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    कानपुर। कत्ले हुसैन अस्ल में मर्गे यजीद है, इस्लाम ज़िदा होता है हर कर्बला के बाद :- सैय्यद नूर आलम मिस्बाही।

    इब्ने हसन ज़ैदी\कानपुर। मुस्लिम वैल्फेयर एसोसिएशन की जानिब से 46 वां सालाना दस रोज़ा इजलास "पैगामे शहीद ए आज़म" तिलक नगर स्थित पीरो वाली मस्जिद के मैदान बरकाती ग्राउंड मे आयोजित किया गया है जिसकी रविवार को 8वीं महफ़िल मुनक्किद हुई। प्रोग्राम का आगाज़ हाफिज़ फज़्ले अज़ीम रहमानी और संचालन डॉक्टर नासिर बेग बरकाती ने किया, मिर्ज़ा अशरफ बरकाती, अकरम अली कादरी, दिलशाद रज़ा, अमन रज़ा और मोनिस चिश्ती ने नात व मनकबत पढ़ी।

    कानपुर से आये मौलाना मुश्ताक मुशाहिदी ने तकरीर की और अहलेबैत की अज़मत समझायी और कहा कि हुज़ूर ने फरमाया जिसने मेरे अहलबैत से मुहब्बत की उसने मुझसे मुहब्बत की और जिसने मेरे अहलबैत से बुग्ज़ रखा उसने मुझसे बुग्ज़ रखा। इसके बाद अलीगढ़ से तशरीफ लाये मेहमाने खुसूसी सैय्यद नूर आलम मिस्बाही साहब ने तकरीर की और कहा कि चौदह सौ वर्ष पूर्व 61 हिजरी में कूफा में अहलेबैत पर जो ज़ुल्म यज़ीदियों ने ढाए उसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। हक व बातिल की जंग में इमाम आली मुकाम ने इस्लाम को ज़िंदा रखने के लिए अपनी व अपने जांनिसारों की कुर्बानी देकर इस्लाम को हमेशा हमेशा के लिए ज़िदगी बख्श दी। कत्ले हुसैन अस्लमे मर्गे यजीद है, इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद।

     शहबाज़ खान की जानिब से सभी को रुहअफज़े का शर्बत पिलाया गया और रज़ा ए मुस्तफा कमेटी ने आए हुए सभी अकीदतमन्दो को चाय पिलाई मुख्य रूप से शारिक बेग बरकाती, सैय्यद इस्राफील, कामरेड रज़्ज़ाक, अब्दुल वहाब, आसिफ बेग, आकिल बेग, रईस अहमद, वामिक बेग, ज़िया बेग, अर्शी, शानू, रूमान, अनवारुल, फरहान गौरी, शोएब अहमद आदि लोग मौजूद रहे।

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