Header Ads

  • INA BREAKING NEWS

    नोएडा। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद नोएडा के दोनों गगनचुंबी ट्विन टावर ध्वस्त।

    अतुल कपूर (स्टेट हेड)

    नोएडा। एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद नोएडा के गगनचुंबी ट्विन टावर देखते ही देखते ध्वस्त कर दिए गए। राधेश्याम रामायण की यह लाइनें इस प्रकरण पर सटीक बैठीं। " वर्षों में बनी इमारत जो, वह पल भर में गिर जाती है।"

    नोएडा के सेक्टर-93ए में बने 103 मीटर ऊंचे ट्विन टावर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन में रविवार को ध्वस्त कर दिए गए। महज 9 से 12 सेकेंड में कुतुब मीनार से भी ऊंचीं ट्विन टावर की दोनों इमारतें मलबे और राख के ढेर में बदल गई। जोरदार धमाके के संग ध्वस्त होती  इमारत के साथ चारों और धूल और धुआं फैल गया। ध्वस्तीकरण के बाद सरकारी अमला वापस लौट गया। लोग बस धूल के गुबार देखते रहे। गोपालदास नीरज के शब्दों में कहें - "कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे"

    रविवार की दोपहर के बाद धुएं के गुबार में बदल गई गगनचुंबी इमारत

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के ट्विन टावर धमाके के बाद जमींदोज कर दिये गये। नोएडा-ग्रेटर नोएडा हाईवे आम लोगों के लिए खोल दिया गया। ट्विन टावर के ध्वस्तीकरण के लिए 9640 छेद में 3700 किलो विस्फोटक का प्रयोग किया गया। इस ध्वस्तीकरण के दौरान मौके पर पुलिस से लेकर एनडीआरएफ और फायर ब्रिगेड की टीमें मौजूद रहीं। वहीं, वायु प्रदूषण को रोकने के लिए पानी के टैंकर का भी इंतजाम किया गया और एंटी स्मॉग गन भी लगाई गई।

    • ट्विन टावर की व्यथा-कथा

    ट्विन टावर की स्थापना की शुरुआत के समय से ही क्षेत्रीय नागरिकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद नागरिकों की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में दे दिया। नोएडा बेस्ड कंपनी  ने 2000 के दशक के मध्य में एमरल्ड कोर्ट नाम परियोजना की शुरुआत की थी। नोएडा और ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे के समीप स्थित इस परियोजना के तहत 3, 4 और 5 बीएचके फ्लैट्स वाले इमारत बनाने की योजना थी। न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा प्रस्तुत योजनाओं के अनुसार, इस परियोजना में 14 नौ मंजिला टावर होने चाहिए थे।  परेशानी तब शुरू हुई जब कंपनी ने प्लान में बदलाव किया। साल 2012 तक परिसर में 14 के बजाय 15 मंजिला इमारत बनाए गए, वो भी नौ नहीं 11 मंजिला।

    रविवार को सुबह नोएडा के ट्विन टावर की इमारत कुछ इस अंदाज में आसमान को चूम रही थी

    साथ ही इस योजना के अलावा एक और योजना शुरू हो गई, जिसमें दो और इमारत बनने थे, जिन्हें 40 मंजिला बनाने की प्लानिंग थी। ऐसे में कंपनी और स्थानीय लोगों के बीच कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। सुपरटेक ने टावर वन के सामने 'ग्रीन' एरिया बनाने का वादा किया था। दिसंबर 2006 तक अदालत में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के अनुसार, यह उस योजना में था जिसे पहली बार जून 2005 में संशोधित किया गया था।

    हालांकि, बाद में 'ग्रीन' एरिया वह जमीन बन गया जिस पर सियेन और एपेक्स - ट्विन टावर्स बनाए जाने थे। भवन योजनाओं का तीसरा संशोधन मार्च 2012 में हुआ। एमराल्ड कोर्ट अब एक परियोजना थी, जिसमें 11 मंजिलों के 15 टावर शामिल थे। साथ ही सेयेन और एपेक्स की ऊंचाई 24 मंजिलों से 40 मंजिलों तक बढ़ा दी गई थी। एमराल्ड कोर्ट में रहने वालों ने इसे संज्ञान में लिया और मांग की कि सेयेन और एपेक्स को ध्वस्त कर दिया जाए क्योंकि इसे अवैध रूप से बनाया जा रहा है। निवासियों ने नोएडा प्राधिकरण से उनके निर्माण के लिए दी गई मंजूरी को रद्द करने के लिए कहा। क्षेत्रीय निवासियों ने तब इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील की, जिस पर अदालत ने अप्रैल 2014 में टावरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया।  हालांकि, सुपरटेक ने फैसले के खिलाफ अपील की और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

    सर्वोच्च न्यायालय ने 2021 में, इस तथ्य का हवाला देते हुए नोएडा ट्विन टावर्स को ध्वस्त करने का आदेश दिया कि टावरों का निर्माण अवैध रूप से किया गया था। इसके बाद सुपरटेक ने सुप्रीम कोर्ट से अपने आदेश की समीक्षा करने की अपील की। सर्वोच्च न्यायालय में मामले से संबंधित कई सुनवाई हुई। सुनवाई में एमराल्ड कोर्ट के निवासियों की सुरक्षा के बारे में चिंताएं भी शामिल थीं। इस प्रकरण के बाद शायद अब बड़े बिल्डर भ्रष्टाचार के सहारे अनियमितताएं करके गगनचुंबी इमारतें खड़ी करने से पहले एक बार जरूर सोचेंगे।

    Post Top Ad


    Post Bottom Ad


    Blogger द्वारा संचालित.