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    लखीमपुर खीरी। प्राचीन दरगाह पर अवैध कब्जेदारी, नागरिकों में जन आक्रोश।

    लखीमपुर खीरी। क़स्बा व थाना खीरी में एक प्राचीन दरगाह पर अवैध कब्जेदारी को लेकर नागरिकों में जबरदस्त आक्रोश बना हुआ है। रोज़ाना बहुत से जायरीन मायूस होकर वापस हो रहे हैं कई बार आवाज़ उठाए जाने के बावजूद भी ज़िला प्रशासन की चुप्पी जनाक्रोश के लिए आग में घी का काम कर रही है।

    ज्ञात रहे कि खीरी टाउन के मोहल्ला अवधी टोला में श्यामलाल पुरवा जाने वाली सड़क के किनारे सदियों पुरानी हज़रत अब्दुल नबी शाह रह0 की मुक़द्दस दरगाह है। ये दरगाह दूर दराज इलाक़ो तक कुत्ता काटी दरगाह के नाम से महज इसलिए मशहूर है क्योंकि जिसके कुत्ता काट लेता है वह इस दरगाह पर हाज़िरी देकर चौखट को चूम लेता है तो कुत्ते की लार में मौजूद रेबीज़ रोगी के शरीर में असर नहीं करता और वह पूरी तरह ठीक ही जाता है ऐसी इस दरगाह से मान्यता शुरू से जुड़ी हुई है। आबादी के बीच इस दरगाह पर वैसे भी रोज़ाना हर धर्म व जाति के अक़ीदतमन्द आकर नतमस्तक होते हैं और उनके मन की मुरादें पूरी होती हैं। विदित हो कि इस दरगाह के आस पास दरगाह की मिल्कियत वाली काफी लम्बी चौड़ी ज़मीन जो करोड़ो की कीमत वाली है उस पर भू माफियाओ की नीयत खराब होना तो स्वाभाविक ही है। लिहाजा लगभग दो माह पूर्व स्थानीय मोहल्ला बोखारी टोला निवासी एक युवक ने इस दरगाह के चारों तरफ कटीले तारों से घेराबन्दी करके अवैध कब्जा कर लिया। इतना ही हैं बल्कि उस अवैध कब्जेदार ने दरगाह के मुख्य द्वार पर गेट लगवाकर उसको लॉक कर रखा है जिससे ज़ायरीनों का आस्ताने पर हाजिरी दे पाना मुश्किल हो गया है। सूत्र बताते हैं कि अवैध अतिक्रमणकर्ता दरगाह परिसर के पूरब और उत्तत की तरफ दुकाने बनवाकर किरायदारी पर चलाने के फिराक में है और बाकी भूमि में से कुछ भूभाग बेच डालने की योजना बना रहा है।

    जब नागरिकों ने आपत्ति की तो अवैध कब्जेदार ने उक्त दरगाह की समस्त ज़मीन को निजी मिल्कियत बताया लेकिन वह स्वामित्व सम्बन्धी कोई दस्तावेज आज तक इसनलिये नहीं दिखा सका क्योंकि या समस्त भूमि दरगाह शरीफ की ही मिल्कियत है।

    दरगाह के आस पास और कस्बे के अन्य मोहल्लों के बहुत से नागरिकों का कहना है कि प्रदेश सरकार एक तरफ अवैध कब्ज़ों को खाली कराने और भू माफियाओं को जेल भेजने का अभियान चला रही है लेकिन खीरी टाउन की इस प्राचीन दरगाह पर अवैध कब्जेदारी को लगभग दो माह बीत चुके हैं क़स्बा वासियों में आक्रोश दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है लेकिन ज़िला प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।

    शाहनवाज गौरी

    Initiate News Agency (INA), लखीमपुर खीरी

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