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    गया\बिहार। जिले में पेयजल एवं किसानों को समस्या के देखते हुए जिला पदाधिकारी ने जनप्रतिनिधियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की समीक्षा बैठक।

    प्रमोद कुमार यादव 

    गया\बिहार। जिला पदाधिकारी गया डॉक्टर त्यागराजन एसएम की अध्यक्षता में समाहरणालय सभाकक्ष में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री बिहार सह इमामगंज विधायक जीतन राम मांझी, सांसद औरंगाबाद सुशील कुमार, विधायक नगर डॉक्टर प्रेम कुमार, विधायक वजीरगंज वीरेंद्र सिंह, विधायिक शेरघाटी मंजू अग्रवाल, विधायक टिकारी, अनिल कुमार, विधायक बोधगया  कुमार सर्वजीत, विधायक गुरुआ विनय कुमार, विधायिक बाराचट्टी, ज्योति देवी के साथ गया जिले में पेयजल एवं संभावित सुखाड़ को ध्यान में रखते हुए गया जिले में पेयजल तथा धान के खेती में हो रही समस्या पर ज़िला पदाधिकारी को एक एक कर अपने क्षेत्रवार समस्याओं से अवगत करवाया गया।

    जिला पदाधिकारी ने उपस्थित पूर्व मुख्यमंत्री, सांसद एवं विधायक गण का स्वागत करते हुए कहा कि 1 जनवरी 2022 से 18 जुलाई 2022 तक लगभग 63% वर्षा की कमी हुई है, जिससे किसानों को काफी समस्या आ रही है। किसान जो भी धान का बिछड़ा डाले हैं रोपनी हेतु वो पानी के समस्या के कारण धान का बिछड़ा बर्बाद हो रहा है। उन्होंने कहा कि 19 जुलाई से 23 जुलाई तक मौसम विज्ञान विभाग द्वारा वर्षा का पूर्वानुमान बताया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष काफी कम बारिश हुई है।

    उन्होंने कहा कि जिले में इस वर्ष 6500 चापाकलों को लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा मरम्मति करवाते हुए खराब पड़े चापाकलों को चालू करवाया गया है। इसके साथ ही आवश्यकतानुसार महादलित टोला में कुल 150 चापाकल लगवाने का निर्देश सरकार द्वारा प्राप्त हुआ है, जिसके एवज में 105 चापाकल को लगवाने का कार्य किया जा चुका है। शेष 45 जगह चापाकल लगाने का कार्य किया जा रहा है। माननीय जनप्रतिनिधियों का जहां-जहां जिस जिस क्षेत्र से पेयजल समस्या एवं चापाकल की आवश्यकता के संबंध में सुझाव प्राप्त हुए हैं उसी के अनुरूप चापाकल लगवाने का कार्य किया गया। महादलित टोला में विशेष अभियान चलाकर चापाकल की मरम्मति की गई है।

    नल जल योजना के समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि नल जल योजना में जो भी दिक्कते/ समस्या आ रही थी उसे यथासंभव दूर करने का कार्य किया जा रहा है। मार्च माह में पंचायत राज विभाग द्वारा संचालित नल जल योजना का व्यापक सर्वे करवाया गया जिसमें 481 ऐसे वार्ड में कार्य पूर्ण होने के बाद भी कुछ कमियां के कारण पेयजल संचालित नहीं हो रहा था। ज्यादातर मोटर जलने, पाइप लीकेज, पाइप फटने या ऑपरेटर काम नहीं कर रहा था, पुराने वार्ड सदस्य नए वार्ड सदस्य को चाबी नहीं देने, चार्ज नहीं देने, बिजली का भुगतान नहीं रहने इत्यादि समस्याओं के कारण बंद था।  इन सभी समस्याओं का निराकरण करते हुए वर्तमान में कुल  27 ऐसे टोले हैं जहां नल जल चालू नहीं है, उन्हें भी इस माह के अंत तक चालू करवा लिया जाएगा। बैठक में जिला पदाधिकारी ने कहा कि विभिन्न माननीय जनप्रतिनिधियों से प्राप्त फीडबैक में वैसे टोले जो अब तक छूटे हुए हैं, वैसे टोले का सर्वेक्षण कराते हुए पंचायत राज विभाग द्वारा लगभग 1206 टोले अभी भी छूटे हुए हैं, उसका कारण यह है कि मॉडल स्टीमेट के अनुरूप 1 वार्ड में अगर 4 टोले हैं और पहाड़ी होने के कारण विभिन्न जगहों पर है, उसमें एक टोला में काम हुआ है तथा शेष टोला में काम नहीं हुआ है उन टोलो का प्राक्कलन बनाते हुए निश्चय योजना के तहत राशि की मांग की गई है। उसी प्रकार पीएचईडी द्वारा 200 टोला चिन्हित वार्डों में से छूटे हुए हैं इसका भी प्राक्कलन बनाकर विभाग को भेजा गया है। 41 पीएचईडी के ऐशे वार्ड है जहां पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण भूगर्भ जलस्तर कम है। इन टोलो में वैकल्पिक जल स्रोत चिन्हित करने का निर्णय लिया गया है। जिला पदाधिकारी ने यह भी कहा कि उप विकास आयुक्त की देखरेख में डीआरडीए द्वारा यह निर्णय लिया है कि वैसे 41 टोले जहां बार बार बोरिंग फेल हो रहा है वहां बोरिंग स्थल के समीप तालाब खुदाई या जल संरक्षण का कार्य किया जा रहा है ताकि अगले वर्ष या आने वाले समय में जो बोरिंग फेल होने की समस्या आ रही है वह दूर होगी। इसके लिए एक्सपर्ट से भी विचार विमर्श किया जा रहा है। जल स्तर में वृद्धि लाने के लिए एवं जल संचयन के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं की जा रही है। जिला पदाधिकारी ने कहा कि जिले में कुल 35 टोले ऐशे है, जो वाटर क्रिटिकल टोले हैं। वहां भूगर्भ जलस्तर काफी नीचे है। वर्तमान में ज़िले का औसतन भूगर्भ जलस्तर 32 फीट मापा गया है। उन्होंने कहा कि जल जीवन हरियाली आने के कारण भूगर्भ जल स्तर में काफी सुधार आई है। वर्ष 2020 के पहले जल जीवन हरियाली योजना के पूर्व लगभग 40 फीट के नीचे जलस्तर चले जाते थे जो इस वर्ष औसतन जलस्तर 32 फीट है। शहरी क्षेत्र में जल संकट ना हो इसके लिए 63 टैंकर के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 7 टैंकर से जलापूर्ति सप्लाई हो रही है। आवश्यकता पड़ने पर यदि कहीं से समस्या की सूचना आती है तो टैंकर के माध्यम से जलापूर्ति उपलब्ध कराया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि अपने क्षेत्र के मुखिया जी के साथ बैठक कर जल संकट से संबंधित बिंदु पर 2 दिनों के अंदर बैठक करते हुए टोले की समस्या संबंधित जानकारी जिला स्तर पर उपलब्ध करा दें ताकि उस क्षेत्र में वैकल्पिक व्यवस्था कराते हुए त्वरित गति से करवाया जा सके।

    कृषि संबंधी नहर प्रणाली के समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि गया जिले में विभिन्न नहरों में पानी नहीं रहने के कारण रोपनी में समस्या आ रही है। वर्तमान समय में मात्र 2% ही धान रोपने का कार्य किया गया है। सरकारी नलकूप के समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि 105 सरकारी नलकूप मुखिया को राशि हस्तांतरित किया गया है सभी मुखिया को निर्देशित किया गया है कि जल्द से जल्द कार्य पूर्ण करावे ताकि कुछ हद तक किसानों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि भूगर्भ जल स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से तथा मनरेगा के माध्यम से मजदूरों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से आहर, पाइन, पोखर को सिंचाई हेतु नए सिरे से बड़ी संख्या में योजना लिए जा रहे हैं। लघु सिंचाई द्वारा 114 नए बड़े-बड़े योजना को इस वर्ष क्रियान्वित हेतु लिए गए हैं जिससे जिले का भुगर्व जल स्तर में काफी सुधार होगा। भूमि संरक्षण के तहत इस वर्ष अधिक संख्या में चेक डैम बनाने का कार्य किया जा रहा है। वन विभाग द्वारा पहाड़ के पानी को संरक्षित रखने हेतु पानी स्टोरेज हेतु डैम का निर्माण कराया जा रहा है तथा उस पानी को आहर पोखर के माध्यम से जोड़ते हुए सिंचाई में प्रयोग लाने हेतु कार्य किया जा रहा है। वजीरगंज के विष्णुपुर पंचायत में तीन तलाव को पहाड़ के नीचे बनाया गया है, इसके साथ ही बांके बाजार प्रखंड के हतिया पत्थर एवं हतिया पोखर में बड़े-बड़े डैम बनाने का कार्य किया जा रहा है। लगभग 10 हेक्टेयर तक पानी स्टोरेज करने का स्ट्रक्चर बना है जिसे पाइन और आहर को कनेक्ट कर कर के आसपास के गांव का पटवन का कार्य कराया जा सकता है। सिंचाई के साधन को बढ़ाने के लिए जल जीवन हरियाली योजना के तहत सिंचाई विभाग भूमि संरक्षण विभाग मनरेगा के तहत लगातार कार्य किया जा रहा है।

    इसके उपरांत बारी-बारी से सभी माननीय जनप्रतिनिधियों से अपने क्षेत्र के बारे में समस्याओं के संबंध में जानकारी जिला पदाधिकारी को अवगत कर आए हैं। जिला पदाधिकारी ने सभी संबंधित समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित पदाधिकारियों को तेजी से अनुपालन करवाने का निर्देश दिए हैं।

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