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    इतना तो आसान नहीं था, रामेश्वर यादव को गिरफ्तार करना, फिर कैसे हो गया संभव?

    अतुल यादव (रवि) का लेख। अलीगंज विधानसभा से लेकर एटा मुख्यालय तक तीन दशक जिस परिवार ने राजनीति में अपनी धमक को बरकरार रखा हों, उस परिवार के मुखिया को जेल भेजना इतना आसान तो नहीं था। फिर कैसे संभव हुआ। 

    कहते है कि अलीगंज विधानसभा के पूर्व विधायक रामेश्वर यादव के संबंध बदमाश पोथी से था। जिसका एनकाउंटर इस समय के उत्तराखंड के एक जिले से लाकर उत्तर प्रदेश के बीहड़ो में किया गया था। उस समय भी पोथी से संबंध होने की वज़ह से जनपद एटा की पुलिस ने रामेश्वर यादव को एनकाउंटर के लिये अपनी गिरफ्त में लिया था लेकिन रामेश्वर यादव का साथ उस समय भी भाग्य ने दिया। पोथी मारा गया और रामेश्वर यादव ने अलीगंज के ताकतवर नेता लटूरी सिंह यादव की शरण लें लीं। बहुत बड़े समय तक रामेश्वर यादव ने अपनी मौत और जेल को धोखा दिया और लखनऊ में लटूरी सिंह यादव के सरकारी आवास (रॉयल होटल) में अपना समय बिताया था। समय ने करवट लीं और राजनैतिक पायदान पर पहला कदम रखने के बाद रामेश्वर यादव ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।समय के कालांतर में क्या लिखा है  कुछ नहीं कहा जा सकता है।

    जनपद एटा के अलीगंज विधानसभा के पूर्व विधायक लटूरी सिंह यादव की ऊँगली पकड़ कर राजनैतिक ऊंचाइयों को छूने वाले रामेश्वर यादव ने अलीगंज ही नहीं अपितु एटा मुख्यालय पर भी अपना झंडा गाड़ दिया था। इस समय की राजनीति में भी इस परिवार की टक्कर पर किसी भी पार्टी के किसी नेता में इतना दम ख़म नहीं है कि वर्तमान राजनीति में सामना भी कर सके। लेकिन!

    40 साल से जिस व्यक्ति ने जेल और क़ानून को अपना यार बना कर रखा हों,आप समझ सकते है कि उस व्यक्ति की कितनी गहरी पहुँच होंगी। आज से 40 साल पहले पुलिस ने रामेश्वर यादव को गिरफ्तार किया था लेकिन वो पुलिस भी जेल तक नहीं लें जा पाई थी। 40 साल से जो जेल जिस साधारण व्यक्ति का इंतजार कर रही थी। उस जेल का इंतजार ख़त्म अब जाकर हुआ है वो भी उस व्यक्ति के बढे हुए रसूख के साथ। 10/6/2022  का दिन शायद एटा की राजनीति के लिये अहम् हों सकता है। लेकिन यह पूर्व विधायक रामेश्वर यादव की गिरफ्तारी इतनी आसान होंगी यह समझना भी मुश्किल लग रहा है वही हास्यास्पद लग रहा है। जिस व्यक्ति पर 77 मुक़ददमे लगे हों और वो शख्स एटा जिले की सीमा से लगे जिले में रह रहा हों और एटा की पुलिस आगरा पुलिस की मदद से गिरफ्तार कर लेती है। सम्भव नहीं है। 

    सूत्रों का कहना है कि रामेश्वर यादव की गिरफ़्तारी में शासन का बहुत बड़ा हाथ है। यह गिरफ्तारी अभी होती भी नहीं अगर वर्तमान MLC आशु यादव की मुलाक़ात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सत्र के दौरान नहीं होती। वही इस मुलाक़ात ने इस गिरफ्तारी में रफ़्तार दीं और महज 20 दिन में रामेश्वर यादव की आगरा से गिरफ्तारी हों गई। पूर्व विधायक रामेश्वर यादव की अदालत पेशी से लेकर जेल तक के सफर में कही ऐसा भी देखने को नहीं मिला कि रामेश्वर यादव की गिरफ़्तारी जेल जाने से एक रात पहले हुई है। दाढ़ी बनी हुई थी, कुर्ते में झकाझक सफेदी और बिना सिमटन का कुर्ता भी पहने थे। ऐसा लग रहा था जैसे घर से आ रहा कोई व्यक्ति जेल में मुलाक़ात के लिए जा रहा हों, बेहद ही चौकाने वाला दृश्य था। लेकिन यह सत्य था कि यह पूरा फ़िल्मी था।

    अगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दवाव जिला प्रशासन पर नहीं होता तो शायद ही यह गिरफ्तारी होती। और फिर वही 40 साल पुराना इंतजार होता।

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    इस गाँव से निकले दो भाइयो ने जिस क़ामयाबी के साथ राजनीती मे कदम रखे है एटा के आसपास के जिलों के लिए उदाहरण भी बने और यह दोनों भाई राजनीती में युवाओं के आदर्श भी माने गये। लेकिन जिस तरह कि राजनीति की परिपाटी रामेश्वर यादव के अनुज जुगेन्द्र यादव ने रखी थी। वह राजनीति दशकों तक लोगों के जहन में रहेंगी।जिस परिवार को जेल की सलाखों के पीछे लाने के लिए पूर्व विधायक अवध पाल सिंह यादव ने बसपा सरकार में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया हों और हार गये थे। आज वह परिवार भी सोच रहा होगा कि आखिर किस कलम से दोनों भाई अपना भाग्य लिखा कर लाये है।

    अतुल यादव (रवि)

    Initiate News Agency (INA), कासगंज

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