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    बलिया। बारिश नहीं होने से ,खेतों में पड़ी दरारों को देखकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती है, किसान बेचैन बेहाल, खेती हो रही है बर्बाद।

    सैय्यद आसिफ़ हुसैन जै़दी\ख़बर बलिया से है जहां मौसम की बेरुखी से सूखे का खतरा बढ़ता जा रहा है तो वही खेतों में पड़ी दरारों को देखकर किसान काफी दुखी है। तो वही तेज धूप और कम बारिश होनें के कारण भूमि का जल स्तर भी काफी प्रभावित हुआ है । 

    सूखे खेतों में पड़ी दरारें                                              सुख गई धान की बेल

    बात अगर कुदरती बारिश की करें तो D.A.O धर्मेंद्र कुमार सिंह नें बताया कि धन और मक्का की फसल वर्षा पर निर्भर होती है। 1 जून से लेकर 19 जुलाई तक सिर्फ 19 से 20 % ही बारिश हुई है,276.5 बारिश होनी चाहिए थी ,जिसके सापेक्ष सिर्फ 51.60 एमएम ही बारिश हुई है। और कहा कि ऐसी परिस्थितियों मे किसनों को चाहिए की ऐसी फसल बोये जिसकी पत्तियाँ बड़ी हो, ज्यादा वातावरण कवर करे।   

    धर्मेंद्र कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी

    तो वहीं बलिया के किसानों की बात करें तो 4,लाख 70, हज़ार किसान बलिया में है ,जिसमें लग भग 60% प्रतिशत किसान धान की खेती करते हैं, बारिश नहीं होनें से धान और मक्के की खेती काफी प्रभावित हुई है। अगर किसान नेता अखिलेश सिंह की मानें तो सिंह का कहना है कि बलिया जनपद का दुर्भाग्य विगत तीन सालों से चल रहा है, विगत वर्षों में अतिवृष्टि के कारण फसल धस गई और इस साल सूखे ने तो इतना जबरदस्त मार किया है कि 50 प्रतिशत धरती की भी बुवाई नहीं हुई है।

    अखिलेश सिंह, किसान नेता

    किसानों  के पास प्राकृतिक वर्षा के अलावा दूसरा विकल्प नहरों द्वारा सिंचाई का होता है, पर सिंचाई विभाग की मानें तो 96 नहरों द्वारा पानी छोड़ा जाता है,जिसके द्वारा सिंचाईं जाती है जिसकी लंबाई 615.980 है, जिससे सिंचाई में मदद ली जा सकती है ,पर सिंचाई विभाग की हालत तो और बिगड़ी नज़र आ रही है। अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्र का कहना है कि नलकूप द्वारा नहरों में पानी पहुंचाने के जो साधन मौजूद है जिसमें नहरों में पानी पहुंचाने के लिए 8 पंप लगे हैं जिसमें सिर्फ पांच ही चल पा रहे बाकी पंप लो वोल्टेज के कारण ट्रिप हो जा रही है  वो भी  लो वोल्टेज की कारण  पंप नहीं चल पा रहे हैं।

    सौम्या अग्रवाल, जिला अधिकारी

    जिला अधिकारी सौम्या अग्रवाल ने कहा कि बलिया मे अभी औसत से कम वर्षा हुई है, और हमारा कृषि विभाग है को सचेत कर दिया गया है। जिसको भी जिस प्रकार की बीज की आवश्यकता है उसको तत्काल रूप से उपलब्ध कराये जा रहे है और मौसम पर लगातार हमारी नजर बनी हुई है। सिचाई विभाग पर भी नजर बनी हुई है जहां पर इस प्रकार की शिकायत आ रही थी कि टेल तक पानी नहीं पहुँच रहा है वहाँ पर विभाग के अधिकारी व पुलिस को भेज कर के अगर पूर्व मे कहीं पर नहर कटी हुई है। उसे बंद करा कर नहर को संचालन सुचारु रूप से कराया जाए। 

    फसल को दिखाता किसान 

    किसान वीरेंद्र ने बताया की वर्षा नहीं होने से धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। अगर पम्प से पानी दिया जाए तो डीजल इतना महंगा है की फसल से ज्यादा का खर्चा हो जाता है जिससे किसान को कोई मुनाफा नहीं होता है। 

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