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    लखनऊ। आगरा सिर्फ एक शहर ही नहीं भावनाओं और इतिहास से जुड़ा भारतवर्ष का एक ऐसा पन्ना।

    लखनऊ। आगरा सिर्फ एक शहर ही नहीं भावनाओं और इतिहास से जुड़ा भारतवर्ष का एक ऐसा पन्ना है जिसके बिना भारत और भारतीयता अधूरे है। व्यापार और संजीदगी से जुड़ा एक ऐसा शहर जिसके बहुत मोहल्ले आज भी उसी वस्तु विशेष के नाम से जाने जाते हैं जहां उनका व्यापार होता होगा। जीन की मण्डी, हींग की मण्डी, पीपल मण्डी, नमक मण्डी, लोहामण्डी, किनारी बाजार, चित्तीखाना, रकाबगंज, कश्मीरी बाजार, रूई की मण्डी, गधा पाड़ा, लुहार गली जैसे पुराने नाम समय के साथ आज भी स्थापित है। समय के साथ परिवर्तन हुये है और पुराना आगरा नये आगरे में हमारे सामने है। इतिहासकारों ने अपने आश्रय दाता राजाओं की भावना के अनुसार आगरे को उल्लिखित किया है परन्तु आगरा मुगल कालीन सभ्यता से पूर्व ही समृध्द रहा होगा जिसको भुला दिया गया। मुगलकालीन लोक कवि नज़ीर अ‌कबराबादी ने अपनी कविताओं में जिस तरह आगरे का जिक्र किया है उससे नहीं लगता कि आगरे की संस्कृति और परम्परायें मुगलों की देन है बल्कि पूर्व से स्थापित रही होगीं। यह जरूर है कि राजधानी बनने के बाद आगरा की समृध्दि बड़ी ही होगी, जो कि स्वाभाविक ही है।

    जब भावना वरदान शर्मा ने इस विषय वस्तु पर पुस्तक लिखने की इच्छा मेरे सामने प्रकट की तो मुझे आश्चर्य नहीं हुआ क्यों कि भावना का जन्म स्थान ही आगरा है। इसके साथ ही भावना अपने ननिहाल वृन्दावन और अपनी नानी के मायके (मां के ननिहाल) की और से चैतन्य महाप्रभु के शिष्य गोस्वामी गोपाल भट्ट की वंश परम्परा में निहित होती है। वृन्दावन के प्रसिध्द ठाकुर श्री राधारमण जी की सेवायतों में भावना की माताश्री श्रीमती गंगा शर्मा की ननिहाल थी और बांके बिहारी की गली में उनका मायका।उनके पिताजी श्री आनंद शरण गोस्वामी जो एक शास्त्रीय संगीतज्ञ थे और कजरी का गायन स्वर्गीय आनन्द की अनूभूति कराता था। उन्हें रामचरित मानस कंठस्थ था और सस्वर गायन उन का शौक था। सम्भवत: इन्ही संस्कारों के प्रभाव में भावना का इस ओर झुकाव हुआ है। इस किताब के माध्यम से युवा पीढ़ी एवं सभी पाठकों को आगरा के पुराने इतिहास को एक नई दृष्टि से देखने का अवसर मिलेगा। निश्चित रूप से कोई संदेह नहीं है यमुना तट स्थित आगरा शहर ब्रजमंडल का एक अति महत्वपूर्ण स्थान है। बोल चाल में ब्रज की छाप विशेष तौर पर आज भी महसूस की जा सकती है। ब्रज की संस्कृति का विश्व स्तर पर प्रचार प्रसार करने की अत्यंत ही आवश्यकता है। प्रस्तुत किताब में इस विषय से संबंधित सभी महत्वपूर्ण तथ्यों पर प्रकाश डाला गया है चाहे वह ब्रज हो, मथुरा, वृंदावन, आगरा की पुरानी गलियां और  प्राचीन मंदिर हर एक विषय पर आवश्यक जानकारी दी गई है । इस सुंदर पहल के लिए भावना को हार्दिक शुभकामनायें। 

    डॉ रवि दत्त गौड़

    विचारक/ से.नि. वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, विप्रौप, उ.प्र. एवं भूतपूर्व मुख्य नवप्रवर्तन अधिकारी, नवप्रवर्तन केन्द्र, विप्रौप, उ.प्र., लखनऊ

    Initiate News Agency (INA) , लखनऊ

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