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    पलवल। स्कूल की हालत जर्जर भय के साए में बच्चे ।

    पलवल। होडल के गांव बंचारी में स्थित शहीद बलवीर सिंह सीनियर सेकेंडरी स्कूल की हालत हुई जर्जर। टूट टूट कर नीचे गिर रही है कमरों की छत। हरियाणा सरकार के दावे और वादे हुए फेल । भय के साए में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं स्कूल में पढ़ने वाले छात्र छात्राएं। इस स्कूल में 300 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं जिनको हर समय छत गिरने का भय बना हुआ रहता है। कई बार बच्चों के ऊपर छत के छोटे-छोटे टुकड़े टूट कर गिर चुके हैं और घायल भी हो चुके हैं । उसके बाद भी शिक्षा विभाग द्वारा इन कमरों का निर्माण नहीं किया जा रहा है।  जिसको लेकर ग्रामीणों का कहना कि अगर सरकार ने उनके गांव के स्कूल के कमरों को सही नहीं करा गया तो वह 3 दिन के बाद आमरण अनशन पर बैठेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उनके बच्चे ऐसे स्कूल में पढ़ते हैं जहां उनको हर समय भय  लगा रहता है कि उनके बच्चे कुशल पूर्वक घर पहुंचेंगे या नहीं।

    होडल के गांव बंचारी मैं स्थित शहीद बीरबल सीनियर सेकेंडरी स्कूल की हालत इस तरह से बनी हुई है की इसको देखकर सभी लोग हैरान रह जाएंगे। इस स्कूल में 300 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं और इस स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखा गया है लेकिन इस शहीद के नाम पर रखे गए स्कूल की हालत ऐसी है कि इस स्कूल में पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राएं हर समय भय के माहौल में पढ़ाई करते हैं। इस स्कूल में लगभग 24 कमरे हैं जिनमें से 18 कमरों की हालत पूरी तरह से जर्जर बनी हुई है । हर समय कमरों की छत टूट टूट कर नीचे गिरती रहती है जिस वजह से आए दिन इसमें पढ़ने वाले छात्र छात्राएं घायल होते रहते हैं । कई बार इस स्कूल में पढ़ाने वाले अध्यापक भी घायल हुए लेकिन उसके बाद भी इन कमरों को सही नहीं कराया गया है । जब इस बारे में गांव बंचारी के लोगों को पता लगा तो वह स्कूल में पहुंचे और देखा कि स्कूल के कमरों की छत नीचे टूट कर गिर गिर रही है जिस वजह से उनके बच्चे घायल हो रहे हैं। इस स्कूल में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं का कहना है कि वह जब कमरों के अंदर बैठकर पढ़ाई करते हैं तो उनको बहुत भय लगा रहता है कि कहीं छत टूट कर उनके ऊपर नहीं गिर पड़े । छात्र छात्राओं का कहना है कि वह जब पढ़ाई करते हैं और अध्यापक जब उनको पढ़ाते हैं तो उनको आधा ध्यान छत की तरफ रहता है और आधा ध्यान पढ़ाई पर रहता है । छात्र ,छात्राओं का कहना है कि बरसात के मौसम में उनको बहुत बड़ा भय रहता है और गर्मी में उनको मजबूरी में बाहर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है क्योंकि स्कूल के कमरों की ऐसी हालत है कि कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।  स्कूल में पढ़ाने वाले अध्यापकों का भी कहना है कि उनको हर समय बच्चों को पढ़ाने में भय बना रहता है कि कहीं छत किसी बच्चे के ऊपर  टूट कर नही  गिर पड़े । जिस वजह से कोई दुर्घटना घटित हो।  उनका कहना है कि वह बच्चों को मैदान में बैठकर पेड़ों के नीचे बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है अगर बारिश आ जाती है तो वह मजबूरी में बच्चों को अंदर बैठा कर पढ़ाते हैं । लेकिन उनको भय लगा रहता है । उनका कहना है कि कई बार बच्चे घायल हो चुके हैं और उन्होंने इस बारे में अपने शिक्षा विभाग को लिखित में भेजा हुआ है लेकिन उसके बाद भी आज तक इनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया है।  इस स्कूल की हालत लगभग 6 सालों से इसी तरह से बनी हुई है कि कमरे पूरी तरह से जर्जर हालत में है । वहीं ग्रामीणों का कहना है कि उनको हर समय भय लगा रहता है कि उनके बच्चे  ऐसे स्कूल में पढ़ते हैं जिसके कमरे पूरी तरह से जर्जर है और कभी उनके बच्चों के साथ कोई घटना घटित हो सकती। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनके बच्चे पढ़ाई करने के बाद घर नहीं पहुंच जाता तब तक उनको भय लगा रहता है। क्योंकि कई बार कई बच्चे छत गिरने की वजह से घायल हो चुके हैं । ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस बारे में जिला प्रशासन के अधिकारियों से नेताओं से मंत्रियों से और जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कई बार शिकायत की है लेकिन 5 सालों से उनकी आज तक कोई सुनाई नहीं की गई है।  ग्रामीणों का कहना है कि अगर 3 दिन के अंदर कोई अधिकारी यहां नहीं पहुंचा या कोई सरकार का नुमाइंदा  नहीं पहुंचा और  जल्द से जल्द कमरों को सही नहीं किया तो वह 3 दिन के बाद आमरण अनशन पर बैठेंगे और तब तक बैठे रहेंगे तब तक इन कमरों को सही नहीं किया जाएगा।  ग्रामीणों का कहना है कि जब इन कमरों को कंडम घोषित कर दिया गया तो उसके बाद जिला शिक्षा विभाग और   शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी इस तरफ ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं।  ग्रामीणों का कहना है कि जब कोई बड़ी घटना घटित हो जाएगी क्या उसी समय का इंतजार कर रहे हैं उच्च अधिकारी और  नेता। क्या यह  तभी ध्यान देंगे जब स्कूल के अंदर बच्चों के साथ कोई बड़ी घटना घटित हो जाएगी।

    नितिन छात्र

    • स्कूल की खासियत 

    गांव बंचारी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय को 30 नवंबर 1998 में जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शौर्य चक्र विजेता शहीद बीरबल के नाम कर दिया। शहीद के नाम विद्यालय का नामकरण तो हो गया परंतु प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग ने विद्यालय की सुविधाओं की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया विद्यालय में 350 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने आते हैं लेकिन उनके साथ कब हादसा हो जाए यह उन्हें नहीं पता ।वर्ष 2017 में जिला उपायुक्त द्वारा गठित की गई कमेटी में अतिरिक्त उपायुक्त कार्यकारी अभियंता लोक निर्माण विभाग कार्यकारी अभियंता पंचायती राज के अलावा जिला शिक्षा अधिकारी ने मिलकर विद्यालय के भवन को पूरी तरह जर्जर करार दे दिया फिर भी विद्यालय में आज भी बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।विद्यालय में कुल 22 कमरे है जिनमें से19 कमरों  का भवन जर्जर अवस्था में है। बारिश में कमरों में पानी आता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।ग्रामीणों का कहना था कि लगभग 34 वर्ष पूर्व गांव के रोशन लाल पहलवान ने अपनी 12 एकड़ कृषि योग्य जमीन को बेचकर गांव के बच्चों की पढ़ाई के लिए विद्यालय के इस भवन को बनवाया था लेकिन आज तक विभाग ने लौटकर इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया।

    जिया छात्रा

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