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    कानपुर। क्लाइमेट चेंज से बच्चों में टेंशन बना रहा नशे का रोगी।

    इब्ने हसन ज़ैदी\कानपुर। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों में भी यह बात कही गई है कि हर साल करीब 1.5 करोड़ बच्चे समय से पहले ही जन्म ले लेते हैं तो वही दो करोड नवजात बच्चों का वजन जन्म के समय सामान्य से कम रहता है ऐसे में यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि मानव के बढ़ते लालच और नशे की लत ने पर्यावरण की समस्या व नशाखोरी को जन्म दिया है और अब जिसका दुष्परिणाम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है  जिससे हर वर्ष पचास लाख से ज्यादा बच्चे मुख कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं मिडास ग्रुप के डायरेक्टर उपेंद्र मिश्रा ने कहा कि बढ़ती नशाखोरी प्रदूषण व कुपोषण से सबक न लिया तो वह दिन दूर नहीं जब मानव नित नए वायरस की चपेट में फंसेगा और जिसका कोई इलाज वर्तमान सरकारों के पास नहीं होगा। 

    उपाध्यक्ष अंजू सिंह एवं मानवाधिकारवादी गीता पाल ने कहा कि भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देशों के बच्चे बढ़ती नशाखोरी,कुपोषण और जलवायु संकट के गंभीर प्रभाव का सामना कर रहे हैं आर आर ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन के चेयरमैन अनिल कुमार अग्रवाल ने कहा कि आज बच्चे डर के माहौल में जीने को मजबूर हैं जिसका सीधा असर ना केवल उनके शरीर पर बल्कि मन पर भी पड़ रहा है यही वजह है कि बच्चे मानसिक अवसाद मोटापे के शिकार होकर नशे की अंधी गलियों में जा रहे हैं हिंदू जागरण मंच के प्रदेश संयोजक पियूष रंजन मिश्रा ने कहा कि निश्चय कर लीजिए कि आप अपने मन को मन की मनोदशा से अब और ग्रस्त नहीं होने देंगे उसी क्षण से नशा से आप कोसो दूर हो जाएंगे, अन्य प्रमुख क्रांतिकारी चंद्रपाल सिंह (दद्दू बाबा) राजेश सचान बद्री नारायण तिवारी इत्यादि थे।

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