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    पल भर के लिए डर जाओ राहुल।

    राकेश अचल का लेख। कांग्रेस के नेता और भाजपा के पप्पू राहुल गांधी से आज मुझे एक विनम्र अपील करना है।  मेरी अपील है कि राहुल गांधी पल भर के लिए ही सही लेकिन डर जाएँ ,ताकि देश का कीमती वक्त उनके ऊपर खराब न हो, देश उन्हें डराना चाहता है और वे हैं कि डर ही नहीं रहे, ये गलत बात है। ये राष्ट्रविरोधी बात है। 

    देश की संसद चल रही है ,लेकिन सरकार कांग्रेस और राहुल गांधी को डराने में लगी है। प्राण-पन से लगी है। अभी तक उसका मन नहीं भरा है। सरकार की ईडी कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी से घंटों लम्बी पूछताछ कर चुकी है किन्तु उन्हें गिरफ्तार करने में हिचक रही है। माँ-बेटे पूछताछ से नहीं डरे तो सरकार  की ईडी ने नेशनल हेराल्ड के दफ्तर को सील कर दिया। सरकार के पास पावर है ,वो किसी को भी सील कर सकती है, बावजूद इसके माँ-बेटे की जोड़ी डरने को राजी नहीं है। 

    इस देश की ईडी इस देश की संसद से बड़ी है। संसद सत्र के चलते उसने लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को तलब कर लिया, न सदन के अध्यक्ष को बताया और न अनुमति ली,बस तलब कर लिया। खड़गे साहब ने ही सदन को बताया की उन्हें ईडी ने बुलाया है। खड़गे साहब भी ईडी से नहीं डरे , अब ईडी क्या करे ? कैसे कांग्रेस और कांग्रेसियों को डराए ? जब तक कांग्रेस नहीं डरती तब तक लोगों के मन से सरकार और ईडी का भय जाने वाला नहीं है | जबकि सरकार का सूत्र ही है-' भय बिन होय न प्रीत "। 

    कायदे से सरकार को आजादी के अमृत महोत्स्व के भव्य समापन के लिए सभी दलों के सांसदों और नेताओं से मिलजुल कर योजना बनाना चाहिए थी, किन्तु सरकार सबको डराने में लगी है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री को डराया ,फिर उप मुख्यमंत्री को डराने की कोशिश की। बंगाल का एक भ्र्ष्ट मंत्री तो ईडी के जाल में फंस ही गया।  मकसद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को डराना था। वे डर चुकी हैं, इससे पहले माया बहन को,अखिलेश बाबू को  डराया जा चुका है ,उनकी बोलतियाँ बंद हैं। झारखंड में ,बिहार में भी डराओ अभियान पर काम चल रहा है। लेकिन कांग्रेस पर आकर अभियान नाकाम हो जाता है। 

    जनता में सरकार के प्रति प्रीत पैदा करने के लिए जीएसटी का इस्तेमाल किया जा रहा है। जनता पर ईडी का इस्तेमाल किया नहीं जा सकता ,क्योंकि जनता तो पिछले आठ साल में इतनी लुट चुकी है कि उसके पास माल है ही नहीं, ले-देकर दही और मही था सो उस पर भी जीएसटी लगा दिया। जनता फिर भी नहीं डरी, जनता जीएसटी देने को राजी है लेकिन डरने को नहीं, जनता जानती है कि  जो -' डर गया, सो मर गया '| मरना कोई नहीं चाहता,  जनता ने इसीलिए कोविड के टीके लगवा लिए। 

    देश को स्वतंत्रता की 75 वीं साल में डरना बहुत जरूरी है। सरकार चाहती है कि जनता 1947 के पूर्व के डर को महसूस करे और आजादी का मतलब समझे। सरकार चाहती है कि अमृत महोत्सव का अर्थ ही डर को समझना है। सरकार ने जितने भी निर्भीक लोग हैं उन सबकी फेहरिस्त बनाकर उन्हें डराने का अभियान चलाया है। माल्या और मरहुल चौकसे जैसों की तो सम्पत्ति भी जब्त की है। लेकिन कीर्ति चिदंबरम हों या रॉवर्ट वाड्रा , शिवेंद्र मोहन हों या संजय राउत डरने के बजाय जेल जाने को तैयार हैं। बाकी कि जो निडर लोग थे वे अपना बोरिया-बिस्तर समेत कर विदेशों में जा बसे, ऐसे लोग आठ हजार बताये जाते हैं। 

    देश इस समय आर्थिक संकट से जूझ रहा है, सरकार को सरकार चलाने के लिए वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली रियायतें बंद करना पड़ी हैं। मनरेगा के मजूरों का मेहनताना रोकना पड़ा है। सरकार सब्सिडी यानि राज सहायता तो पहले से ही रोक चुकी है। ऐसे में यदि देश की जनता और नेता निर्भीक हो जायेंगे तो देश आखिर चलेगा कैसे ? देश चलना पहली शर्त है, जनता और नेताओं को ये हकीकत समझना चाहिए और सरकार से डरना चाहिए। देश के नेता और जनता ढीट हैं, इसीलिए सरकार का कोप लगातार बढ़ रहा है। 

    जैसा किआप सब जानते हैं कि  मै किसी भी राजनितिक दल का सदस्य नहीं हूँ, इसलिए सभी से मेरे रिश्ते बरकरार हैं। सत्तारूढ़ भाजपा से भी, मै तो सरकार से भी कहता हूँ कि  सबको साथ लेकर ही सबका विकास नहीं होगा,जरूरत है  कि  सबसे बनाकर चलो, लेकिन मेरे जैसों की सुनता कौन है ? सरकार यदि हर ऐरे-गैर की सुनने लगेगी तो फिर तो चल गयी सरकार, सरकार को केवल अपनी अंतरात्मा की सुनना चाहिए। बाकी कौन ,क्या कहता है इसपर ध्यान देने की कोई जरूरत नहीं है। 

    मै इसीलिए राहुल गांधी से कहता हूँ कि उन्हें देशहित में झुक जाना चाहिए, डर जाना चाहिए। क्योंकि सरकार मानेगी नहीं ,उन्हें झुका कर,डराकर  ही दम लेगी। सरकार को पक्का भरोसा है कि  झुकाने वाला हो तो आसमान भी झुक जाता है राहुल गांधी किस खेत की मूली हैं ? सरकार से बस यहीं गलती हो जाती है। सरकार राहुल गांधी को पप्पू समझे चलेगा, नाकाम नेता समझे चलेगा, किन्तु झुकने वाला समझ ले ,ये नहीं चलने वाला। राहुल बहुत विनम्र आदमी हैं। सरकार एक बार उनसे एकांत में बैठकर बात कर लेती तो वे फौरन झुक जाते,डर जाते। राहुल देश के लिए कुछ भी कर सकते हैं। उनके पिता और दादी ने देश के लिए जान दे दी। सरकारी पार्टी में से एक आदमी बता दीजिये जो राहुल की तरह विनम्र हो। 

    पिछले कुछ दिनों से देख रहा हूँ कि  सरकार का घर-घर झुकाओ अभियान कुछ शिथिल पड़ गया है। स्मृति बहन का चीखना-चिल्लाना भी किसी काम का नहीं रहा। कोई झुक ही नहीं रहा,डर ही नहीं रहा और जब तक जनता और विपक्ष के नेता झुकेंगे नहीं,डरेंगे तब तक देश सुचारु रूप से चलेगा कैसे ? विपक्ष को समझना चाहिए कि देश की प्राथमिकता लोगों को तनकर खड़ा होना सीखना नहीं बल्कि झुकाना और डराना है। जो नहीं झुकेगा उसे जबरन झुका  दिया जाएगा।  मुमकिन है कि संसद में किसी रोज इस आशय का कोई अध्यादेश आ जाये ,जो कहे की राष्ट्रहित में झुकना,डारना अनिवार्य है और न झुकना , न डरना अपराध। इसलिए प्लीज ! झुकिए ,डरिये, एक बार तो झुकिए ,डरिये। 

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