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    सम्भल। जलसे में सय्यद मखदूम अशरफ के जीवन पर डाली रोशनी।

    उवैस दानिश\सम्भल। सुल्तान हज़रत सय्यद मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी रह० के सालाना तीन रोज़ा उर्स का आगाज महफिले मिलाद पाक के हुआ था। उर्स के दूसरे दिन जलसे का आयोजन किया गया। जिसमे हजरत की जिन्दगी पर रोशनी डालते हुए उनके विचार ग्रहण करने का उपदेश दिया गया। अन्त मे मुल्क मे अमन चैन की दुआ के साथ तबर्रूक वितरित किया गया।

    गुरूवार को नगर के मौहल्ला कोट गर्बी स्थित खानकाह अशरफिया कादरिया में सुल्तान हज़रत सय्यद मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी रह० के 636 वां उर्स के दूसरे दिन जलसे का आयोजन किया गया। जिसका आगाज तिलावते कलामे पाक से मौलाना कारी फहीम ने किया। मौ. शादान व मौ. सलमान नात ख्वां ने नाते पाक व मनकबत के नज़राने पेश किए। जलसे का खिताब दिल्ली से तशरीफ लाये बिहार के रहने वाले मौलाना मुफ़्ती मन्जर मोहसिन साहब ने हजरत के जीवन पर प्रकाश डालते हुए सत्य की राह पर चलने का आहवान किया। उन्होने कहा कि आपने बादशाहत छोड़ने के बाद सबसे पहले फकीरी ले ली और उसके बाद सबसे पहले अपना देश ही छोड़ दिया और पैदल ही विश्व यात्रा पर निकल पड़े। सूफी हजरत मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी रह० तीस साल तक दुनिया के तमाम देशों में पैदल ही घूमते रहे और दीन-ए-इस्लाम का प्रचार करते रहे। मखदूम अशरफ का सूफियाना व्यवहार कुछ ऐसा था कि उनके पास केवल मुसलमान ही नहीं बल्कि हिन्दू भी काफी संख्या में जाते थे। मखदूम अशरफ बिना किसी भेदभाव के लोगों की समस्या का समाधान करते थे। अन्त मे मुल्क मे अमन चैन की दुआ के साथ तबर्रूक वितरित किया गया। जलसे की सदारत मौलाना सय्यद रिजवानी मियां व निजामत इमाम बाबा मल्लक शाह मियां मस्जिद मौलाना हाफिज अफज़ाल ने की। तीसरे दिन शुक्रवार को कुरान ख्वानी, नज़र, लंगर हुआ। नमाज़े ईशा महफिले समां के साथ रात 2 बजकर 27 मिनट पर कुल शरीफ होगा। इस मौके पर फहद शाह अशरफी, मुनाज़िर अली, गुलाम नबी अशरफ, जुहैब अली, रफत अली, मुशर्रफ अली, शादाब अशरफी, अहद अशरफी, फैजान अशरफ, चमन अली, मास्टर इल्यास अशरफी, खालिद हुसैन, वसीम वारसी आदि लोग मौजूद रहे।

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