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    कानपुर। मुल्क हिन्दुस्तान को आज़ाद कराने में उलमा ने जान व माल की कुर्बानियां पेश कीं (मौलाना मो.हशिम अशरफी)

    इब्ने हसन ज़ैदी\कानपुर। स्वतंत्रता  दिवस खुशियों का कौमी त्यौहार है इस अवसर पर तिरंगा फहराने से मुल्क की मुहब्बत ज़ाहिर होती है इन विचारों को कौन्सिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मो.हाशिम अशरफ़ी इमाम ईदगाह गद्दियाना ने बशीर स्टेट चीना पार्क में आल इंडिया ग़रीब नवाज़ कौन्सिल के तत्वाधान में आयोजित ‘’मुल्क की आज़ादी और उलमा-ए-अहले सुन्नत की कुर्बानी’’ के प्रोग्राम में व्यक्त किये। अशरफी  ने कहा मुल्क की आज़ादी में हज़ारों उलमा को फाँसी दी गयी बहुतों को काले पानी की सज़ा हुई मगर उलमा पीछे नहीं हटे और डट कर आखरी दम तक मुल्क की आज़ादी के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए उन्हों ने जांबाज़ बहादुरों में से एक नाम अल्लामा फजले हक खैराबादी का है उन्हों ने अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद का फतवा दिया और 1857 की जंग में बहादुर शाह ज़फर के साथ थे जिस की वजह से अंग्रेजों ने आप को काले पानी की सज़ा दी और आप का इन्तिकाल हो गया वहीँ आप का मज़ार है। 

    इसी तरह शाह वली उल्लाह मोहद्दिसे देहलवी,मौलाना हसरत मोहानी,मौलाना अब्दुल जलील,मौलाना मो.फैज़ अहमद बदायुनी,मौलाना इनायत अहमद काकोरवी,अल्लामा फजल इमाम खैराबादी,मौलाना अहमद उल्लाह शाह मद्रासी,मौलाना किफ़ायत अली काफी मुरादाबादी,मुफ़्ती सद्रुद्दुइन आज़ुर्दा,मौलाना रजा अली बरेलवी,मुफ़्ती मजहर करीम दरयाबादी,मौलाना लियाक़त अली इलाहाबादी,मौलाना वहाजुद्दीन मुरादाबादी,मौलाना लुत्फुल्लाह अलीगढ़ी,क़ाज़ी फैज़ुल्लाह कश्मीरी,मौलाना कासिम दानापुरी आदि उलमा-ए अहले सुन्नत की एक लम्बी फेहरिस्त है। जिन्हों ने अपने कलम और तकरीरों से कौम के अन्दर वतन पर जान कुर्बान करने का जज़बा पैदा कर दिया और खुद भी वतन पर जान कुर्बान करके अमर हो गए इस अवसर पर काउन्सिल ने गुज़ारिश की मुल्क के संविधान ने हमें जो मज़हबी आज़ादी का हक दिया है उसमें छेड़ छाड़ ना करें जलसे की सदारत मौलाना महताब आलम मिस्बाही ने फरमाई और विचार भी रखे। हाफिज मो.अरशद अशरफी व लोगों ने मिलकर कौमी तराना पढ़ा जिस जिस से माहौल खुशगवार हो गया। इस से पूर्व प्रोग्राम का आगाज़ कुरान पाक की तिलावत से मौलाना ग़ुलम हसन ने किया। शोरा ने नातें पढ़ीं संचालन हाफिज मोहम्मद अरशद अशरफी ने किया | सलातो सलाम और मुल्क की तरक्की व खुशहाली की दुआओं के साथ जलसा ख़त्म हुआ इस अवसर पर प्रमुख रूप से हाफिज अब्दुल रहीम बहराइची,मौलाना मतीउर रहमान,कारी अब्दुर रशीद,हाफिज मिनहाज कादरी असीरुद दीन अशरफी, मुश्ताक अहमद नूरी, अज़ीम नूरी आदि उपस्थित रहे। 

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