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    जन्माष्टमी पर विशेष

    संभल। द्वापर में भगवान कृष्ण रुक्मिणी के साथ संभल आए थे!वे यहां कदंब के पेड़ के नीचे रुके थे। जो अब भी मौजूद है। संभल के इस वंशगोपाल कल्कि धाम से जुड़े संस्मरण वेदव्यास ने लिखे हैं। भगवान कृष्ण के जन्मदिवस पर अपैक्स न्यूज इंडिया अपने दर्शकों को उस कदंब के पेड़ जिसके छांह तले भगवान रुके थे कलयुग में यहीं अवतार लेंगे उस पावन स्थल का दर्शन कर रहा है। 

    भगवान कृष्ण के इस धाम पर जन्माष्टमी पर जहां कन्हैइया को पालने में झुलाया जा रहा है वहीं मान्यता है जिनको औलाद नहीं होती है उनको यहां दर्शन से औलाद की प्राप्ति होती है वहीं यहां मत्था नवाने से धन दौलत समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। भगवान श्रीकृष्ण ने यहां रुक्मिणी से स्वंय कहा था कि वे कलयुग में कल्कि रूप में यहीं अवतार लेंगे!!! क्या है? योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण का ये स्मृति स्थल जहां परिकृमा होती है और भगवान स्वंय यहां आकर ठहरे थे तथा कलयुग में वे यहीं पर अवतार लेंगे!! देखें पूरी रिपोर्ट में इस धाम के महंतश्री के श्रीमुख से....

    भतवदप्रिय महंत श्रीवंशगोपाल कल्किधाम तीर्थ

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