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    रामपुर। हिंदू मुस्लिम के नाम पर लड़ने वालों के लिए एक सबक।

    रामपुर। आज हमारे सभ्य समाज में जहां कुछ लोग हिंदू मुस्लिम के नाम पर एक दूसरे को लड़ाने का काम करते हैं वहीं दूसरी ओर हमारे समाज में ऐसे भी लोग हैं जो नैतिकता के मार्ग पर चलते हुए इंसानियत को जीवित रखने का काम करते हैं। जिसकी एक मिसाल सामने आई गंगा जमुना तहजीब का शहर रामपुर में रामपुर शहर के अंतर्गत शाहाबाद गेट स्थित काशीराम कॉलोनी में एक एकल बुजुर्ग महिला रहती हैं। अंशुल सक्सेना नामक इन बुजुर्ग महिला के सभी सगे संबंधियों ने उम्र के इस पड़ाव पर उनका साथ छोड़ दिया उम्र के जिस मुकाम पर उन्हें एक सहारे की जरूरत थी ऐसे समय में इन बुजुर्ग महिला के सभी सगे संबंधी और परिजन उन्हें शहर रामपुर में अकेला छोड़ कर दूसरे शहरों में जाकर बस गए। वह तो गनीमत यह रही कि इन बुजुर्ग महिला को सरकार द्वारा काशीराम कॉलोनी में सर छुपाने का एक आसरा मिल गया।

    बुजुर्गी और बीमारी से जूझ रही अंशुल सक्सेना नामक इन  एकल महिला की मुलाकात एक सर्वे के दौरान मुबीना नामक समाज सेविका से होती है। मूवीना शहर रामपुर की एक प्रमुख समाज सेवी नवयुवती हैं जो चेतना सेवा संस्थान से जुड़ी हुई हैं और इस संस्थान में आरडब्ल्यू के पद पर कार्यरत हैं तथा मानव अधिकार संस्था से भी महिला प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं।

    अंशुल सक्सेना की दयनीय स्थिति को देखकर मूवीना नामक प्रमुख समाज सेविका उनकी दत्तक पुत्री बनकर सेवा भाव से निरंतर उनकी देखरेख का तथा उनकी बीमारी का इलाज करा रही हैं प्रमुख समाज सेविका मूवीना प्रतिदिन अपने ऑफिस जाने से पहले या ऑफिस का कार्य बीच में छोड़कर अंशुल सक्सेना के घर जाकर सभी दैनिक कार्य पूरे करती हैं अपने हाथ से बनाकर उन्हें खाना खिला कर तथा उन्हें दवाई देकर फिर अपने ऑफिस का काम देखती हैं। जो कि अपने आप में एक मिसाल है शहर रामपुर स्थित काशीराम कॉलोनी में हर कोई उनके नाम की चर्चा करता है और कहता है कि बेटी हो तो ऐसी हो, वर्तमान समय में अंशुल सक्सेना नामक महिला को बड़े इलाज की आवश्यकता है क्योंकि वह इस वक्त बहुत बीमार हैं और लगातार एक लंबे समय से बीमारी से जूझ रही हैं।

    Initiate News Agency (INA)

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