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    अयोध्या। वैदिक कालीन ग्रंथों में वर्णित पौधे से आच्छादित होगी रामनंगरी।

    ........... एडीए के ग्रीन कवर प्रोजेक्ट पर फारेस्ट मैन ऑफ इंडिया प्रदीप त्रिपाठी के नेतृत्व में हो रहा शोध

    अयोध्या। में श्री राम जन्मभूमि परिसर में रामलला के लिए भव्य मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। प्रशासन अब राम नगरी की पौराणिकता लौटने का भी काम कर रही है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार द्वापर में अयोध्या नगरी का सौन्दर्य उसकी प्राकृतिक छटा से निखरा था। उसी प्रकार रामनगरी में प्राकृतिक छटा वापस लाने के लिए अयोध्या को सजाने-संवारने की योजनाएं बनाई जा रही हैं। इसका नाम ग्रीन कवर प्रोजेक्ट भी है। इस परियोजना के लिए वैदिक कालीन ग्रंथों पर शोध करके उस समय मौजूद पौधों को रोपित किया जाएगा। जिसका काम शुरू हो गया है। इसके लिए एडीए ने कई स्थानों को चिन्हित भी कर लिया है।

    अयोध्या शहर को हरा भरा बनाने का काम वाल्मीकि रामायण व वन संहिता आदि ग्रंथों पर शोध के माध्यम से किया जाएगा। अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) के उपाध्यक्ष व नगर आयुक्त विशाल सिंह ने शासन के निर्देश पर वैदिक प्लांटेशन पर शोध कराया जा रहा है। फारेस्ट मैन ऑफ इंडिया शोध प्रदीप त्रिपाठी के निर्देशन में यह कार्य हो रहा है।

    प्रदीप त्रिपाठी ने बताया कि वाल्मीकि रामायण से 182 पेड़ों की सूची तैयार की गई है। चित्रकूट में भगवान राम ने 12 वर्ष मधुर वन में बिताए। इसी के साथ पंचवटी, दंडकारण्य, किष्किंधा, श्रीलंका और अशोक वाटिका का डेटा कलेक्ट कर देव वन और देवराई वन बनाया गया है। रामायण काल में जिन पेड़ों का वर्णन मिलता है उनका प्लांटेशन यहां किया जा रहा है। साथ ही नक्षत्र वन, राशिवन, बटरफ्लाई गार्डन बनाने पर काम चल रहा है। इसके लिए स्कूली छात्रों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्हें भगवान से जोड़कर पेड़ों का महत्व बताया जा रहा है। प्रदीप त्रिपाठी ने बताया कि अयोध्या – लखनऊ हाईवे पर सहादतगंज के ईद गिर्द कलरफुल प्लांटेशन किया जा रहा है। यह पेड़ हर सीजन में कलर बदलते रहेंगे। साकेत पुरी के मैदान ,जनौरा बाईपास साईं दाता कुटिया के पास दो हजार पेड़ का देवराई वन लगाया गया है। इसी तरह सूर्यकुंड, तुलसी उद्यान पार्क, राजद्वार पार्क व नगर निगम के जितने भी उद्यान हैं, उनमें भी इन्हीं पेड़ों को लगाने का काम शुरू हो गया है। भविष्य में बाईपास से आने वाले श्रद्धालुओं को हरियाली दिखने लगेगी। इसके साथ वातावरण में तापमान भी कम होने का एहसास होगा। मुंबई, दिल्ली व बेंगलुरु की तरह उत्तर प्रदेश में भी पेड़ों की गणना का काम अब शुरू होगा। इसके लिए पुराने और नए पेड़ों का डाटा तैयार कराया जा रहा है । मोबाइल पर क्यूआर कोड स्कैन करते ही पूरी हिस्ट्री सामने आ जाएगी जिसमें पेड़ों को लगाने के अलावा अन्य जानकारियां शामिल होंगी।

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