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    कानपुर। दिव्यांग होकर भी अपने सुनहरे भविष्य का न सिर्फ सपना देखा बल्कि उस सपने को पूरा भी किया।

    कानपुर। किसी ने सच ही कहा है कि अगर इंसान कुछ करने की ठान ले तो उसे कोई हरा नहीं सकता जहां एक और अपनी छोटी-छोटी समस्याओं का हवाला देते हुए लोग आत्म हत्या कर लेते हैं। कोई ऐसे लोगों के लिए एक नजीर पेश की कानपुर के अनंत कश्यप ने जो दिव्यांग होकर भी अपने सुनहरे भविष्य का न सिर्फ सपना देखा बल्कि उस सपने को पूरा भी किया इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे अनंत को एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में आठ लाख सालाना पैकेज का ऑफर भी मिल गया आइए हम आपको मिलवा ते हैं कानपुर के उस अनंत से जिसने अपनी प्रतिभा से अपने परिवार और कॉलेज का नाम रोशन किया।

    अनन्त वैश्य छात्र

    दोनों हाथ पैरों से दिव्यांग आनंद बिना किसी सहारे के एक कदम भी नहीं चल सकता बचपन से ही दिव्य आनंद को व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा जिससे उसने अपने  सफर की शुरुआत की 12वीं तक की पढ़ाई दिव्यांग स्कूल में पूरी करने के बाद अंबेडकर इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी में इंजीनियर की पढ़ाई करने अनंत पहुंचा अनंत फाइनल ईयर के स्टूडेंट है और कॉलेज में जब बड़ी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां रोजगार देने के लिए आई तो अनंत का चयन 8 लाख  के सालाना पैकेज पर हुआ।  खास बात करते हुए अनंत ने बताया कि उसने अपनी दिव्यांगता को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत समझते हुए अपने सपने को पूरा किया है अनंत ने कहा कि किसी को भी अपने शरीर में होने वाली कमजोरियों का हवाला देकर  कमजोर समझना नहीं चाहिए।

    आनंद की माँ ज्योति वैश्य ने कहा कि पहले दिन से ही आनंद को कॉलेज में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन अनंत की लगन और उसका विश्वास कभी कमजोर नहीं दिखाई दिया कई सहपाठी यह भी कहते थे यह तो दिव्यांग है क्या कर सकेगा लेकिन आज मेरे दोस्त ने एक बड़ी कंपनी में नौकरी पाकर यह साबित कर दिया उसकी दिव्यांगता कोई कमजोरी नहीं बल्कि उसकी ताकत है।

    इब्ने हसन ज़ैदी

    Initiate News Agency (INA) , कानपुर

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