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    अंबेडकरनगर। महाशिवरात्रि के साथ सावन में जहां उमड़ता है आस्था का सैलाब।

    ..........लाखों लोगों की श्रद्धा का केंद्र है बिलवाई का भुवनेश्वर नाथ महादेव मंदिर

    अंबेडकरनगर। सुल्तानपुर, जौनपुर और आजमगढ़ जनपदों की सीमा पर स्थित बिलवाई धाम का भुवनेश्वर नाथ महादेव मंदिर चारों जनपदों के लाखों लोगों की श्रद्धा का केंद्र है। यहां महाशिवरात्रि पर तीन दिवसीय मेले के साथ सावन में आस्था का सैलाब उमड़ता है। नाग पंचमी को हजारों की संख्या में कांवरिया यहां जलाभिषेक करते हैं। यहां कई छोटे मंदिरों के साथ मुख्य विशाल मंदिर और भव्य सरोवर आकर्षण का केंद्र है। इस धाम की प्राचीनता का कोई प्रमाण नहीं है। किंवदंती के अनुसार लगभग 600 वर्ष पूर्व इस स्थान पर बेल का विशाल जंगल था। जिसमें लोग पालतू पशुओं को चराते थे और यहीं जमीन पर शिवलिंग आकार के उभरे एक पत्थर पर चरवाहे बेल और नारियल जैसे कठोर फल फोड़कर खाते थे। गाये अपने बछड़े को दूध पिलाने के बाद बचा दूध उसी पत्थर पर स्रावित कर देती थी। जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने गांव के ही एक धार्मिक व्यक्ति को सपने में दर्शन देकर बताया कि जिसे लोग साधारण पत्थर समझ रहे हैं वह वास्तव में महत्वपूर्ण शिवलिंग है। 

    इसके बाद थोड़े ही दिन में उस पत्थर के प्रति लोगों की आस्था में उफान के साथ भीड़ बढ़ने लगी। बताया तो यह भी जाता है कि यह जंगल जिस रियासत के अधिकार में था उसके राजा ने जौनपुर के गैरवाह गांव के एक राजकुमार के किसी कार्य पर प्रसन्न होकर उतना इलाका उसे दे दिया जितना एक हाथी एक दिन में घूम सकता था। जिसके बाद यह क्षेत्र भी उसी दान किए इलाके में आ गया। एक अन्य कथा के अनुसार अपनी पत्नी की विदाई कराकर लौट रहे सुदामा नामक ब्राह्मण को जब इस बात की जानकारी हुई तो उक्त जमीन की मुक्ति के लिए उसी शिवलिंग के समीप आमरण अनशन शुरू कर दिया। जिसके बाद राजकुमार के गांव में तमाम अनहोनी घटनाएं घटने लगी। जिससे हलचल मच गई। 

    तब उनके परिवार के किसी सदस्य ने आकर सुदामा को मनाया। उसी के हाथ से दूध पीने के बाद ब्राह्मण की तबियत बिगड़ी और मौत हो गई। उनकी पत्नी भी उन्हीं के साथ सती हो गई। जिसके बाद उस शिवलिंग के प्रति श्रद्धा बढ़ी। तभी से वहां पर निरंतर पूजा-अर्चना होती चली आ रही है। बेल के तमाम पेड़ होने के नाते इस स्थान का नाम  बिलवाई पड़ा। बताते हैं कि फैजाबाद के गजेटियर के पृष्ठ संख्या 321 पर भी यह स्थान उल्लिखित है। बदलते समय के साथ स्थान पर कई छोटे छोटे मंदिरों के साथ विशालकाय मंदिर का निर्माण हुआ जो आज आकर्षण का केंद्र है। मुख्य मंदिर के पीछे स्थित सरोवर के प्रति मान्यता है कि इसमें स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। यद्यपि यहां प्रत्येक सोमवार व शनिवार को भक्तों की भीड़ अति है। परन्तु सावन और महा शिवरात्रि पर जलाभिषेक करने के लिए आस्था का सैलाब उमड़ता है।

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