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    वाराणसी। बरेका निर्मित विद्युत रेल इंजन अमृत शक्ति स्‍वतंत्रता सेनानियों को किया समर्पित।

    .............. निर्यात के लिए पहला रेल इंजन  मार्च 1976 में तंजानिया के लिए बनाया

    वाराणसी। भारतीय स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत बनारस रेल इंजन कारखाना में एक से 14 अगस्त तक विभिन्न देशभक्ति कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर शुक्रवार को फोटो प्रदर्शनी का शुभारंभ, पत्रकार वार्ता  एवं बरेका निर्मित 6000 अश्‍व शक्ति विद्युत रेल इंजन अमृत शक्ति को महाप्रबंधक अंजली गोयल ने राष्‍ट्र को समर्पित कर स्‍वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धंजलि दी। आजादी का अमृत महोत्‍सव के अंतर्गत बरेका स्थित सूर्य सरोवर परिसर में फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस फोटो प्रदर्शनी का शुभारंभ मंत्रोच्‍चारण के बीच महाप्रबंधक अंजली गोयल ने दीप प्रज्‍जवलन एवं फीता काटकर किया। 

    भारत की आजादी के 75 साल की संस्कृति और उपलब्धियों के गौरवशाली इतिहास को मनाने के लिए बरेका ने इस फोटो प्रदर्शनी के माध्‍यम से अपने स्‍थापना काल से लेकर अब तक की गौरवपूर्ण विकास गाथा को छायाचित्रों के माध्‍यम से दिखाया है। इसमें अब तक आयोजित महत्‍वपूर्ण अवसरों पर ली गयी फाटो को प्रदर्शित किया गया है। साथ ही WAP7 एवं WAG9 रनिंग लोको मॉडल को भी प्रदर्शित किया गया है। दर्शकों की भारी भीड़ इस प्रदर्शनी को देखने के लिए आ रही है। इस अवसर पर संक्षिप्‍त सांस्‍कृतिक कार्यक्रम के तहत दुर्गा स्‍तूति, शिवांसी फिटनेस जोन के बिंदु सिंह के निदेर्शन में उत्‍साह से भरा नारी सशक्तिकरण एवं देशभक्ति नृत्‍य की प्रस्‍तुति की गयी। जिसकी दर्शकों ने सरहाना की । महाप्रबंधक अंजली गोयल ने सूर्य सरोवर परिसर में प्रेस  को संबोधित करते हुए बरेका के लोको उत्‍पादन गतिविधियों अन्‍य कार्यकलापों एवं चल रही परियोजनाओं, भविष्‍य की योजनाओं को विस्‍तार पूर्वक बताया। उन्होंने बताया कि बनारस रेल इंजन कारख़ाना का शिलान्यास 23 अप्रैल 1956 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति स्व. डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने किया था। प्रथम ब्राडगेज रेलइंजन डबल्यूडीएम-2 का शुभारंभ तीन जनवरी 1964 को रेलमंत्री एचसी दासप्पा की उपस्थिति में लाल बहादुर शास्त्री ने किया था। बनारस रेल इंजन कारख़ाना न सिर्फ भारतीय रेल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रेल इंजन का निर्माण कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है। बल्कि घरेलू एवं विदेशी गैर रेलवे ग्राहकों के लिए भी रेल इंजन का निर्माण कर रहा है। बनारस रेल इंजन कारख़ाना ने निर्यात के लिए पहला रेल इंजन तंजानिया के लिए मार्च 1976 में बनाया और इसके बाद से विभिन्न गैर रेलवे ग्राहकों को 630 रेलइंजनों की आपूर्ति की गई। इसमें तंजानिया, वियतनाम, श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार, सेनेगल, सूडान, अंगोला, माली, मोज़ाम्बिक एवं मलेशिया जैसे देशों को निर्यात किए गए 171 रेलइंजन शामिल हैं। न्‍यू लोको टेस्‍ट शॉप में आयोजित समारोह में महाप्रबन्‍धक अंजली गोयल ने बरेका निर्मित 6000 अश्‍व शक्ति विद्युत रेल इंजन अमृत शक्ति शहीदों  क्रांतिकारियों स्वतंत्रता सेनानियों एवं भारत के वीर सैनिकों को समर्पित किया। बरेका निर्मित यह विद्युत रेल इंजन अमृत शक्ति न केवल भारत को अपनी विकासवादी यात्रा लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी बल्कि गौरवशाली इतिहास को मनाने के लिए स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े आज़ादी का अमृत महोत्सव को समर्पित होगी। 6000 अश्व शक्ति विद्युत लोको अमृत शक्ति दक्षिण रेलवे के अजनी यार्ड को भेजा गया है। इस अवसर पर बरेका के अधिकारी और कर्मचारी भारी संख्या में उपस्थित रहे।

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