिणी सभा की सभापति होने के साथ ही शहर की कई सामाजिक व साहित्यिक संस्थाओं से जुड़ी हुई थीं। उन्होंने ब्रजभाषा, खड़ी बोली और राधाकृष्ण पर कई साहित्य लिखे हैं। उनके द्वारा लिखा गया भगवान श्रीराम को विस्मृत मांडवी खंड काव्य को खूब प्रशंसा मिली। रविवार को उनके अंतिम दर्शन के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

    वरिष्ठ समाज सेवी सरोज गौरिहार उनकी रचना 

    आगरा की प्रफेसर कॉलोनी कमला नगर में रहने वाली रानी सरोज गौरिहार के निधन की खबर जैसे ही लोगों को मिली तो अंतिम दर्शन के लिए लोगों के कदम उनके घर की ओर चल पड़े। 92 साल की रानी सरोज गौरिहार का जन्म 4 नवंबर 1929 में हुआ था। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि बापू का आशीर्वाद उन्हें गर्भ में ही मिल गया था। साल 1929 में जब गांधी जी आगरा आए थे तो उनके पिता जगन प्रसाद रावत और मां सत्यवती गांधी जी से मिलने के लिए यमुना ब्रिज स्थित गांधी स्मारक पहुंचे थे। तब वे अपनी मां के गर्भ में थीं। रानी सरोज गौरिहार के माता-पिता स्वतंत्रता सेनानी थे। वे 1967 में मध्य प्रदेश के छतरपुर से विधायक भी रही थीं। स्वतंत्रता की लड़ाई मे वह 1943 में जेल भी गईं थीं। उनका विवाह महाराज प्रताप सिंह देव से हुआ था। वह बुंदेलखंड के छतरपुर जिले के गौरिहार के निवासी थे। चेस्ट में इंफेक्शन होने पर उन्हें आगरा हार्ट सेंटर में तीन दिन पूर्व भर्ती कराया गया था। धीरे-धीरे उनके अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। रविवार सुबह 4:15 बजे उन्होंनेे अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलने के बाद उनके आवास पर लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था

    • स्वतंत्रता आंदोलन में गईं थीं जेल

    आगरा में जन्मी सरोज गौरिहार ने छात्र जीवन से ही स्वाधीनता आंदोलन में भाग लिया था। वर्ष 1943 में वह स्वतंत्रता आंदोलन के चलते जेल गईं थीं। उनका विवाह बुंदेलखंड के छतरपुर जिले के गौरिहार स्टेट के राजा महाराज प्रताप सिंह देव से हुआ था। पति के निधन के बाद सरोज गौरिहार आगरा में ही आकर बस गईं।

    • अगस्त क्रांति में बंद कराया था स्कूल

    अगस्त क्रांति, 1942 में नौ अगस्त को उन्होंने अपनी सहपाठियों के साथ सिंगी गली स्थित सीनियर बालिका पाठशाला को बंद करा दिया था। सभी छात्राएं स्कूल की सीढ़ियों पर खड़ी हो गई थीं। शिक्षकों को छाेड़कर किसी को स्कूल में प्रवेश नहीं करने दिया था। यूनियन जैक को सलामी देने से भी इन्कार कर दिया था। उस समय वह सातवीं कक्षा में पढ़ती थीं।

    • अब नहीं आगरा में एक भी जीवित स्वतंत्रता सेनानी

    सरोज गौरिहार शहर की अंतिम जीवित स्वतंत्रता सेनानी थीं। उनके निधन के बाद शहर में कोई स्वतंत्रता सेनानी नहीं बचा है। शहर के सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक व राजनीतिक संगठनों ने उनके निधन पर दु:ख जताया है। 

    • आगरा के साहित्य पर तीन दर्जन किताबें लिखीं

    रानी सरोज गौरिहार नागरीय प्रचारिणी की सभापति रहीं। उदयन शर्मा फाउंडेशन ट्रस्ट के माध्यम से उन्होंने आगरा पर लगातार साहित्य प्रकाशित किए। साहित्यकार कुमार ललित ने बताया कि रानी सरोज गौरिहार आगरा में एकमात्र स्वतंत्रता सेनानी थीं। उनके चले जाने के बाद आगरा में एक भी स्वतंत्रता सेनानी नहीं बचा है। उन्होंने बताया कि रानी सरोज गौरिहार ने अपने साहित्य से नागरी प्रचारिणी को नये आयाम दिए। आगरा के साहित्य पर उन्होंने तीन दर्जन किताबें लिखी थीं। जिनमें धर्म-संस्कृति, साहित्य और आगरा की गौरव गाथा शामिल है।

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