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    कानपुर। 84 मीटर की टनलिंग के बाद ‘नाना’ टनल बोरिंग मशीन का इनिशियल ड्राइव हुआ पूरा।

    .......... फाइनल ड्राइव से पहले बैकअप सिस्टम यूनिट से जुड़ेगी मशीन

    इब्ने हसन ज़ैदी\कानपुर। मेट्रो रेल परियोजना के लगभग 23 किमी. लंबे पहले कॉरिडोर (आईआईटी से नौबस्ता) के अंतर्गत चुन्नीगंज और नयागंज के बीच निर्मित हो रहे 4 किमी. लंबे भूमिगत सेक्शन में नाना टनल बोरिंग मशीन ने आज अपना पहला मील का पत्थर हासिल कर लिया। 84 मीटर की टनलिंग प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही आज उसका इनिशियल या प्रारंभिक ड्राइव पूरा हो गया। इसके बाद अब मशीन के बैकअप सिस्टम को टीबीएम के शील्ड से जोड़ने के लिए 17.5 मीटर गहरे आयताकार लॉन्चिंग शाफ़्ट में उतारा जाएगा जिससे पूरी तरह ऑटोमैटिक तरीके से खुदाई का काम पूर्ण गति से किया जाएगा। 

    4 जुलाई से आरंभ हुए नाना टीबीएम ने टनल तैयार करने के लिए अब तक 60 रिंग लगा दिए है। इसके बाद मशीन लगभग 12 से 15 मीटर रोजाना की गति से आगे बढ़ सकेगी। इनिशियल ड्राइव के दौरान मशीन का बैकअप सिस्टम यूनिट अब तक शाफ़्ट के बाहर से कार्य कर रहा थी। मगर अब इनिशियल ड्राइव के पूर्ण हो जाने के बाद लगभग 80 मीटर लंबे इस यूनिट को मशीन के शील्ड से जोड़ने के लिए नीचे उतारा जाएगा। इसके साथ ही नाना टनल बोरिंग मशीन से खुदाई वर्तमान में रोक दी गई है। 

    बैकअप सिस्टम यूनिट को टीबीएम का कंट्रोल रूम भी कहा जा सकता है जहां मशीन की सभी सहायक प्रणालियां मौजूद होती हैं। बैकअप सिस्टम यूनिट के माध्यम से मशीन 24 घंटे काम करती है और इंजीनियर्स अलग-अलग शिफ़्टों में इस सिस्टम को सँभालते हैं। इस कंट्रोल रूम में रेस्ट रूम और टॉयलट की भी सुविधा होती है। यह रोलिंग संरचना टीबीएम से जुड़कर उसके साथ आगे बढ़ती है। 

    टनल में मशीन के आगे बढ़ने के साथ ही बैकअप सिस्टम तक रिग सेग्मेंट पहुंचाने के लिए रेल की पटरियां लगाई जाती हैं। इनपर मोटराइज्ड ट्रॉली के माध्यम से रिग सेग्मेंट्स को बैकअप सिस्टम यूनिट तक पहुंचाया जाता है, जहां क्रेन सेग्मेंट्स को एक के बाद एक उठाकर सिग्मेंट फीडर तक पहुंचाती हैं। टीबीएम ख़ुदाई के साथ-साथ टनल रिंग सेग्मेंट्स को भी लगाती चलती है। रिंग इरेक्टर, मशीन में लोडेड रिंग सेग्मेंट्स को लगाते हुए गोलाकार रिंग तैयार करता चलता है। साथ ही में, मशीन पानी के रिसाव से बचने के लिए ख़ाली जगह में पानी, सीमेंट और ख़ास तरह के केमिकल का मिक्सचर भी भरते हुए चलती है जिसे ग्राउटिंग कहते हैं।

    टनल में लगाए जाने वाले ये रिंग सेग्मेंट्स कॉन्क्रीट के बने होते हैं और इन्हें कास्टिंग यार्ड में प्रीकास्ट किया जाता है। कानपुर के उक्त भूमिगत सेक्शन में, 6 सेग्मेंट्स से एक टनल रिंग बनती है। लगभग 4 किमी. लंबे इस सेक्शन में अप-लाइन और डाउन लाइन को मिलाकर कुल 5.4 किमी. की टनल का निर्माण होना है, जिसका व्यास 5.8 मीटर होगा। इसके लिए कुल 3886 रिंग्स इस्तेमाल होंगी। ’बड़ा चौराहा से नयागंज की ओर लगभग 990 मीटर लंबी टनल का निर्माण करती हुई टीबीएम, नयागंज मेट्रो स्टेशन के शुरुआती छोर तक पहुँचेगी, जहाँ पर बने रिट्रीवल शाफ़्ट से मशीन को बाहर निकाल लिया जाएगा। इसके बाद, दोनों मशीनों को चुन्नीगंज में बनने वाले लॉन्चिंग शाफ़्ट की सहायता से पुनः ज़मीन में उतारा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 1 से 1.5 महीने का वक्त लगेगा। इसके बाद मशीन नवीन मार्केट से होते हुए, बड़ा चौराहा मेट्रो स्टेशन के शुरुआती सिरे तक टनल का निर्माण करेगी। 

    यूपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के एमडी  सुशील कुमार ने भूमिगत मेट्रो के निर्माण कार्य की प्रगति पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि समयबद्ध तरीके से पूरी सुरक्षा के साथ टनल निर्माण कार्य चल रहा है। बता दें कि कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के अंतर्गत दो मेट्रो कॉरिडोर्स का निर्माण होना है, पहला आईआईटी से नौबस्ता के बीच, जिसकी लंबाई लगभग 23 किमी. है और दूसरा चंद्रशेखर आज़ाद विश्वविद्यालय से बर्रा-8 के बीच, जिसकी लंबाई लगभग 8 किमी. है। वर्तमान में पहले कॉरिडोर का निर्माण जारी है, जिसके अंतर्गत आईआईटी से मोतीझील के बीच लगभग 9 किमी. लंबा प्राथमिक सेक्शन तैयार है और इसपर मेट्रो सेवाओं का परिचालन हो रहा है। मोतीझील के आगे, चुन्नीगंज से नयागंज और कानपुर सेंट्रल से ट्रांसपोर्ट नगर के बीच, दो भागों में भूमिगत सेक्शनों का निर्माण किया जा रहा है। इसके आगे, बारादेवी से नौबस्ता के बीच लगभग 5 किमी. लंबा उपरिगामी सेक्शन बनना है।

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