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    आगरा के चार प्रसिद्ध शिवमंदिर

    आगरा। कल-कल निनाद करती यमुना नदी और उसके पावन तट पर स्थित आगरा नगर का ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व है। इस नगर में भगवान शिव का अपना विशिष्ट स्थान है। चारों कोनों पर प्रतिष्ठित राजेश्वर महादेव, बल्केश्वर महादेव, कैलाश महादेव एवं पृथ्वीनाथ महादेव इस नगर को बाहरी विपत्तियों, उत्पातों से बचाते हैं, वहीं नगर के मध्य में स्थित श्री मनःकामेश्वर नाथ तथा रावली महादेव नगरवासियों की आंतरिक सुरक्षा करते हुए सुख समृद्धि प्रदान करते हैं। छद्म इतिहासकारों द्वारा विश्व भर में यह सत्य स्थापित कर दिया गया कि आगरा को ताजमहल के नाम से जाना जाता है लेकिन यदि आप आगरा के किसी व्यक्ति से पूछेंगे कि आगरा क्या है तो वह बताएगा कि आगरा शिव की नगरी है। इसका कारण है आगरा के चारों कोनों पर चार प्रसिद्ध और अति प्राचीन शिवालयों का स्थित होना जिनका अपना पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु देश भर से यहां दर्शन करने आते हैं और इन प्राचीन मंदिरों में भगवान शिव के दर्शन प्राप्त करते हैं। इन सभी शिवालयों के विषय में कहा जाता है यहां पर मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इन शिव मंदिरों में प्राचीन समय से श्रावण मास में विशाल मेलों का भी आयोजन होता आया है। 

    मनकामेश्वर मंदिर आगरा

    • श्री मनकामेश्वर मंदिर-  
    भगवान शिव के इस प्राचीन और भव्य मंदिर के विषय में कहा जाता है कि द्वापर युग में स्वयं भगवान शिव ने इस शिवलिंग का निर्माण किया था ।इस शिवलिंग पर चांदी की परत चढ़ी हुई है और केवल  भारतीय परंपरागत वेशभूषा धोती और कुर्ते में ही इस शिवलिंग के समीप जाने की अनुमति है। 

    बलकेश्वर मंदिर आगरा
    • बलकेश्वर मंदिर-

    आगरा के बल्केश्वर क्षेत्र में यमुना किनारे स्थित यह मंदिर भी अति प्राचीन है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन कर स्वयं को धन्य करते हैं। श्रावण मास में यहां विशाल मेले का आयोजन होता है। 

    पृथ्वीनाथ मंदिर आगरा
    • पृथ्वीनाथ मंदिर-

    पृथ्वीनाथ मंदिर आगरा के शाहगंज क्षेत्र में स्थित है ।मान्यता है इस मंदिर का इतिहास पृथ्वीराज चौहान से जुड़ा हुआ है ।इस विषय में बताया जाता है इस स्थान पर पहले एक घना वन हुआ करता था । एक बार महाराजा पृथ्वीराज चौहान यहां से गुजर रहे थे। थक जाने पर वे यहां कुछ देर विश्राम के लिए लेटे । उन्होंने अपने घोड़े को एक स्थान पर बाँधा लेकिन वह कुछ समय बाद खुल गया। उन्होंने दोबारा घोड़े को बांधने के लिए स्थान की तलाश की तो उन्हें एक शिवलिंग मिला जिस से उन्होंने घोड़े को बांधने का प्रयास किया। लेकिन घोड़ा नहीं बन पाया । और जब उन्होंने शिवलिंग को वहां से उखाड़ने की कोशिश की तो  बहुत प्रयास करने पर भी शिवलिंग का दूसरा छोर नहीं मिला। तब महाराजा पृथ्वीनाथ में उस स्थान पर पृथ्वीनाथ मंदिर की स्थापना की ।और तब से ही यहां पूजा अर्चना ,अभिषेक होता आया है। हजारों की संख्या में श्रावण मास में शिव भक्त यहाँ दर्शन के लिए आते हैं। 

    कैलाश मंदिर

    • कैलाश मंदिर-

    कैलाश मंदिर आगरा में यमुना के किनारे   स्थित है ।पौराणिक मान्यता है कि इसकी स्थापना त्रेता युग में हुई। भगवान परशुराम ने अपने पिता जमदग्नि के साथ कैलाश में भगवान शिव के लिए कड़ी तपस्या की अखंड तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें 11 शिवलिंग दिया भगवान परशुराम और उनके पिता उन शिवलिंग ओं को लेकर आगरा वापस आए और अग्रवाल में उन्होंने अपने आश्रम रेणुका से पहले विश्राम के लिए रुके अगले दिन सुबह जल्दी ज्योतिर्लिंगों की पूजा करने के लिए गए तो वे शिवलिंग वहीं जमीन में गढ़ गए और आकाशवाणी हुई थी उस स्थान का नाम कैलाश धाम कहा जाएगा। यमुना के किनारे का स्थान परशुराम की मां और ऋषि जमदग्नि की पत्नी माता रेणुका के नाम से जाना जाता है जिसकी व्याख्या भगवत गीता में भी। की गई है रेणुका के नाम पर ही इस जगह का नाम रुनकता हुआ। भगवान परशुराम ऋषि जमदग्नि के द्वारा शिवलिंग की स्थापना करने होने के कारण इस जगह का पौराणिक महत्व है। 

    किताब-  आगरा मुगल नहीं ब्रजभूमि है से लिया गया एक अंश

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