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    वाराणसी। ज्ञानवापी-मां शृंगार गौरी मुकदमे की सुनवाई अब 19 जुलाई को होगी।

    ............. हिंदू पक्ष के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के 100 जजमेंट के साथ 361 पन्ने कोर्ट में किये पेश 

    वाराणसी। ज्ञानवापी-मां शृंगार गौरी मुकदमे की सुनवाई दो दिन के अंतराल के बाद सोमवार को वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में दो घंटे तक चली। हिंदू पक्ष की राखी सिंह के अधिवक्ता शिवम गौड़ ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के 100 जजमेंट के साथ 361 पन्ने कोर्ट में पेश किए।उन्होंने कहा कि देश की आजादी के दिन से लेकर वर्ष 1993 तक मां शृंगार गौरी की नियमित पूजा होती थी। 

    वहां का धार्मिक स्वरूप सनातन धर्म का ही था। वर्ष 1993 में सरकार ने अचानक बैरकेडिंग लगा कर नियमित दर्शन और पूजा बंद करा दिया। इसलिए प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट और वक्फ एक्ट या किसी अन्य एक्ट के प्रावधान मां शृंगार गौरी प्रकरण में लागू नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा ज्ञानवापी की किसी जमीन पर कोई दावा नहीं है। हमारा दावा सिर्फ मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन और पूजा के लिए है। अदालत ने शिवम गौड़ को बहस जारी रखने की अनुमति देते हुए सुनवाई की अगली तिथि 19 जुलाई नियत कर दी। इससे पहले मुस्लिम पक्ष यह दावा कर चुका है कि मां शृंगार गौरी का मुकदमा किसी भी तरह से सुनवाई योग्य नहीं है। हिंदू पक्ष की चार वादिनी सीता साहू, मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी और रेखा पाठक के अधिवक्ता यह दावा कर चुके हैं कि मुकदमा हर हाल में सुनवाई योग्य है।

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