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    पलवल। होडल कृषि विभाग द्वारा जल संरक्षक शिविर।

    ऋषि भारद्वाज/पलवल। होडल के गांव बांसवा में कृषि विभाग द्वारा किसानों को जल संरक्षक के प्रति जागरूक करने के लिए शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में किसानों को कृषि विभाग द्वारा जल की केसे बचाया जा सकता है और फसल चक्र किस तरह से अपनाएं इन सभी के बारे मे समझाया। इस मौके पर सैकड़ों किसान मौजूद रहे। किसानों ने कहा की इस शिविर में जल के प्रति उनको समझाया गया है इससे उनको बहुत लाभ मिलेगा।

    होडल के कृषि विभाग के अधिकारी  लक्ष्मण पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार द्वारा जल संरक्षण पर बहुत कार्य किए जा रहे हैं । सरकार का उद्देश्य है कि जल को कैसे बचाया जा सके इसलिए कृषि विभाग द्वारा किसानों को जागरूक करने के लिए जगह जगह गावों  में जल संरक्षण को लेकर शिविर लगाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं सरकार का उद्देश्य यह भी है कि किसान फसल चक्र को भी अपनाएं एक ही फसल को बार-बार अपने खेतों में बोने से  और एक ही फसल बोने से जमीन की उर्वरक शक्ति कमजोर होती जा रही है।  सरकार का उद्देश्य है कि किसान ऐसी फसल की बिजाई करें  जिसमें पानी कम खर्च हो। इसीलिए आज होडल के गांव बांसवा में जल संरक्षण को लेकर किसानों को जागरूक करने के लिए शिविर का आयोजन किया गया है।  उन्होंने कहा कि यह शिविर हर गांव में सरकार की तरफ से लगाए जा रहे हैं ताकि किसान जागरूक हों और जल को बचा  सके। लक्ष्मण  पांडे ने बताया कि आज किसानों को बताया गया कि वह धान की खेती न करें क्योंकि धान की खेती में पानी ज्यादा खर्च होता है जिससे जमीन में पानी की मात्रा लगातार कम होती जा रही है और जमीन में पीने योग्य 2% पानी बचा है। किसानों को इस शिविर में फसल चक्र को अपनाने के बारे में भी बताया गया कि फसल की।बिजाई  से पहले अलग-अलग फसल की बिजाई करें ताकि कम पानी खर्च हो। उन्होंने कहा कि अगर किसान धान की फसल लगाना चाहते हैं तो खेत में पहले पाटा लगाएं और फिर धान की फसल की रोपाई करें।  पाटा लगाने से  25% पानी कम खर्च होगा और फसल भी अच्छी होगी। अगर किसान पाटा नही  लगाएंगे तो धान की फसल में ज्यादा पानी खर्च होगा । कृषि अधिकारी ने बताया कि किसानों को यह भी समझाया गया कि ड्रिप सिस्टम से  भी धान की पैदा की जा सकती है। किसानों को समझाया गया की वह फसल चक्र को अपनाएं । वह  ज्वार, बाजरे की, दलहन की फसल की बिजाई करें क्यों इन फसलों में पानी भी कम खर्च होगा। इन फसलों में  भी  ड्रिप सिस्टम से फसल की जड़ों में पानी जाता है और फसल भी अच्छी होती है और पानी भी कम खर्च होता है । कृषि अधिकारी ने बताया कि गांव के लोगों को और किसानों को यह भी समझाया गया कि घरों में लगे समरसीवल को और  पानी की सप्लाई को खुला  ना छोड़े नहाते समय बाल्टी का प्रयोग करें।  पशुओं को भी नहलाते समय बाल्टी का प्रयोग करें ताकि पानी को बचाया जा सके।कृषि  अधिकारी ने किसानों को कहा कि धान की फसल को छोड़कर दलहन की फसल ज्वार बाजरा ढेंचा की फसल की बिजाई करें  ताकि खेतों की जमीन की उर्वरक शक्ति को बढ़ाया जा सके । इस मौके पर सैकड़ों किसान मौजूद रहे।

    इस शिविर में भाग लेने वाले किसानों से जब बात की तो किसानों ने कहा कि जो कृषि विभाग द्वारा उनके गांव में जल को बचाने के लिए शिविर लगाया गया है यह कृषि विभाग का एक अच्छा कार्य है । किसानों ने कहा कि इस शिविर के माध्यम से उनको बहुत सारी जानकारी प्राप्त हुई है की जमीन में पानी की मात्रा लगातार कम होती जा रही है और पानी को बचाने के लिए उनको इस तरह कार्य करना है कौन सी फसल की बिजाई कब  करनी है। इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है।  किसानों ने कहा कि धान की फसल में पहले पाटा लगाएं और उसके बाद धान की बिजाई करें ताकि धान में 25% पानी की बचत होगी । उन्होंने कहा कि कृषि विभाग द्वारा उनको समझाया गया है कि ड्रिप सिस्टम से फसल की सिंचाई करें उससे फसल भी अच्छी होगी और पानी की बचत भी होगी।  किसानों ने कहा कि जो लोग घरों में समर्सिबल चलाकर या वाटर सप्लाई का पानी चला कर छोड़ देते हैं लोगों को ऐसा नहीं करना चाहिए । क्योंकि पानी ज्यादा खर्च होगा तो जमीन में से पानी की मात्रा लगातार कम होगी।  किसानों ने कहा कि इस तरह के शिविरों से उनको बहुत जानकारी मिली है और वह आगे पानी को बचाने की भरपूर कोशिश करेंगे।

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