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    बाराबंकी। कमरियाबाग शमशानघाट के कायाकल्प में रंग ला रही सेवादारों की मुहीम।

    ............ साफ-सफाई के साथ स्वच्छ  पर्यावरण की दिशा में उठाये जा रहे ठोस कदम हो रहा पौधरोपण

    दिनेश चन्द्र श्रीवास्तव\बाराबंकी। शहर के पर्यावरण में बीते एक दशक में आयी भारी गिरावट को अब हर किसी को अहसास है। आधुनिकता और सौंदर्यीकरणकी आड़ में हरियाली और सरोवरो के अस्तित्व को नष्ट करने का काम अंजाम दिया गया है। जिसमे सरकार को भ्रमित करके जिम्मेदार लोगो ने अहम भूमिका निभाई है। एक दशक में शहरी इलाकों में बढ़ती गर्मी प्राकृतिक संसाधनों के साथ खिलवाड़ है समय रहते इसका विरोध नहीं करने वाले अब प्रायश्चित भी कर रहे है।

    यें बात आम है कि सरकार जिन विभागों के जरिये पर्यावरण और कालाबाजारी की रोकथाम करती है, वही विभाग सरकार की मंशा पर पानी फेरते है और उसके विपरीत कार्य करके अपना और अपने लोगो का भला करने से नहीं चूकते है। यही कारण रहा, कई जल स्रोत जिनमे शहर के कई तालाब, जंगल-झाड़ी ही नहीं कई सरकारी नल और पम्प तक रातो रात गायब हो गये। ऐसे कृत्य के दुष्परिणाम अब शहरवासी भुगत रहे है। लेकिन पर्यावरण प्रेमी कहे या समाजसेवा की भावना से साकेत संत मौर्या द्वारा कमरियाबाग में निस्वार्थ सेवा से डेढ़ महीने शुरू किया गया साफ-सफाई कार्य से अब यहां की तस्वीर बदलने लगी है। जिसमे अब तमाम लोग सहयोग में आगे आने लगे है। साकेत बताते है कि मित्रों, सहयोगी और श्रमदान करने वाले साथियों के संग विचार-विमर्श करके कमरिया बाग शमशान घाट के सौंदर्यीकरण के लिए कुछ आवश्यक वस्तुओं की सूची तैयार की गई है। जिस में अब बैठने के लिए कम से कम चार सीमेंटेड बेंच, जमुरिया के किनारे हेज तथा पिलर लगाकर लोहे की तारों की बैरीकटिंग इसके अतिरिक्त पीपल वृक्ष के नीचे सर्किल चबूतरा बनाने के लिए सीमेंट, ईट, मोरंग, बालू, पुताई तथा मरम्मत के अन्य छोटे-मोटे काम के साथ साथ  बैठने के लिए एक और शेड की आवश्कता है। इसके अतिरिक्त कार्य योजना में 18 इंची गमलों में फूल पौधे  लगाने का विचार बनाया गया है। गमलों की अनुमानित संख्या 50 प्लस और होनी चाहिए।

    • आमजन से किया सहयोग का अनुरोध

    एक बार वृहद स्तर पर साफ सफाई करा कर लेबलिंग करके इस स्थल को नियमित रूप से आंशिक देखभाल की ही जरूरत होगी। अनुरोध है कि अगर आप आर्थिक रूप से सक्षम हैं, तो यथासंभव इसमें वर्णित सामग्री जैसे गमले,पौधे, बेंच, सूचना पट्ट बोर्ड आदि सीधे यहां पर रविवार को सुबह 7:30 से 11,30के बीच में पहुंचा सकते हैं। आप चाहे तो नगद धनराशि सहयोग के रूप में श्रमिक गतिविधियों के लिए भी दे सकते है। अगर आप ऑनलाइन इस पुनीत कार्य में सहयोग देना चाहते हैं तो उसके वॉट्सप नम्बर जारी किये है। भुगतान करने के बाद कृपया स्क्रीनशॉट इन्हीं नंबरों पर संचालित व्हाट्सएप पर अपनी फोटो के साथ जरूर भेज सकता है।

    • शहर को हरा-भरा रखने में जारी रहेंगे प्रयास

    संवाददाता दिनेश श्रीवास्तव से बात करते हुए बताया कि कमरियाबाग को सकारात्मक रूप देने के बाद उनका अगला लक्ष्य शहर से के ऐसे स्थल होंगे जहाँ अधिक से अधिक पौधे लगाकर आगामी पांच वर्षो तक उनकी देखभाल करके वृक्ष की शक्ल दी जाये। इसके बाद अस्तित्त्व खो चुके तालाब और अन्य शमशानघाट पर वृहद पौधरोपण होगा। खास बात यह रहेगी कि इन रोपित पौधों को सुरक्षित करने के लिये लोहे के मजबूत जाल लगाया जायेगा और नुकसान पहुंचाने वालों से सख्ती से निपटा जायेगा।

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