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    स्वतंत्रता की हीरक जयंती के मायने।

    राकेश अचल का लेख। हमारी पीढ़ी का सौभाग्य है कि हम एक आजाद देश में जन्में हैं। हमारा दुर्भाग्य ये है कि  हमें स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने का मौक़ा नहीं मिला। आजाद हिन्दुस्तान ने हमें बहुत कुछ दिया। जो बाकी रह गया वो भविष्य में मिलेगा ही। हिन्दुस्तान को हिन्दुस्तान बनाने में उन असंख्य हिन्दुस्तानियों की भूमिका है जिन्हें  हम-आप जानते तक नहीं हैं। दुर्भाग्य ये है कि हम जिन्हें जानते हैं उन्हें आज अस्वीकार करने की महा भूल कर रहे हैं  | इसके लिए बाकायदा संगठित,सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है | ये घ्रणित अभियान चलाने  वाले न आजादी की कीमत जानते हैं और न उन नायकों की भूमिका को जिनकी वजह से हिन्दुस्तान में आजादी और लोकतंत्र एक साथ विकसित हुए। यदि हम अपने नायकों को खलनायक बनाने पर आमादा होते हैं तो हमसे अधिक कृतघ्न और कोई नहीं हो सकता। 

    पुराने नायकों का मान-मर्दन और नए नायकों का महिमा मंडन दोनों ही अपराध है। हम आजादी के पचहत्तरवें वर्ष में अपराध पर अपराध कर रहे हैं। हम पुराने इतिहास को मिटाकर एक नया इतिहास लिखने की कोशिश कर रहे हैं। हमें इन तमाम राष्ट्रविरोधी कोशिशों से सावधान रहना चाहिए। आज मौक़ा है जब हम सच को स्वीकार करें। स्वीकार करें कि आज देश के शीर्षस्थ पदों पर वे लोग सिर्फ इसलिए  पहुँच सके क्योंकि हमारे आजादी के नायकों ने इसके लिए सीढ़ियां बनाई। यदि ये सीढ़ियां न होतीं तो चाय बेचने वाले प्रधानमंत्री और स्कूल के शिक्षक राष्ट्रपति न बन पाते। बहरहाल ये शिकवे-शिकायतों का नहीं बल्कि हर्षोल्लास का दिन है। ये दिन है इस सच्चाई को स्वीकारने का कि  हमने बीते 74  वर्षों में हर क्षेत्र में आसमान छूने की कोशिश की है। हमारी मौजूदा सरकार की कोशिशें भी इसमें शामिल हैं। हम उन्हें उस तरह खारिज नहीं कर सकते जिस तरह कि हमारी मौजूदा सरकार पिछली सरकार और तत्कालीन नेताओं की कोशिशों को ख़ारिज करती आयी है। हमारे लिए जो राष्ट्र नायक हैं ,वे हमेशा रहेंगे और जो नहीं हैं उन्हें कोई हमारे यानि अवाम के ऊपर थोप भी नहीं सकेगा। हमसे एक दिन पहले बने पाकिस्तान की दशा देख लीजिये। हमारे साथ ही ,हमसे अलग होकर आजादी का झंडा लेकर चले पकिस्तान की आज क्या दशा है वो किसी से छिपी नहीं है | यद्यपि हमारी कुछ जानी -अनजानी गलतियों की वजह से मुल्क का माहौल खराब हुआ है ,नफ़रतें बढ़ीं हैं। किन्तु मुहब्बत फिर भी ज़िंदा है। मुहब्बत जिंदाबाद कहने वाले  लोग हर तरफ खड़े हैं। 

    आजादी बिना खड्ग-ढाल कि मिली है। सत्याग्रह से मिली है। असंख्य बलिदानों से मिली है |इस दौरान हमारे लोगों ने हथियार भी उठाये, सेनाएं भी बनाएं.बम भी फोड़े, वे फांसी पर भी लटके और उस उम्र में बलिदान देने के लिए आगे आये जब हमारे ही लोग खराब स्वास्थ्य का बहाना बनाकर माफियां मांगकर जेलों से बाहर आ रहे थे | ऐसे लोगों ने भी अपने तरीके आजादी हासिल करने कि लिए अपने ढंग से कोशिशें कीं। उनकी कोशिशें भी इतिहास में दर्ज हैं। लेकिन वे जैसा भारत बनाने के लिए लड़ रहे थे,वैसा भारत किसी को कल भी नहीं चाहिए था और आज भी नहीं चाहिए। भारत ने बहुत से विदेशी आतताइयों कि अधीनता अपनी कमजोरियों की वजह से भुगती और उससे मुक्त होने की बहुत बड़ी कीमत चुकाई है। इसलिए आज आवश्यकता है कि हम अपनी इस थाती को सम्हाल कर रखें | इसे नफरत की आग में न झौंके। हम रियासतों ,जागीरों ,जमींदारियों को होम कर एक राष्ट्र बने हैं। हमें इस एकता को हर कीमत पर बनाये रखना है। ये काम सत्ता का भी है और जनता का भी | कोई इस उत्तरदायित्व से अलग नहीं हो सकता। ये एकता घर-घर तिरंगा फहराने से नहीं बल्कि घर-घर सुख,शांति और समृद्धि पहुँचाने से होगी। जब हम 75  साल पहले के जख्मों को कुरेदने की कोशिश करते हैं तो सुख का सूरज आँखें कैसे खोल सकता है ? जख्मों पर समय की मलहम लगाई जा चुकी है। जख्म भरने लगे हैं ,उन्हें कुरेदना अनाड़ीपन है | बेहतर हो कि हम अपने नाखून कतर लें। 

    पिछली कुछ वर्षों में भाषा,भाषा,वेश ,जाती और धर्म के मुद्दे फिर से उठाने की कोशिश की जा रही है. ये खतरनाक कोशिश है। ये आजादी के लिए खतरनाक है और विकास के लिए भी। एकता के लिए भी खतरनाक है और सम्प्रभुता के लिए भी, इसलिए कृपाकर आजादी की राह में कांटें मत बोइये,कांटे नाबोइये। आजादी की राह में एकजुटता के गुलाब बिखेरने की आवश्यकता है। अतीत गवाह है कि संकीर्णता हमेशा से आजादी की शत्रु रही है. 1757  में भी थी ,1857  में भी थी और 2022  में भी है। दल-बदल और मीर जफर हर युग में होते ए हैं ,किन्तु इनकी वजह से मुल्क की तरक्की कभी नहीं हुई। आज मै संकेतों में अपनी बात कह रहा हूँ। समझने वाले इसे सम्भवत: समझ जायेंगे,और जो न समझेंगे उन्हें अनाड़ी ही समझा जाएगा। आइये हम सब मिकर इस स्वतंत्रता के इस अनमोल क्षण को राजनीति से ऊपर उठकर मिलजुलकर मनाएं। कोशिश करें कि हमारी आजादी युगों-युगों तक अक्षुण रहे। स्वतंत्रता की हीरक जयंती की कोटि-कोटि बधाइयाँ और शुभकामनाएं। 

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