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    शाहजहांपुर। आज़ादी के अमृत महोत्सव पर विधि महाविद्यालय में पं0 राम प्रसाद बिस्मिल ई-लाईब्रेरी का शुभारंभ।

    ............ लाइब्रेरी का शुभारंभ पूर्व गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती द्वारा फीता काटकर किया गया।

    फै़याज़ उद्दीन \शाहजहांपुर। स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय में आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर महाविद्यालय की पं0 राम प्रसाद बिस्मिल ई-लाईब्रेरी का अनावरण स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती द्वारा किया गया। स्वामी चिन्मयानंद ने पं० राम प्रसाद बिस्मिल के आजादी के योगदान पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पं०राम प्रसाद बिस्मिल ने शाहजहाँपुर की धरती पर जन्म लिया और इनकी प्रारम्भिक शिक्षा ए०बी०रिच इण्टर कालेज से हुई। बिस्मिल जी बाल्यकाल से ही देश भक्ति से ओत-प्रोत थे। इनका उदाहरण है कि उन्हें अंग्रेजों के विरूद्ध, विद्रोह के कारण एक बार माध्यमिक स्कूल से पुलिस से बचने के लिसे स्कूल की छत से कुदकर भागना पड़ा।

    बिस्मिल ने अपने सम्पूर्ण जीवन काल में देश के नौजवानों, किसानों, विद्याथिर्यों को स्वतत्रता आंदोलन से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर महाविद्यालय प्रबन्ध समिति के सचिव डाॅ०अवनीश कुमार मिश्र, स्वतत्रता संग्राम सेनानियों के जीवन परिचय का वणर्न करते हुए कहा कि पं०राम प्रसाद बिसिमल अपने साथियो ठा० रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खाँ के साथ काकोरी ट्रेन एक्शन के कारण गिरफ्तार हो गये थे और उन्हें फाँसी की सजा हुई। इन तीनों के सवोर्च्च बलिदान के कारण शाहजहाँपुर को शहीदों की भूमि के नाम से भी जाना जाता है। विधि प्राचार्य डाॅ० जयशंकर ओझा, ने अपने विचार को व्यक्त करते हुए कहा कि शाहजहाँपुर का देश की स्वतत्रता में महत्वपूणर् योगदान रहा है, और जब कभी देश पर संकट आया तो शाहजहाँपुर ने उस संकट में बढचढ़ कर उससे निपटने मे अपना अमूल्य योगदान दिया। 

    इस अवसर पर एस०एस० पी०जी० महाविद्यालय के नवनियुक्त प्राचार्य राकेश कुमार आज़ाद ने बताया कि मेरा रंग दे बसंती चोला' और 'सरफरोशी की तमन्ना' जैसे गीत लिखकर आज भी आने वाली पीढ़ी के अंदर देशभक्ति का जोश भरने वाले पंडित राम प्रसाद बिस्मिल मात्र 30 साल की आयु में देश के लिए फांसी पर झूलने वाले भारत की आजादी के लिए अंग्रेजों से लोहा लेने वाले महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे। इस अवसर पर ममता सिंह समेत महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक स्टाफ विजय सिंह, डाॅ० अनिल कुमार, डाॅ०नलनीश चन्द्र सिंह, डॉ० पवन कुमार गुप्ता, डॉ० दीप्ति गंगवार, अरविन्द कुमार, सचिन कुमार, डॉ०प्रेम सागर, डॉ० रघुबीर सिंह, मृदुल शुक्ला, अजीत यादव, अमरेन्द्र सिंह, अमित कुमार यादव, प्रदीप कुमार सिंह, गौरव गुप्ता, अमित सैनी, सुनील चैहान, शिवओम शमार्, सवेर्श कुमार शर्मा, रोहित कुमार, भानु, हरी कुमार, इत्यादि का योगदान सराहनीय रहा।

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