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    पीलीभीत। चाइना में योग का डंका बजा रहे हैं पीलीभीत के अनुराग।

    .............. योगगुरु के नाम से मशहूर है चीन में अनुराग, नौकरी छोड़ कर योग को अपनाया

    कुंवर निर्भय सिंह\पीलीभीत। यदि जटिल रोगों से हमें बचना है तो योग की साधना करना अति आवश्यक है योग ही शरीर को परिपूर्ण रूप से स्वस्थ रखने का एकमात्र जरिया है विश्व के अधिकांश देशों के लोगों ने योग को अपना लिया ऐसा भारत की धरती मे जन्मे जनपद पीलीभीत के लाल अनुराग सिंह का कहना है जो लगभग बारह साल से विश्व के शक्तिशाली देश चाइना में योग शिक्षा का प्रशिक्षण दे रहे। 

    जिंदगी की भागमभाग दौड़ से अपने आप को बचाकर स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए आज के युग में लोग योग की तरफ आकर्षित हो चुके हैं दुनिया के अधिकांश देशों के लोगों के सिर पर योग का जादू चढ़कर बोल रहा है इसलिए तो संपूर्ण संसार के देशों में योग शिक्षा और योग पर विशेष बल दिया जा रहा है तभी तो 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाया जाता है यूं तो योग की विद्या बहुत ही प्राचीन है आदि भारत में ऋषि मुनियों के द्वारा योग का प्रचार प्रसार हुआ करता था और योग के बल पर वे हजारों वर्षों तक जीवन जिया करते थे उनका शरीर स्वस्थ रहता था इसी परंपरा को कायम करते हुए आज के युवा भी योग शिक्षा में महारत हासिल कर देश दुनिया में भारत का नाम ऊंचा कर रहे हैं ऐसा ही एक नाम जनपद पीलीभीत के मोहल्ला डालचंद निवासी 40 वर्षीय अनुराग सिंह का है वह आजकल चीन के लिउझाउ सिटी में चाइनीज, अमेरिकन, ब्रिटिश, भारतीय, पाकिस्तान, ताइवान, आदि देशों के लोगों को योग का पाठ पढ़ा रहे हैं। अनुराग सिंह चाइना में योग गुरु के रूप में जाने जाते हैं योग गुरु अनुराग सिंह का कहना है कि दैनिक योग करने से मनुष्य  का शरीर फिजिकल  के साथ मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहता है आदिकाल से हमारे ऋषि मुनि योग की शिक्षा देते आए हैं लेकिन आधुनिकता की दौड़ में इसे हम भूल चुके थे पर मानसिक तनाव, बीमारियां से जब इंसान घिर गया तो उसने योग की शरण ली और पुनः संपूर्ण दुनिया के अधिकांश देशों में योग की महत्वता को देखकर योग कला सीखना शुरू कर दिया यहां तक कि कुछ देशों में योग को शिक्षा के केंद्रों में अनिवार्य कर दिया गया है। 

    अनुराग सिंह
    एक नजर अनुराग के सफर पर

    योग गुरु अनुराग सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जनपद के  माधोटांडा और हायर सेकेंडरी एवं इंटर मीडिएट की शिक्षा पीलीभीत के ड्रमंड इंटर कॉलेज से शुरू करते हुए रोहिलखंड विश्वविद्यालय से स्नातक और लाल बहादुर शास्त्री इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट नई दिल्ली से एमबीए करने के बाद  कई प्राइवेट कंपनियों में नौकरी भी की पर उन्हें नौकरी रास नहीं आई तब उन्होंने दिल्ली में स्थित ब्रिटिश योग संस्थान से योगा में डिप्लोमा किया और योग की शिक्षा देना आरंभ कर दिया संस्थान ने ही उन्हें विदेश जाने का अवसर भी प्रदान किया उन्होंने मौका ना गवां कर तुरंत विदेश जाने की तैयारी कर दी जिस पर उन्हें संस्थान ने विश्व के शक्तिशाली और योग प्रेमी देश चाइना भेज दिया जहां लगातार बारह  वर्षों से वह योग की शिक्षा प्रदान कर अपने जनपद पीलीभीत का ही नहीं वल्कि भारतवर्ष का नाम योग शिक्षा में विश्व में कर रहे है। 

    योग गुरु अनुराग सिंह का परिवार कभी मूल रूप से पूरनपुर तहसील की पिपरिया दुलाई गांव में रहा करता था बाद में पीलीभीत शहर के मोहल्ला डालचंद में  परिजन बस गए अनुराग सिंह के पिता स्वर्गीय गजेंद्र सिंह बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक के पद पर कार्यरत रहे यह अपने चारों भाइयों में सबसे छोटे हैं बड़े भाई राजेश सिंह उत्तराखंड के सेंट पैट्रिक इंटर कॉलेज में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं, आलोक सिंह उत्तराखंड में बेसिक शिक्षा में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं अतुल सिंह अपना निजी व्यवसाय कर रहे हैं

    कभी पूरी दुनिया मेरे इशारे पर  नाचेंगी कहते थे अनुराग

    अनुराग सिंह के बचपन के साथी दीपेंद्र सिंह, निश्चय सिंह, महिपाल सिंह  पराग सिंह, आदि का कहना है कि जब वह उनके साथ प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करते थे तो वह  कहा करते थे एक दिन पूरी दुनिया मेरे इशारे पर नाचेंगी और उनकी कही हुई यह बात जो दोस्त कहते हैं सच हो गई अनुराग आज चीन देश में अमेरिकी, चाइनीज, पाकिस्तानी, ब्रिटिश, नेपाली, भूटानी, जापानी, रशियन आदि कई देशों  के लोगों को अपनी योग कला के द्वारा पाठ सिखा कर अपनी अंगुलियों पर नचा रहे हैं।

    कोरोना काल में भी दी  योग की शिक्षा

    अपनी पत्नी संगीता,  पुत्र नील एवं पुत्री रिया के साथ चीन के लिउझाऊ सिटी में रहने वाले अनुराग सिंह ने अपने परिजनों को बताया कि  शक्तिशाली देश चीन भी कोरोनावायरस जैसी महामारी से हिल गया यहां की सारी व्यवस्थाएं डगमगा गई  थी ऐसे में जब स्थिति कुछ सामान्य हुई तो योग प्रशिक्षण केंद्र भी खुले लोग कोरोनावायरस जैसी वैश्विक महामारी से बचाव के लिए अपने शरीर की इम्यूनिटी पावर बढ़ाने के लिए योग के प्रति संजीदा नजर आने लगे और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन एवं मास्क लगाकर योग प्रशिक्षण लेते रहे  हालांकि उस  समय योग प्रशिक्षण प्रभावित हुआ । 

    आठवां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस21 जून दिन मंगलवार 2022 को  अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है। 

    संपूर्ण विश्व में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी पहल करते हुए 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग दिवस की बात कही थी जिस पर महासभा ने 11 दिसंबर 2014 को इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और तब 21 जून 2015 को प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया जिसमें लगभग 44 देशों ने भाग लिया, दिल्ली के राजपथ पर भी लगभग 36000 लोगों ने 35 मिनट में 21 योगासन कर दो गिनीज रिकॉर्ड स्थापित किए।

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