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    सम्भल। संपूर्ण समाधान दिवस बना मज़ाक, पौने घंटे फरियाद सुन अधिकारी हुए उड़नछू।

    उवैस दानिश\सम्भल। आम आदमी की समस्याओं के निस्तारण को लेकर सरकार संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन करती है मगर संभल में अधिकारी किस तरीके से इस आयोजन का मजाक बना रहे हैं ये हम आपको बता रहे हैं एडीएम सिर्फ पौने घंटे ही समाधान दिवस में उपस्थित रहे पहले फरियादी एडीएम का इंतजार करते रहे करीब तीन घंटा देर से वे समाधान दिवस में पहुंचे और पौने घंटे फरियाद सुन उड़नछू हो लिए। 

    पूरा मामला गुन्नौर के संपूर्ण समाधान दिवस का है जहां आज अपर जिला अधिकारी कमलेश कुमार अवस्थी को संपूर्ण समाधान दिवस की अध्यक्षता करनी थी। जनपद स्तरीय पुलिस अधिकारियों में अपर पुलिस अधीक्षक आलोक कुमार जायसवाल को रहना था। सुबह दस की जगह पौने एक बजे के बाद अपर जिला अधिकारी कमलेश कुमार अवस्थी और अपर पुलिस अधीक्षक आलोक कुमार जायसवाल एक ही गाड़ी से समाधान दिवस में पहुंचे कई मामलों में आनन फानन मे तहसीलदार को FIR कराने का निर्देश दिए । फिर करीब 1.40 बजे अपर जिला अधिकारी कमलेश कुमार अवस्थी वहां से अचानक उठे और जरूरी काम बता अपर पुलिस अधीक्षक आलोक कुमार जायसवाल के साथ गाड़ी में बैठकर उड़नछू भी हो लिए। जबकि उस समय भी तहसील सभागार म़ें फरियादियों की लंबी कतार लगी हुई थी जिस कारण अपर जिला अधिकारी कमलेश कुमार अवस्थी  से फरियाद की आस में लाइन में लगे तमाम फरियादी लाइन में ही लगे रह गए। 

    अब मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ अपने अधिकारियों से पूछे कि कौन सा ऐसा जरूरी काम आ गया कि भूखे प्यासे फरियादियों की समस्या न सुन कर अपने जरूरी काम के लिए उल्टे पैर जाना पड़ा। क्या संपूर्ण समाधान दिवस का यही मतलब है? पौने घंटे ड्यूटी कर सरकार से पूरा वेतन और सुविधाएं लेने वाले अपर जिला अधिकारी कमलेश कुमार अवस्थी क्या कहते है सुनिए और देखिए। 

    हम आपसे भी कहेंगे कि ऐसे adm से आप भी जरुर सवाल करें कि किस वजह से वे लेट हुए और कौन सा जरुरी काम आ पड़ा वे फौरन उल्टे पैर चल पड़े? कम से कम दो बजे तक का इंतजार तो कर लिया होता। एक तो आए तीन घंटे लेट एक घंटे तो जनता की सुन ही लेते। 

    यूपी की बीजेपी सरकार में संपूर्ण समाधान दिवस में लोगों की समस्या का निवारण क्या काम नहीं है? क्या अपर जिला अधिकारी कमलेश कुमार अवस्थी और अपर पुलिस अधीक्षक आलोक कुमार जायसवाल सरकार से आज सिर्फ पौने घंटे की ही तनख्वाह लेंगे? देर से आना जल्दी जाना क्या साहब की आदत में शामिल हो गया है। 


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