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    शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कालेज में तैनात सुरक्षा गार्ड ने की पत्रकार से अभद्रता।

    • गार्ड सुपरवाईजर विधवा आरक्षित पद पर अपनी पत्नी को करा रहा है नौकरी
    • शिकायत करने पर गार्ड सुपरवाईजर ने पत्रकार को  जान से मारने की धमकी
    • मोटी कमाई के कारण मेडिकल कालेज प्राचार्य भी मिला रहे सुपरवाइजर की हां में हां

    फै़याज़ उद्दीन\शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर के मेडिकल कालेज में एक दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार के साथ अभद्रता का मामला प्रकाश में आया है। जहां अपनी बेटी का इलाज करा रहे पत्रकार के साथ राजकीय मेंडिकल कालेज की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा कमिर्यों ने पत्रकार के साथ अभद्रता की। 

    ताजा मामला शाहजहांपुर के राजकीय मेंडिकल कालेज शाहजहांपुर का है। जहां अपनी बेटी का इलाज करा रहे पत्रकार से अस्पताल की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकमिर्यों ने अभद्रता कर दी। गौरतलब हो कि एक ओर प्रदेश की योगी सरकार से लेकर सुप्रीम कोटर् तक पत्रकारों से अच्छे सम्बन्ध बनाने के लिये प्रशासन को सचेत कर रहे हैं तथा लगातार सुप्रीम कोर्ट पत्रकार हितों में की जाने वाली टिप्पणियों के बाद भी कुछ प्रशासनिक अमला अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। इसी क्रम में  27 जुलाई 2022 को यूपी फाइट टाईम्स के पत्रकार कमल रावत अपनी पुत्री जोकि गभर्वती थी और उसकी डिलीवरी मेडिकल कालेज के महिला वार्ड में होनी थी। इसी दौरान पत्रकार कमल रावत को जानकारी हुई कि महिला वार्ड में तैनात महिला गार्ड जिसका पति रामप्रकाश भी मेडिकल कालेज में सुपरवाइजर के पद पर तैनात है और अपनी पत्नी मंजू को भी गार्ड के पद पर लगा रखा है, जबकि वह पद विधवा महिला के लिये आरक्षित है। पत्रकार के इस सवाल पर उक्त गार्ड  सुपरवाईजर  ने अपने  साथियों  को  बुला  लिया और पत्रकार को धमकाते हुए हांथापाई पर उतर आये। 

    जिसकी शिकायत पत्रकार  ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य राजेश कुमार से की, लेकिन उन्होंने उक्त  प्रकरण में कोई भी कायर्वाही नहीं की बल्कि उल्टा पत्रकार को ही धमकाने लगे। इस सम्बन्ध में  पत्रकार ने नगर  विधानसभा से विधाायक एवं उत्तर प्रदेश सरकार में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के  साथ-साथ जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह से भी शिकायत की लेकिन अभी तक उपरोक्त लोगों के खिलाफ किसी भी तरह की कोई कायर्वाही नहीं हुई है। 

    अब देखना यह है कि सुप्रीम पावर की और  सूबे के  मुखिया  योगी आदित्यनाथ की पत्रकारों के साथ प्रशासन के मधुर सम्बन्ध बनाने के आदेश कहां तक  कारगर सिद्ध होते हैं और किस तरह की कायर्वाही अमल में लाई जाती है।



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