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    मिश्रित\सीतापुर। शासन के निर्देशानुसार नहीं हटा मिश्रित मार्केट का अतिक्रमण।

    मिश्रित\सीतापुर। जिलाधिकारी के निर्देश को लेकर तहसील के एसडीएम गौरव रंजन श्रीवास्तव और सीओ  सुशील कुमार यादव मिश्रित कस्बे में व्याप्त अवैध अतिक्रमण को लेकर काफी संजीदा हैं वे कई बार व्यापार मण्डल के पदाधिकारियों की बैठक करके व्यापारियों को उनके द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण को स्वतः हटा लेने की चेतावनी दे चुके हैं लेकिन बावजूद इसके नगर के व्यापारी चिन्हित अतिक्रमण हटाने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। समस्या जस की तस ही बनी हुई है लोगों वाहन चालकों  को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञातव्य हो कि आज उप जिलाधिकारी व सीओ सहित प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार सिंह ने भारी पुलिस बल के साथ पालिका के बड़े बाबू बेद प्रकाश त्रिवेदी को साथ लेकर  पुनः नगर भ्रमण किया तहसील चौराहा से परसौली चौराहा तक पैदल मार्च करके कल बृहस्पतिवार तक अतिक्रमण स्वयं हटा लेने की कड़ी चेतावनी व्यवसायियों को दी है। 

    इन अधिकारियों ने अतिक्रमणकारियों को चेताया है कि अगर उनके द्वारा दी गई समयावधि में अतिक्रमण नहीं हटाया जाता है तो अवैध अतिक्रमण पर बुल्डोजर चलाकर उसे हटाने की प्रशासनिक कार्यवाही की जाएगी साथ ही इसके इस कार्य में आने वाला खर्च भी संबंधित आक्रमणकारियों से ही वसूल किया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आज नगर के अतिक्रमण कारी व्यापारियों को दी गई कड़ी चेतावनी के बाद उनमें सनसनी फैल गई है मजेदार बात तो यह है तहसील प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारी जहां कई बार नगर में मार्च करके अवैध अतिक्रमण को चिन्हित कराकर निशादेही करा चुके हैं वहीं अधिशासी अधिकारी की हठधर्मिता और निरंकुशता के चलते व्यापारी किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाने का नाम ही नहीं ले रहे हैं गौरतलब तो यह भी है कि जब प्रशासन अतिक्रमण को लेकर कड़े तेवर अपनाने के मूड में आता है तो यहां की पालिका में अंगद पांव की तरह जमे अधिशासी अधिकारी आरपी सिंह बीमारी आदि का हवाला देकर रफूचक्कर हो जाते हैं क्योंकि उन्हें प्रशासनिक अमले के साथ कार्यवाही के समय  जाना ही न पड़े नगर में व्याप्त अवैध अतिक्रमण का आलम तो यह है कि मुख्य बाजार सहित हर वर्ष यहां फाल्गुन मास के दौरान लगने वाले 84 कोसीय ऐतिहासिक होली परिक्रमा मेला का मैदान जो प्रशासन के ही नियंत्रण में है पर भी अवैध तरीके से भवनों का निर्माण हो चुका है और होना निरंतर जारी है इन भवन निर्माण करताओं ने नगर पालिका से कोई नक्शा आदि पास ही नही कराया गया है और न ही निर्माण संम्बधी कोई प्रशासनिक अनुमति प्राप्त की है मेला मैदान निरंतर संकुचित होता चला जा रहा है जिसकी तरफ से अधिशासी अधिकारी पूरी तरह से उदासीन बने हुए हैं। 

    ज्ञातव्य हो कि मेला मैदान में जिन जिन स्थानों पर दुकानदार अपने खेल तमाशा सहित अन्य प्रकार की दुकानें लगाते थे साथ ही इसके जिन जिन स्थानों पर संत महंत और लाखों परिक्रमार्थी टिक कर अपने खेमे और पंडाल लगाते थे वे स्थल भी पूरी तरह से अवैध भवन निर्माण की भेंट चढ़ाकर विलुप्त हो चुके हैं यहां पर यह भी बताते चलें कि बीते वर्षो तत्कालीन समय में जनपद के जिलाधिकारी रहे विजय शंकर पाण्डेय ने ऐतिहासिक मेला संरक्षण को लेकर मेला क्षेत्र में प्लाटों की बिक्री और नए भवन निर्माण पर एक प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करके पालिका प्रशासन को यह निर्देश दिए थे कि मेला क्षेत्र में नए भवन निर्माण के लिए नक्शे आदि पास ही न किए जाएं ताकि मेला परिसर सुरक्षित बना रहे बावजूद इसके नगर क्षेत्र में अवैध भवन निर्माण को लेकर अधिशासी अधिकारी पूरी तरह बेपरवाह ही बने हुए हैं आखिर क्यों ? शासन और प्रशासन के सामने जांच का एक गंभीर विषय उत्पन्न करता है। अगर नगर क्षेत्र में स्थित भवनों और निर्माणाधीन भवनों के नक्शों  जांच करा ली जाए तो सारी कलई खुलकर स्वयं सामने आ जाएगी फिलवक्त  अधिशासी अधिकारी की लचर और दूषित नीतियां अतिक्रमणकारियों के साथ ही अवैध कब्जा धारकों के लिए वरदान बनी हुई हैं ।जो अतिक्रमण को लेकर संजीदा तहसील प्रशासन और पुलिस प्रशासन पर भारी पड़ती  दिखाई दे रही हैं क्योंकि उपजिलाधिकारी और क्षेत्राधिकारी के कई बार चेतावनी दिए जाने के बाद भी अवैध अतिक्रमण कारी अपने द्वारा किए गए अनाधिकृत कब्जो को हटाने के बजाय चुप्पी ही साधे हुए हैं परिणाम स्वरूप नागरिकों सहित वाहन चालकों आदि को मार्गो पर निकलना दूभर हो रहा है अब देखना यह है कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दी गई अंतिम चेतावनी पर अवैध अतिक्रमण कारी स्वयं अपने द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाते हैं या फिर योगी बाबा के बुलडोजर को ही मेहनत करनी पड़ेगी।

    संदीप चौरसिया 

    Initiate News Agency (INA), तहसील मिश्रिख सीतापुर

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