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    कासगंज। बरौना गांव में संकट के बादल छाए, कटान रोकना प्रशासन के लिए चुनौती।

    • सिंचाई विभाग की तीन डिवीजन कटान रोकने को कर रही जल युध्द,
    • गंगाजल के तेज बहाव के आगे सब कुछ हो रहा धराशायी।
    • देवकली बाढ़ चौकी से प्रशासन का संपर्क टूटा, सड़क कटने से मार्ग अवरुध्द।
    • बोले ग्रामीण! प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को हमारे दर्द से कोई फर्क नहीं , वो तो बस फोटो खिंचवाने आते हैं

    अतुल यादव (रवि)\कासगंज। यूपी के कासगंज जिले का बरौना गांव अपने अस्तित्व को बचाने के लिए गंगा मैया से रहम की गुहार लगा रहा है, उधर जिले की सिंचाई विभाग की टीमों समेत तीन डिवीजन कि सिंचाई कर्मचारी गंगाजल के तीव्र वेग को रोकने के लिए दिन रात युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं।लगभग 9000 की आबादी वाले गांव बरौना में 70 फ़ीसदी परिवार पलायन करके सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं, जबकि 30 फ़ीसदी परिवार अपना सामान समेटकर बेबस आंखों से आशियाना छोड़ने की तैयारी में हैं।


    INA की टीम गांव बरौना पहुंची और ग्रामीणों का दर्द जाना, यहां कैमरे पर बात करते हैं भावुक हुई महिला ने बताया कि कहने को तो उनके जिले की जिला अधिकारी और क्षेत्रीय विधायक महिला हैं, लेकिन उनका दर्द सुनने के लिए किसी के पास वक्त नहीं है। ग्रामीणों के दिल में दर्द है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि गांव में आते तो हैं लेकिन बस फोटो खिंचवाने, ग्रामीणों से बात करने और उनके दर्द को जानने के लिए साहब लोगों के पास वक्त की कमी है।

    बरौना गांव के रहने वाले किसान प्रेमवीर सिंह का दर्द है कि गांव के हालात बेकाबू है, सिंचाई विभाग कटान रोकने के लिए लगा है लेकिन सफलता नहीं मिल रही है, शासन प्रशासन की तरफ से जो राहत और बचाव के इंतजाम किए जा रहे हैं वह नाकाफी हैं। अधिकारी और जनप्रतिनिधि गांव का दौरा करने आते हैं, और सेल्फी खिंचवा कर वापस चले जाते हैं।

    वही कैमरे पर बात करते समय भावुक हुई महिला ओम कुमारी कहती हैं कि गंगा के कटान से वह बेहद डरी हुई हैं, वह अपने बच्चों को और घर के सामान को लेकर इधर-उधर सुरक्षित जगहों पर भाग रहे हैं लेकिन गांव छोड़ने के दर्द से बेचैन है, वह अपने दर्द को महिला अधिकारियों के साथ बांटना चाहते हैं लेकिन आरोप है कि उनकी सुरक्षा में लगे सुरक्षा गार्ड उनसे मुलाकात ही नहीं करने देते।

    वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अब्दुल हफीज गांधी बाढ़ पीड़ितों से लगातार संपर्क कर रहे हैं, क्षेत्रीय विधायक का नादिरा सुल्तान के संबंध में महिलाओं द्वारा की गई शिकायत के बारे में जब उनसे पूछा गया तो उनका जवाब था कि वह इस बात को पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने रखेंगे।

    बरौना गांव की गलियों में पसरा सन्नाटा और घरों में लगे ताले उस गांव की बदहाली और दुर्दशा की कहानी बयां कर रहे हैं, अब गांव में सिर्फ प्रशासनिक और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अलावा और कोई दिखाई नहीं दे रहा है।

    इसके अलावा ग्रामीणों का एक बड़ा आरोप स्वास्थ्य विभाग पर है कि गांव के चारों ओर पानी भर जाने से संक्रमण के चलते बीमारियां भी तेजी से अपने पांव पसार रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग महज खानापूर्ति में जुटा हुआ है।


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