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    नई दिल्ली। वैज्ञानिक चेतना से लैस फिल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार।

    नई दिल्ली (इंडिया साइंस वायर): विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति छात्रों और युवाओं में रुचि जगाने और आमजन में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न करने के उद्देश्य से निर्मित 26 फिल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से सम्बद्ध स्वायत्त संस्था विज्ञान प्रसार और मध्य प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 12वें भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव (National Science Film Festival of India)-2022 के दौरान इन पुरस्कारों की घोषणा की गई है। 

    भोपाल में 22 से 26 अगस्त तक आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव के अंतिम दिन मध्य प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा एमएसएमई मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा और खजुराहो के सांसद एवं मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ विष्णुदत्त शर्मा की उपस्थिति में पुरस्कृत विज्ञान फिल्म पुरस्कार प्रदान किये गए हैं। 12वें राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव के संयोजक और वैज्ञानिक-ई, विज्ञान प्रसार – निमिष कपूर ने बताया कि इस वर्ष निर्णायक मंडल ने विभिन्न श्रेणियों में कुल 71 नामांकित फिल्मों का पूर्वावलोकन किया। इनमें इंटरफेस श्रेणी के अंतर्गत 20 फिल्में, फ्यूजन श्रेणी के अंतर्गत 29 फिल्में, आउट ऑफ द बॉक्स श्रेणी के अंतर्गत 17 फिल्में और रेनबो श्रेणी के तहत 05 फिल्म प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई थीं। 

    सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों/संगठनों द्वारा वित्त पोषित/बनायी गई विज्ञान फिल्मों की ‘इंटरफेस श्रेणी’ के अंतर्गत इस वर्ष 1.5 लाख रुपये का गोल्डन बीवर पुरस्कार अकांक्षा सूद द्वारा निर्देशित एवं हैबिटेट्स ट्रस्ट, नोएडा द्वारा निर्मित ‘ऑन द ब्रिंक – इंडियन पैंगोलिन’को दिया गया है। विलुप्त होते भारतीय पैंगोलिन की कहानी को शानदार ढंग से दिखाने के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया है। इसी श्रेणी के तहत एक लाख रुपये का सिल्वर बीवर पुरस्कार मातृभूमि टेलीविजन, केरल द्वारा निर्मित एवं बीजू पंकज के निर्देशन में बनी फिल्म ‘ग्लोबेटेरोटेटर्स ऑफ कोकरेबेलूर’ को मिला है। कोकरेबेलूर में आने वाले प्रवासी पक्षियों के सामुदायिक संरक्षण प्रयासों के मार्मिक और अंतरंग चित्रण के लिए इस फिल्म को पुरस्कृत किया गया है। इंटरफेस श्रेणी में 75 हजार रुपये का ब्रॉन्ज बीवर पुरस्कार प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन, मुंबई द्वारा निर्मित सीमा मुरलीधरा और एच.बी. मुरलीधरा की फिल्म ‘बस्ते किताब से बाहर आयी ध्वनि’ को मिला है। यह फिल्म ध्वनि-विज्ञान को सरल और आकर्षक तरीके से संप्रेषित करती है और विज्ञान की शिक्षा को रोचक बनाकर पेश करती है। 

    विज्ञान फिल्म पुरस्कारों की ‘फ्यूजन’ श्रेणी के अंतर्गत कल्प सांघवी एवं उपमन्यु भट्टाचार्च की ‘वेड (Wade)’ को गोल्डन बीवर पुरस्कार, के. गोपीनाथ की ‘द फर्स्ट फ्लाइट’ को सिल्वर बीवर पुरस्कार, अब्दुल राशिद द्वारा निर्देशित फिल्म ‘मिशन एहसासः वेटलैंड ईकोसिस्टम रिस्टोरेशनः ए वे फॉरवर्ड’ को ब्रॉन्ज बीवर पुरस्कार दिया गया है। ‘फ्यूजन’ श्रेणी में गोल्डन बीवर पुरस्कार के रूप में 1.5 लाख रुपये, सिल्वर बीवर पुरस्कार में एक लाख रुपये और ब्रॉन्ज बीवर पुरस्कार में 75 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं। ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ श्रेणी में एक लाख रुपये का गोल्डन बीवर पुरस्कार आकाश राजपूत की फिल्म ‘माई लाइफ एज ए स्नैल’ को मिला है। जबकि, इसी श्रेणी में 75 हजार रुपये का सिल्वर बीवर पुरस्कार हेमा कुमारी द्वारा निर्देशित की ‘प्रॉफिट फ्रॉम वेस्ट’ और 50 हजार रुपये का ब्रॉन्ज बीवर पुरस्कार संदीप सिंह द्वारा निर्देशित फिल्म ‘मल से निर्मल’ को मिला है। 

    स्कूली छात्रों द्वारा निर्मित ‘रेनबो’ श्रेणी के अंतर्गत चारू बजाज, फाउंटेन हेड स्कूल की फिल्म ‘पहल-ए स्टेप टुवार्ड्स चेंज’ को 75 हजार रुपये का गोल्डन बीवर पुरस्कार, सिद्धार्थ बालकृष्ण दामले की फिल्म ‘जीवो जीवस्य जीवनम् को गोल्डन बीवर पुरस्कार 50 हजार रुपये का सिल्वर बीवर पुरस्कार’ और आर्यन कुमार की फिल्म ‘आइडल इमरसन’ को 30 हजार रुपये का ब्रॉन्ज बीवर पुरस्कार मिला है।

    35 वर्ष तक की आयु की सर्वश्रेष्ठ महिला फिल्म निर्माताओं/सिनेमेटोग्राफर्स/संपादकों को दिया जाने वाला पूनम चौरसिया मेमोरियल अवार्ड ‘प्रॉफिट फ्रॉम वेस्ट, रेड ऐंड ग्रीन’ को प्रदान किया गया है। इस पुरस्कार के अंतर्गत 50 हजार रुपये नकद, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र किया जाता है। ज्यूर स्पेशल मेंशन पुरस्कार ‘टेल ऑफ बेंगाली फ्रॉग’ और ‘सोलोः वंडर हर्ब ऑफ लद्दाख’ को दिया गया है।

    ‘इंटरफेस’ और ‘फ्यूजन’ श्रेणी के अंतर्गत टेक्निकल एक्सिलेंस के लिए विशेष पुरस्कार ‘टेल ऑफ बेंगाली फ्रॉग’ को रिसर्च के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया है। इसी श्रेणी में उत्कृष्ट स्क्रिप्ट के लिए फिल्म ‘ब्रावो बनाना’; उत्कृष्ट एडिटिंग के लिए फिल्म ‘ऑन द ब्रिंक-इंडियन पेंगोलिन’; बेहतरीन सिनेमेटोग्राफी के लिए फिल्म ‘ग्लोबेटेरोटेटर्स’; उत्कृष्ट ‘साउंड रिकॉर्डिंग ऐंड डिजाइन’ के लिए फिल्म ‘वेड’ और बेहतरीन ग्राफिक्स/एनिमेशन/स्पेशल इफेक्ट्स के लिए ‘ऑन द ब्रिंक-इंडियन पेंगोलिन’ को पुरस्कृत किया गया है। 

    ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ और ‘रेनबो’ श्रेणी के अंतर्गत टेक्निकल एक्सिलेंस के लिए विशेष पुरस्कार ‘ए प्रोबायोटिक रिवोल्यूशन’ को उत्कृष्ट रिसर्च; ‘माय लाइफ एज ए स्नेल’ को बेहतरीन स्क्रिप्ट एवं सिनेमेटोग्राफी; ‘फाइटिंग द इम्पॉसिबल’ फिल्म को उत्कृष्ट साउंड रिकॉर्डिंग ऐंड डिजाइन; और फिल्म ‘आई-फोन’ को बेहतरीन संपादन के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया है। इन दोनों श्रेणियों के अंतर्गत प्रत्येक विजेता को 30 हजार रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया जाता है।  

    विजेताओं का चयन प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल द्वारा किया गया है। निर्णायक मंडल में सिद्धार्थ काक, विख्यात फिल्म निर्माता, मुंबई; प्रोफेसर शंभूनाथ सिंह, संस्थापक निदेशक, पत्रकारिता विद्यालय और न्यू मीडिया स्टडीज, इग्नू, नई दिल्ली; डॉ मुकेश शर्मा, मीडिया शिक्षाविद, पूर्व महानिदेशक, फिल्म प्रभाग, मुंबई और एडीजी, दूरदर्शन सह्याद्री, मुंबई; राजीव वर्मा, सुपरिचित अभिनेता, भोपाल; प्रोफेसर रिजवान अहमद, निदेशक, निर्देशात्मक मीडिया केंद्र, मानू, हैदराबाद; प्रोफेसर देबमित्र मित्रा, वरिष्ठ मीडिया शिक्षाविद, पूर्व निदेशक, सत्यजीत रे फिल्म और टेलीविजन संस्थान, कोलकाता; डॉ सुरजीत डबास, सीनियर साइंस कम्युनिकेटर, नई दिल्ली; डॉ डी.जे. पति, निदेशक और डीन, इंडिया टुडे मीडिया इंस्टीट्यूट, नोएडा; सुबोध मिश्रा, वरिष्ठ फिल्म निर्माता और लेखक, नई दिल्ली; टीना कौर पसरीचा, वरिष्ठ फिल्म निर्माता और पटकथा लेखक, मुंबई; और सुपरिचित मीडिया गुरु पुष्पेन्द्रपाल सिंह, भोपाल शामिल हैं। 

    (इंडिया साइंस वायर)

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