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    अयोध्या। जैन धर्म प्रेमियों को अलग स्वरूप में दिखेगी भगवान आदिनाथ की जन्मस्थली।

    ........... 100 करोड़ से अधिक की लागत से हस्तिनापुर के जम्बूद्वीप की तर्ज पर होगा विकास

    अयोध्या। प्रभु श्रीराम लला की जन्मस्थली हिन्दू  जैन और बौद्ध धर्म का संयुक्त तीर्थ स्थल है। अयोध्या जितनी हिन्दुओं के लिए पवित्र नगरी है उतनी ही जैन धर्म के अनुयायियों के लिए भी पवित्र नगरी है। इन्हीं भगवान ऋषभ देव की जन्मस्थली अयोध्या का विकास हस्तिनापुर के जंबू द्वीप की तर्ज पर होगा। 100 करोड़ से अधिक की लागत से मंदिर निर्माण की तैयारी है। लखनऊ के आर्किटेक्ट मंदिर का मास्टर प्लान तैयार कर रहे हैं।

    बता दे कि अयोध्या में कई महान योद्धा, ऋषि-मुनि और अवतारी पुरुष हो चुके हैं। जैन मत के अनुसार यहां प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ऋषभनाथ सहित 5 तीर्थंकरों का जन्म हुआ था। अयोध्या में आदिनाथ के अलावा अजितनाथ, अभिनंदननाथ, सुमतिनाथ और अनंतनाथ का भी जन्म हुआ था। जैन धर्म के सभी 24 तीर्थंकरों का जन्म भगवान श्रीराम के इक्ष्वाकु वंश से माना जाता है। इसमें पांच तीर्थंकर का जन्म अयोध्या में हुआ था। चक्रवर्ती सम्राट भरत ने यही से संपूर्ण भारत पर राज्य किया था और उन्हीं के नाम से यह देश जाना गया।

     प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव का जन्म अयोध्या में चैत्रबदी आठ को हुआ था। दूसरे तीर्थंकर अजितनाथ का जन्म माघ शुदी आठ को हुआ था। चौथे तीर्थंकर अभिनंदन स्वामी का जन्म अयोध्या में माघ शुदी दो हुआ था। पांचवें तीर्थंकर सुमतिनाथ का जन्म अयोध्या में वैशाखसुदी आठ को हुआ था। 14वें तीर्थंकर अनंतनाथ का जन्म अयोध्या में वैशाख बदी 13 को हुआ था। जंबू द्वीप से जुड़ीं ज्ञानमती माता जी के निर्देशन में दिगंबर जैन अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी इस पर कार्य कर रही है।

    दिगंबर जैन अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष पीठाधीश स्वामी रविंद्र कीर्ति जी महाराज के अनुसार ज्ञानमती माता जी वर्ष 1995 से अयोध्या के विकास के लिए कार्य कर रही हैं। नौ मंदिरों का अयोध्या में निर्माण किया जा चुका है। अब अंतिम चरण में आदिनाथ तीर्थंकर ऋषभ देव भगवान की जन्मस्थली का विकास कार्य प्रगति पर है। 

    भगवान श्रीराम के मंदिर से एक किलोमीटर की दूरी पर मंदिर का निर्माण किया जाएगा। होली के आसपास कार्य आरंभ होने की संभावना है। मनोज जैन के मुताबिक जैन तीर्थ को विकसित करने में केंद्र सरकार पांच एकड़ भूमि देने की तैयारी कर चुकी है। जैन समाज के पास अभी सात एकड़ भूमि है।

    अयोध्या को जैन समाज का शास्वत तीर्थ माना जाता है। इस तीर्थ पर ही जैन समाज के 24 तीर्थंकर जन्म लेते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चतुर्थ काल में अयोध्या में पांच तीर्थंकरों ने जन्म लिया। इसमें आदिनाथ तीर्थंकर भगवान ऋषभ देव, भगवान अजितनाथ, भगवान अभिनंदन नाथ, भगवान सुमतिनाथ, भगवान अनंतनाथ जी रहे। तीन तीर्थंकरों का जन्म हस्तिनापुर में हुआ। भगवान महावीर अंतिम तीर्थंकर माने जाते हैं। मंत्री मनोज जैन ने बताया कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर की खुदाई के दौरान भी जैन मंदिर से जुड़े अवशेष प्राप्त हुए थे।

    दिगंबर जैन अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के मंत्री मनोज जैन ने बताया कि पांच तीर्थंकरों के चरण स्थानों का भी विकास किया जाएगा। इसके लिए समिति के द्वारा तैयारी की जा रही है। आने वाले समय में जैन धर्म प्रेमियों के साथ अन्य सभी के लिए अयोध्या एक अलग धार्मिक स्वरूप नजर आएगा।

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