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    श्रावस्ती। फसलों को सूखता देख नाराज किसानों ने किया प्रदर्शन, माइनर में पानी ना आने से सूख रही किसानों की फसलें।

     .......... भगवान इंद्र के रूठने से कुछ बचा भी था तो अब नहर विभाग नहीं देगा

    श्रावस्ती। जनपद में केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी सरयू नहर परियोजना जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। माइनर में पानी ना आने के कारण किसानों की फसलों के साथ-साथ उनका गन्ना भी सूख रहा है। किसानों का आरोप है कि कई बार शिकायतों के बाद भी माइनर में पानी नही छोड़ा जा रहा है।

    यह हाल कहीं और का नहीं बल्कि विकास खण्ड सिरसिया के ग्राम पंचायत जानकी नगर कलां गाँव का है, जहाँ पर सरयू नहर से माइनर में पानी ना आने से नाराज किसानों ने जोरदार प्रदर्शन कर नहर विभाग के विरोध में नारे लगाए। भिनगा विधानसभा क्षेत्र के गांव जानकी नगर कलां के किसानों ने बताया कि माइनर सूखी पड़ी है इसमें पानी नही छोड़ा जाता है। हम लोग बहुत परेशान हैं हमारी धान और गन्ने की फसल सूख रही है। डीजल इतना महंगा है कि हम लोग उससे सिंचाई कर नहीं सकते हैं। जिससे खेती किसानी पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। हम लोगों का सुनने वाला कोई नहीं है। नहर विभाग द्वारा कभी-कभी कागजो में दिखाने के लिए पानी छोड़ दिया जाता है लेकिन यह पानी हम लोगों के खेतों तक नहीं पहुंचता है। जिससे सिंचाई प्रभावित हो रही है। साथ ही साथ इस भीषण तपिस में गन्ना सहित जायद की सभी फसलें लगभग सूख चुकी हैं।

    पूर्व प्रधान उदय प्रताप तिवारी, मालिक राम और अरविंद कुमार एवं अरुण कुमार सहित अन्य प्रदर्शनकारी किसानों का कहना था। कि माइनर में पानी छोड़े जाने के लिए जब हम लोगों ने विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि अभी पानी नहीं छोड़ा जाएगा। जब हम लोगों की फसल सूख जाएगी तो फिर पानी छोड़े जाने का क्या मतलब होगा। प्रतिवर्ष विभाग हम लोगों के साथ यही खेल कर रहा है। जब पानी की जरूरत होती है तो मानइर में पानी नहीं आता है। फसल पककर तैयार हो जाती है। उसके कटाई का समय जब आता है तो पानी छोड़ दिया जाता है। जिससे खेतों में पानी भर जाने के कारण फसल बर्बाद भी हो जाती है। कभी भी विभाग द्वारा हम लोगों को सिंचाई के लिए समय से पानी नहीं दिया गया। यह हाल तब है जब पड़ोसी जनपद बलरामपुर में स्वयं प्रधानमंत्री ने इस परियोजना को किसानों को समर्पित करते हुए कहा था। कि यह परियोजना किसानों के लिए वरदान साबित होगी। वैसे सरयू नहर खंड की एक ही नहीं करीब आधा दर्जन ऐसी माइनर हैं। जिनका संचालन सिर्फ कागजों में किया जा रहा है। माइनर से किसान के खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। जिम्मेदार अधिकारी कागजों में नहर का संचालन कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं।

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