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    स्मृति की बेटी के बहाने भाजपा पर प्रहार।

    राकेश अचल का लेख। मुद्दों के चयन में कांग्रेस हर बार मात खा जाती है। संसद के चलते स्मृति ईरानी की बेटी के मदिरालय को मुद्दा बनाना इसका ताजा उदाहरण है। देश के सामने पहले से इतने मुद्दे हैं कि जिन्हें लेकर यदि विपक्ष सरकार को घेरे तो संसद का सत्र कम पड़ जाये। लेकिन असल मुद्दों को छोड़कर एक गैर जरूरी मुद्दे पर हंगामा कुछ जमता नहीं है। गोवा में बार के अवैध संचालन में कथित रूप से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की बेटी का नाम सामने आने के बाद कांग्रेस ने उन पर हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि एक मृत  व्यक्ति के नाम का दुरुपयोग कर अपनी तिजोरियां भरने से ज्यादा बेशर्मी और क्या होगी। उन्होंने कहा, इनकी वाहियात और दोहरी मानसिकता आज पूरा देश देख रहा है। गोवा में स्मृति ईरानी की बेटी द्वारा चलाए जा रहे एक 'रेस्टोरेंट' पर फर्जी लाइसेंस लेने का आरोप है। वह लाइसेंस एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर है, जिनका देहांत मई 2021 में हुआ और लाइसेंस जून 2022 में लिया गया।

    मेरे ख्याल से ये मुद्दा ज्यादा से ज्यादा जालसाजी का मुद्दा है और इसे लेकर कांग्रेस को इतना हंगामा नहीं करना चाहिए। इस जालसाजी को यदि मुद्दा बनाना ही था तो कांग्रेस पहले खुद पुलिस में फरियादी बनती और जब पुलिस कार्रवाई न करती तो बात को आगे बढ़ाती। लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं, जो है सो सब हवा-हवाई है। 

    स्मृति की बेटी शराब बेचे या कुछ और करे ये विवाद का मुद्दा नहीं हो सकता। गोवा में तो वैसे ही ज्यादातर कारोबार महिलाएं ही संचालित करतीं हैं। एशिया के तमाम छोटे-बड़े देशों में महिलायें कारोबार में पुरुषों के मुकाबले ज्यादा सक्रिय हैं ,ऐसे में स्मृति की बेटी का कारोबार निशाने पर लेने लायक नहीं है। 

    ये बात सही है कि सत्तारूढ़ दल बार और अखबार में ज्यादा भेद नहीं समझती। इसलिए एक अखबार में कथित वित्तीय गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस की प्रमुख सोनिया गांधी के पीछे ईडी लगाती है,सत्यान्वेषण करने वाले मुहम्मद जुबैर को जेल भेजती है लेकिन स्मृति की बेटी की जालसाजी को जालसाजी नहीं मानती। मुझे लगता है कि कांग्रेस की प्रतिक्रिया इसी नाराजगी से जुड़ी है। 

    कांग्रेस ने कहा है कि हैरानी की बात यह है कि ऐसे नेताओं के समर्थकों के बच्चे नमाज और हनुमान चालीसा की लड़ाई लड़ें और खुद उनके बच्चे या तो विदेशों में पढ़ें या आपके 'आशीर्वाद' के सहारे इस तरह के गैरकानूनी काम करें। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्मृति ईरानी को बर्खास्त करने की मांग की। जो शायद कभी पूरी नहीं होगी। स्मृति भाजपा की स्टार नेता हैं ,उन्होंने कांग्रेस के राहुल गांधी को अमेठी में पराजित कर एक कीर्तिमान बनाया है , इसलिए उन्हें कांग्रेस की लाख कोशिशों के बावजूद मंत्री पद से हटाया तो नहीं जाएगा। हटाया भी नहीं जाना चाहिए। 

    निश्चित ही इस ताजा विवाद से स्मृति ईरानी की परेशानी बढ़ी होगी, उन्होंने अपनी सधी हुई प्रतिक्रिया भी दी है किन्तु ज्यादा गंभीर बात उन्होंने अपने वकील के जरिये कही है। स्मृति ईरानी की बेटी के वकील कीरत नागरा ने आरोपों को खारिज किया है। वकील साहब कहते हैं कि उनके मुवक्किल न तो मालिक हैं और न ही सिली सोल्स गोवा नामक रेस्तरां का संचालन करते हैं और उन्हें किसी भी प्राधिकरण से कोई कारण बताओ नोटिस नहीं मिला है। कीरत नागरा ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने वास्तविक तथ्यों का पता लगाए बिना एक मुद्दे को सनसनीखेज बनाने के लिए झूठे प्रचार का सहारा लिया है। 

    स्मृति ईरानी एक वाचाल नेता और पूर्व अभिनेत्री रहीं हैं इसलिए उनकी और से आये खंडन में भी यही दोनों तत्व शामिल हैं। ईरानी ने एक के बाद एक कई बड़ी बातें कहीं, स्मृति ईरानी ने कहा कि मेरी बेटी कॉलेज में पढ़ाई करती है और वह कोई बार नहीं चलाती है। स्मृति ईरानी के साहस को प्रणाम करना चाहिए क्योंकि वे तमाम वीडियो मौजूद होने के बावजूद पूरी ताकत से अपनी बेटी का बचाव कर रहीं हैं। स्मृति ईरानी ने कहा कि कांग्रेस के दो वरिष्ठ  नेताओं ने एक 18 साल की लड़की पर बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। उस लड़की का दोष यह है कि उस लड़की की मां ने 2014और 2019 में अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा। वे भूल जाती हैं कि उनकी बेटी के ऊपर आरोप 2014  या 2019  में नहीं बल्कि 2022 में लगाए जा रहे हैं। वे कांग्रेस के जयराम रमेश और पवन खेड़ा और  कांग्रेस महिला अध्यक्ष नेट्टा डिसूजा के खिलाफ भी कानूनी नोटिस भेजेगी। 

    स्मृति की बेटी के कारोबार के बहाने यदि कांग्रेस को भाजपा को निशाने पर लेना ही था तो उसे पूरे मंत्रिमंडल के सदस्यों के बाल-बच्चों के कारोबार की फेहरिश्त बनाकर सदन के बाहर और सदन के भीतर पेश करना चाहिए थी। यदि ऐसी कोई सूची बनाई जाये तो मुझे पूरा विश्वास है कि जनसेवा में लगे नेताओं की हकीकत उजागर हो जाये।  तय है कि इस सूची में हमारे प्रधानमंत्री का नाम तो आएगा नहीं ,लेकिन बाकी मंत्रियों में शायद कोई ही बचे जो स्मृति ईरानी की तरह बचाव की मुद्रा में खड़ा न दिखाई दे। दुःख की बात ये है कि सरकार खुद भी ये काम नहीं कर सकती, भला अपनी जांघ कोई खुद उघाड़ता है ?

    जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि कांग्रेस मुद्दों के चयन में अक्सर गलतियां कर देती है। कांग्रेस के पास मुद्दों की कमी नहीं होना चाहिए,क्योंकि देश इस समय सबसे क्रूर समय का सामना कर रहा है। देश की 80  करोड़ जनता फटेहाल है और सरकार द्वारा दिए जा रहे पांच किलो अनाज पर जिंदा है। जनता के लिए रोटी ,कपड़ा और मकान सबसे बड़ा मुद्दा है। जीएसटी का बढ़ता दायरा दही,मही तक आ पहुंचा है। ये एक बड़ा मुद्दा है ,बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे धंस गया है ,ये मुद्दा है। अग्निवीर तो मुद्दा है ही, यानि मुद्दों की कमी नहीं है। कमी है सरकार की नाकामियों को बेनकाब करने के लिए विपक्षी एकता की। ये एकता कभी ईडी के जरिये तोड़ी जा रही है तो कभी सीडी के जरिये .कांग्रेस को तोड़ने की तो हर सम्भव कोशिश हो रही है। 

    भाजपा सरकार का दुर्भाग्य ये है कि अभी तक ईडी का भूत राहुल गांधी और उनकी माँ सोनिया गांधी को नहीं तोड़ पाया है। बहन माया, ममता पहले से टूट चुकी हैं, ओडिशा, झारखंड ,बिहार पहले से टूटे पड़े है। अब बारी राजस्थान,छत्तीसगढ़ को तोड़ने की है। देखिये ये सब कब तक होता है, स्मृति ईरानी का न पहले कुछ बिगड़ा था और न आगे कुछ बिगड़ने वाला है। 

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