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    कानपुर। 40 प्रतिशत बच्चों को डायरिया का सही इलाज मिल पाता है:जे0के0गुप्ता

    इब्ने हसन ज़ैदी\कानपुर। भारतीय बाल रोग अकादमी कानपुर द्वारा मनाये जा रहे विश्व ओ०आर०एस० सप्ताह के अन्तर्गत प्रखर हास्पिटल आर्य नगर कानपुर नगर में ओ०आर०एस० पर एक कार्यक्रम एवं प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ० अमित चावला, पूर्व डी०जी०एम०आई० डा०वी०एन० त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ० अमित चावला ने बताया कि आज भी दुनिया में केवल 40 प्रतिशत बच्चों को डायरिया का सही इलाज मिल पाता है। डायरिया एक गम्भीर बीमारी है। सम्पन्न देशों में आज भी निमोनिया के बाद डायरिया दूसरी सबसे खतरनाक बीमारी मानी जाती है। ओ०आर०एस० घोल और ओरल डिहाइड्रेशन थेरेपी यानि ओ०आर०एस० की शुरूआत सन् 1978 डब्लू0एच0ओ0 ने उस समय उपलबध समान से की थी। इससे डायरिया से होने वाली मौतों की संख्यायें काफी कमी पाई गई। इसलिए इसे सदी का मेडिकल साइंस की काफी बड़ी उपलब्धी माना जाता है।

    डॉ० वी०एन० त्रिपाठी ने बताया कि आप जो भी कुछ खाते हैं वह डायरिया के लक्षणों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चूंकि इस समस्या के होने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है इसलिए खुद को जितना हो सके हाइड्रेटेड रखें। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस को बनाये रखने के लिए प्रर्याप्त मात्रा में पानी एवं जूस का सेवन करें इसके अलावा डायरिया होने पर डेयरी प्रोडक्ट से बचें क्यों कि इसे पचाना मुश्किल होता है फाइबर से भरपूर सब्जियाँ जैसे गोभी एवं बीन्स का सेवन न करें। क्योंकि इससे पेट फूल सकता है, और सोडा, चाय एवं काफी भूल कर भी न लें डायरिया में लो फाइबर युक्त डाइट लेना हेल्दी हो सकता है। आलू, चावल भोजन में शामिल करना फायदेमन्द हो सकता है।डॉ० अनुराग भारती) अध्यक्ष डॉ० सुबोध बाजपेयी) सचिव डॉ० जे०के गुप्ता,संयोजक इत्यादि।

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