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    मिश्रित\सीतापुर। लंबे समय से जमे लिपिक वर्गीय लोगों को हटाकर दूसरी जगह भेजने की प्रक्रिया पर मिश्रित तहसील में प्रश्न चिन्ह।

    संदीप चौरसिया

    मिश्रित\सीतापुर। विभिन्न कार्यालयों को जनहित में स्वच्छ बनाने के लिए लंबे समय से जमे लिपिक वर्गीय लोगों को हटाकर दूसरी जगह भेजने की प्रक्रिया पर मिश्रित तहसील में प्रश्न चिन्ह लगता दिखाई दे रहा है। ज्ञातव्य हो लिपिक वर्गीय लोगों की स्थानांतरण प्रक्रिया इसलिए मिश्रित तहसील में हास्य पद साबित हो रही है कि अंगद पांव की तरह यहां जमकर पूरी नौकरी यही गुजार देने का सपना संजोए लोग जहां निरंतर अपनी कुर्सियों पर काबिज बने हुए हैं वही इन धुरंधरों के बाद में यहां तैनाती पर आए दो लिपिकों का स्थानांतरण जनपद की अन्य तहसीलों के लिए पांच वर्षीय कार्यकाल की बाध्यताओं के तहत कर दिया गया है। 

    आखिरकार ऐसा मापदंड क्यों ?जो  गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहा है ।बताते चलें कि मिश्रित तहसील में उप जिलाधिकारी के स्टेनों पद पर तैनात लिपिक वर्गीय प्रहलाद कुमार भारती जो इसी ब्लॉक क्षेत्र के एक गांव के निवासी हैं लगभग आधे से अधिक अपनी सर्विस का कार्यकाल इसी तहसील में गुजारे दे रहे हैं इतना ही नहीं उप जिलाधिकारी के पेशकार पद पर तैनात सुरेश मौर्य भी लंबे समय से यहां तहसील में जमे हुए हैं इसी तरह तहसील के अधिवक्ता बताते हैं कि अपर तहसीलदार की सीट तो वर्षों से खाली है लेकिन उनके पेशकार के पद पर तैनात आरपी सिंह भी अंगद पांव की तरह वर्षों से यहां जमे हुए हैं गौरतलब है कि इन लिपिक वर्गीय धुरंधरों  पर क्या कोई स्थानांतरण नीति प्रभावी नहीं है या किसी एप्रोच के चलते उनका स्थानांतरण नही किया जा रहा है। आखिरकार ऐसे कौन से कारण हैं कि यह लोग स्थानांतरण प्रक्रिया से अछूते बने हुए हैं। जिसकी तरफ जिला प्रशासन और प्रदेश शासन को गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।

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