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    गोवा में भी दल-बदल का हौवा।

    राकेश अचल का लेख। चौथे दशक में चल रहे गोवा राज्य में सब  कुछ ठीक-ठाक चल रहा था ,लेकिन यहां भी भाजपा ने कांग्रेस विधायकों के दाम लगाकर हलचल पैदा कर दी। दल-बदल के हौवे ने कांग्रेस की नींद उड़ा दी। कांग्रेस को आनन-फानन में विधानसभा में अपने नेता को हटाना पड़ा क्योंकि विधायकों की बिक्री का माध्यम प्रतिपक्ष के नेता ही कथित रूप से बने थे। 

    गोवा में भाजपा की सरकार है और उसने सौ दिन पूरे भी कर लिए हैं। भाजपा को सरकार चलाने के लिए अभी किसी के समर्थन की कोई जरूरत नहीं थी, किन्तु भाजपा कांग्रेस को निर्मूल करने के अपने राष्ट्रीय अभियान के तहत गोवा में भी कांग्रेस के विधायक खरीदने पर आमादा हो गयी। आमादा क्या हो गयी उसने सौदा भी कर लिया लेकिन पोल खुलने से सब खेल खराब हो गया। कांग्रेस ने अपनी पार्टी के बिभीषण को चिन्हित कर पद से हटा दिया। गोवा मेंकांग्रेस के  प्रभारी दिनेश गुंडू राव ने कहा, गोवा में पार्टी को कमजोर करने के लिए भाजपा के साथ मिलकर हमारे ही कुछ नेताओं ने साजिश की थी। वे विधायकों को तोड़ना चाहते थे। इसमें हमारे नेता प्रतिपक्ष माइकल लोबो और दिगंबर कामत शामिल थे। 

    अब सवाल ये है कि रोजाना देश को नए पाठ पढ़ने वाली भाजपा आखिर इतनी उतावली क्यों है कि गोवा में जनादेश से बनी अपनी सरकार चलाने  में दिलचस्पी लेने के बजाय कांग्रेस के विधायकों को खरीदने में जुट गयी है। कांग्रेस नेता राव की मानें तो भाजपा ,कांग्रेस के दो तिहाई विधायकों को तोड़ना चाहती थी। विधायकों को बड़ी रकम ऑफर की गई। राव ने कहा कि मुझे आश्चर्य है कि  इतनी बड़ी रकम ऑफर की गई। लेकिन मेरे 6 विधायक अडिग रहे। मुझे उनपर गर्व है।


    आश्चर्य तो पूरे देश कि है कि आखिर भाजपा को हो क्या गया है ? भाजपा क्यों देश में दलबदल का प्रतीक बन गयी है ? भाजपा क्यों हर जगह विधायक खरीदने में जुटी हुई है। भाजपा ने हाल ही में एक बड़ा सौदा महाराष्ट्र में शिव सेना के विधायकों का किया और वहां महाराष्ट्र अगाडी की सरकार गिराकर अपनी सरकार बना ली .गोवा में भाजपा की सरकार पहले से है इसलिए वहां कांग्रेस विधायकों  को खरीदने की कोशिश प्रमाणित कर चुकी है कि भाजपा की दाढ़ में खून लग चुका है। भाजपा को जरूरत हो या न हो वो खरीद-फरोख्त में ही सुखानुभूति करती है। 

    आपको याद होगा कि गोवा में दल-बदल की बीमारी असाध्य हो गयी है। यहां कब,किसकी सरकार बन जाये और कब किसकी सरकार गिर जाये, कहा नहीं जा सकता। गोवा में कांग्रेस के कुल 11 ही विधायक हैं। अगर इनमें से 9 भाजपा में चले जाते हैं तो केवल दो विधायक कांग्रेस के पास रह जाएंगे। जिन माइकल लोबो पर साजिश का आरोप लगाया गया है और उन्हें नेता प्रतिपक्ष पद से हटाया गया है उन्होंने ने ही चुनाव के बाद कहा था कि जल्द ही गोवा में कांग्रेस सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा था कि 10 महीने में बदलाव देखने को मिल जाएगा। 

    जैसा कि मैंने कहा कि विधायकों कि खरीद -फरोख्त के मामले में गोवा देश का अग्रणीय राज्य है। तीन साल पहले भी कुछ ऐसी ही घटना हो चुकी है। कांग्रेस के 10 विधायकों ने पाला बदल लिया था और वे भाजपा में शामिल हो गए थे। ऐसे में इस बार सावधानी बरती गई और राहुल गांधी के सामने प्रत्याशियों ने जीत के बाद पाला न बदलने की शपथ ली थी। हालांकि इसका कोई खास मतलब  निकलता नजर नहीं आ रहा है। गोवा में कांग्रेस मार्च 2012  में सत्ताच्युत हुई थी और तभी से भाजपा कांग्रेस को लंगड़ा बनाने  में लगी हुई है। एक समय गोवा में कांग्रेस के विधायक बेचने का आरोप दिग्विजय सिंह पर भी लग चुका है। उस समय वे राज्य के प्रभारी थे। 

    गोवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गिरीश चोडनकर ने दावा किया है कि विधायकों को भाजपा में शामिल होने के लिए 40 करोड़ रुपए की पेशकश की गई है।​​​​​​ चोडनकर ने बताया कि बिजनेसमैन और कोयला माफियाओं द्वारा कांग्रेस विधायकों को फोन किया जा रहा है। भाजपा ने जिन 3 विधायकों से संपर्क किया है, उन्होंने कांग्रेस के गोवा प्रभारी दिनेश गुंडू राव से इस बात का खुलासा किया। हालांकि भाजपा ने आरोपों को खारिज कर दिया है। भाजपा के  प्रदेश अध्यक्ष सदानंद तनावडे ने कहा कि कांग्रेस का आरोप निराधार है।

    दरअसल गोवा में भाजपा की सरकार तो है लेकिन आत्मनिर्भर सरकार नहीं है। उसे आत्मनिर्भर होने के लिए अभी भी एक और विधायक की जरूरत है। गोवा विधानसभा में 40 सीटें हैं। कांग्रेस के पास 11 और भाजपा के पास 20 विधायक हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी के 2, निर्दलीय 3 विधायक हैं। गोवा विधानसभा चुनाव 2022 में राज्य में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला था। भाजपा  को राज्य की कुल 40 में से 20 सीटें मिली थीं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 21 है। इस तरह गोवा में बीजेपी पूर्ण बहुमत से महज एक कदम दूर रह गई। हालांकि भाजपा नेताओं ने निर्दलीय के सहयोग से राज्य में सरकार बना ली थी।

    मजे की बात ये है कि गोवा कि जनता भाजपा को बार-बार ख़ारिज करती है लेकिन भाजपा भी बार-बार जनता को ठेंगा दिखाकर प्रदेश में अपनी सरकार बना लेती है। आपको जानकार हैरानी होगी कि पिछले चुनाव में गोवा के दोनों उप मुख्य मंत्री चुनाव हार गए थे। उप मुख्यमंत्री  मनोहर अजगांवकर को विपक्ष के नेता व कांग्रेस उम्मीदवार दिगंबर कामत ने मडगांव विधानसभा सीट से करीब 6,000 मतों से हराया था जबकि दूसरे उप मुख्य मंत्री चंद्रकांत कावलेकर क्यूपेम सीट से कांग्रेस प्रत्याशी अल्टोन डी'कोस्टा से हार गए थे। कवळेकर पुराने दल बदलू हैं ,वे  2017 में कांग्रेस के टिकट पर यहां से जीते थे। इसके बाद वह 9 कांग्रेस विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हुए थे और उन्हें उप मुख्यमंत्री का पद दिया गया था। पहली बार इस सीट से चुनाव लड़ने वाले कोस्टा ने कावलेकर को 3,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया था।

    देश में जनादेश को एक जींस बनाने वाली भाजपा के पास इस समय पैसे की कोई कमी नहीं है। देश में भाजपा को सबसे ज्यादा चन्दा मिलता है इसीलिए भाजपा भी विधायकों को मुंहमांगी कीमत पर खरीदने का माद्दा रखती है। मध्यप्रदेश में भाजपा पर 35 -35  करोड़ में विधायक खरीदने का आरोप लगा था.महाराष्ट्र में शिवसेना ने 50 -50  करोड़ में कथित रूप से अपने विधायक बेचे। गोवा में ये दर 40 -40  करोड़ रूपये रही .देश की सियासत से कांग्रेस का सफाया करने कि भाजपा कि ये सनक लोकतंत्र की जड़ों में मठा डाल रही है किन्तु भाजपा के भीतर और बाहर कोई भी ऐसा नेता नहीं है जो इस धंधे को रोक सके .अब देश में वही होगा जो राम जी ने रच कर रखा हुआ है। 

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