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    नैमिषारण्य/सीतापुर। भीषण गर्मी में जल संकट से जूझ रहे तीर्थ वासी नागरिक

    नैमिषारण्य/सीतापुर। 88 हजार ऋषियों की तपस्थली तीर्थ नैमिषारण्य का आमजनमानस व श्रद्धालु इन दिनों भीषण गर्मी के बीच जल संकट से गुजर रहे हैं तीर्थ वासियो की माने तो दिन प्रतिदिन धार्मिक स्थल उपेक्षा का शिकार होता जा रहा है लगभग बीस दिनों से नैमिषारण्य स्थिति नगर पालिका की पानी की टँकी का मोटर खराब होने के कारण नगर वासियों को आवश्यकता अनुसार पानी नही मिल पा रहा है चंद मिनट के लिए पानी आता है लेकिन नैमिष में दर्जनों की सँख्या में पाइप लाइन छतिग्रस्त होने से लोगो को पीने योग्य पानी नही मिल पा रहा है लेकिन नगर पालिका प्रशासन की ओर से अभी तक कोई कदम नही उठाये गए है बीते कई दिनों से अधिशासी अधिकारी छुट्टी पर है और कर्मचारी पैसा नही है ये बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे है ऐसे में तीर्थ वासी शासन और प्रशासन की ओर टकटकी लगाए हुए है सुधार की राह देख रहे हैं। 

    सोशल मीडिया पर भी उठने लगा विकास का मुद्दा जनप्रतिनिधियों के प्रति युवाओं में आक्रोश व्यक्त

    नैमिषारण्य तीर्थ के विकास का मुद्दा इन दिनों फेसबुक काफी चर्चा में है अभी हाल ही में क्षेत्रीय विधायक रामकृष्ण भार्गव सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर एक मांगपत्र देकर क्षेत्र की समस्याओं को अवगत कराया था लेकिन मांगपत्र में नैमिषारण्य तीर्थ का नाम न होने के चलते नैमिष के युवाओं में आक्रोश फैल गया फेसबुक यूजर शिवम दीक्षित ने लिखा आज फेसबुक के माध्यम से एक पोस्ट कई बार देखने को मिली जिसमें हमारे क्षेत्रीय विधायक जी के द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री जी मुलाकात कर नैमिषारण्य विकास परिषद गठन व अन्य कई कार्यो को लेकर मुख्यमंत्री जी से अनुरोध की बात कही गई है लेकिन जो लिखित रूप में उसमे नैमिषारण्य का नाम कही नही दिख रहा है आदि आप सभी को दिखे तो मुझे भी अवगत कराने की कृपा करें

    पंडित विवेक लिखते है

    नैमिष की गलियों में व्यक्ति पैदल नही चल सकता,गिर जायेगा।हर गली मोहल्ले में जर्जर पाइप लाइन में लीकेज है।अमृत रूपी जल प्रतिदिन लाखो लीटर बर्बाद हो रहा है।किसी जनप्रतिनिधि को नही दिखता।अमृत योजना के माध्यम से सर्वप्रथम नैमिष की जर्जर पाइप लाइन बदलनी चाहिए जिससे अगली पीढ़ी के लिए जल को बचाया जा सके।

    वर्तमान अध्यक्षा कुछ भी नही कर सकी।

    माननीय अपनी गलती की माफी ही माँगते रहे ।

    विकास कुछ भी नही हुआ।

    सोसल मीडिया में नैमिष मिश्रिख के विकास की योजना दिखती है लेकिन धरातल पर शून्य।

    अभी कुछ महीने पहले  नैमिष के अमावस्या मेले का प्रान्तीयकरण सुना था लेकिन व्यवस्था मेले की जस की तस है।

    जो भी आता है नैमिष और माता ललिता के नाम का फायदा अवश्य लेता हैं।

    ईमानदारी से लिखे पिछले 7 साल में नैमिष का विकास 'वेंटीलेटर' पर है।

    नैमिष से ही चौरासी कोष क्षेत्र की पहचान है। लखनऊ कानपुर व्यक्ति यदि दक्षिण भारत/उत्तर भारत जाता तो भी अपने क्षेत्र की पहचान नैमिष को बताता है 

    यही नही विरोध इतना बढ़ गया कि क्षेत्रीय विधायक के खिलाफ मुर्दाबाद तक लिखने लगे।

    गौरव दीक्षित

    Initiate News Agency (INA), नैमिषारण्य\सीतापुर

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