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    देवबंद। हजरत इमाम हुसैन की याद में, महफिल ए हुसैन, का आयोजन किया गया।

    ........... जिनके दम से देहर में ईमान की रोशनी सच तो ये है हक के मीनारे हुसैन है: शमीम किरतपुरी

    शिबली इकबाल\देवबंद। नगर के मौहल्ला बड़ जियाउलहक स्थित दरगाह हजरत अजमत अली साबरी पर 10 मोहर्रम के मौके पर हजरत इमाम हुसैन की याद में,महफिल ए हुसैन, का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता सज्जादा नशीन दीवान शाह कमरुज्जमा साबरी ने की संचालन जहान ए अदब एकेडमी के चैयरमेन शायर तनवीर अजमल द्वारा किया गया। महफिल में शायर तनवीर अजमल ने हजरत इमाम हुसैन को याद करते हुए सुनाया कि तड़प शदीद है दिल में शहीद होने की, हमारे खून में अब तक असर हुसैन का है।दीवान शाह कमरुज्जमा साबरी ने सुनाया कि ए अली के लाल तेरा ही था दिल और जिगर नजरे मौला कर दे भाई भतीजा और पसर को प्रदान। 

    हजरत इमाम हुसैन की याद में, महफिल ए हुसैन में अपना कलाम पेश करते शायर तनवीर अजमल

    शमीम किरतपुरी के इस शेर कि है जिनके दम से देहर में ईमान की रोशनी सच तो ये है हक के मीनारे हुसैन है। दिलशाद खुश्तर के कलाम वो ही खुल्द बरी के शहजादे, ये मुकद्दर मेरे हुसैन का है। अदनान अनवर ने कुछ यूं सुनाया कि रहमतों के साये है नूर का खजाना है खुल्द से कही बढ़ कर वादिये मदीना है। जाहिद देवबंदी के इस शेर *मदीने पहुंचा कोई सवाली, मौहम्मद के सदके वो लौटा ना खाली। अब्दुर रज्जाक ने कुछ यूं सुनाया की आला है नाम तेरा अदनी जबान हमारी, तेरी सना हो हमसे ताकत कहा हमारी। इन के अलावा अन्य शायरों ने भी अपने अपने कलाम पेश कर श्रोताओं की जमकर वाह वाही लूटी। इस दौरान सैयद अली साबरी, सैयद अफजाल साबरी, सैयद हमजा साबरी, सलीम अंसारी, सय्यद रफाकत अली, इरशाद सलमानी, करीम खान, नसीम अंसारी, मसरूर ठेकेदार, लियाकत अंसारी, वसीम, फुरकान अहमद, समीर, बाटु सेफी, आदि मौजूद रहे।

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