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    राकेश अचल का लेख। भाई से अब तो मत डरो भाई !

    राकेश अचल का लेख। महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे का मस्जिदों पर लाउड स्पीकर विरोध बरकरार है,उन्होंने औरंगाबाद रैली में अपनी धमकी को फिर दोहराया है कि यदि 4 मई तक मस्जिदों से लाउडस्पीकर न हटे तो वे मस्जिदों के आगे हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। राज ने समझदारी ये दिखाई है कि  वे लाउडस्पीकर हटाने को सामाजिक मुद्दा बता रहे हैं किन्तु गलती ये की है कि वे हनुमान चालीसा पढ़ने की धमकी देकर इसे धार्मिक मुद्दा बना रहे हैं। 

    सब जानते हैं कि मस्जिदों पर से लाउडस्पीकर हटाने का मुद्दा सबसे पहले भाजपा ने उठाया था ,मनसे यहां चूक गयी ,इसलिए जब उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने मस्जिदों समेत सभी पूजाघरों से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई कर दिखाई तो राज ठाकरे एक बार फिर मुखर  हो गए। राज ठाकरे लाउडस्पीकर का मुद्दा उठाकर एक बार फिर अपने भाई उद्धव ठाकरे के सामने मुखर होना चाहते हैं। उन्होंने लाउडस्पीकर के बहाने शरद पंवार को भी निशाने पर लिया है। वे जानते हैं कि  महाराष्ट्र में वे या उनकी पार्टी अभी भी सत्ता से बहुत दूर है। 

    महाराष्ट्र सरकार ने पिछले दिनों राज की ही तरह हनुमान चालीसा पढ़ने की धमकी देने पर एक निर्दलीय सांसद नवनीत राणा के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज कर उन्हें जेल यात्रा करा दी थी लेकिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ऐसे ही अपराध के लिए अपने भाई राज के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार  करने में हिचक रहे हैं। अब या तो ये राज और उद्धव के बीच की नूरा कुश्ती है ताकि भाजपा को मुखर होने का मौक़ा न मिले या फिर उद्धव ठाकरे अपने भाई राज ठाकरे से डरते हैं। 

    राज ठाकरे को समझने के लिए उनके भाषणों को समझना जरूरी है। राज ठाकरे एक अतृप्त राजनीतिक आत्मा है ,उनमने आज है ,नेतृत्व क्षमता है लेकिन उन्हें अवसर नहीं मिल पा रहा। किस्मत उनका साथ नहीं दे रही। उन्होंने अप्पने आराध्य बाला साहब ठाकरे द्वारा गठित शिवसेना को दो फाड़ कर मनसे बना ली लेकिन महाराष्ट्र की जनता ने उन्हें भाव नहीं दिया। शिवसेना आज भी शिवसेना है और सत्ता में है जबकि मनसे सिर्फ मनसे है और उसकी जगह सीमित है। मुद्दा सिर्फ लाउडस्पीकर होते तो बात अलग थी,मुद्दा तो मराठी अस्मिता है ,राज ने इसी बहाने से अपने तमाम विरोधियों को निशाने पर लिया है। 

    राज ठाकरे ने कहा कि, हमारा महाराष्ट्र आज गड्ढे में जा रहा है। सबसे ज्यादा बुद्धिजीवी महाराष्ट्र में है। ऐसा कुछ नहीं है जो महाराष्ट्र में ना हो। आज इन्होंने महाराष्ट्र की हालत क्या करके रख दी है. ये लोग मां-बहन की गालियां देते हैं. कोई मुद्दे पर बोलने को तैयार ही नहीं है. हम आज युवाओं को क्या सिखा रहे हैं. राज ठाकरे ने कहा कि, मेरे दो भाषण क्या हो गए लोग तड़पने लगे. शरद पवार ने कहा कि, मैं दो समाजों में दूरी पैदा कर रहा हूं. पवार साहब आप जाति-जाति में जो दूरी पैदा कर रहे हैं, उससे दूरी पैदा हो रही है। 

    महाराष्ट्र विधानसभा के चुनावों के समय भी महाराष्ट्र की जनता ने राज ठाकरे की पार्टी को कोई महत्व नहीं दिया। जनता द्वारा खारिज राज के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती अपनी पहचान बनाये रखने की है .इसके लिए वे जो मुमकिन है करने के लिए तैयार हैं ,कायदे से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भाई -भाई का रिश्ता ताक पर रखकर महाराष्ट्र के हित में काम करते हुए राज ठाकरे से डरना छोड़ देना चाहिए। अब उनके सामने दो ही विकल्प हैं कि वे या तो उत्तर प्रदेश की तर्ज पर पूजाघरों से लाउडस्पीकर उतरवा दें,या फिर इस मुद्दे के बहाने राज्य की क़ानून और व्यवस्था को चुनौती दे रहे राज ठाकरे  को गिरफ्तार कर नवनीत राणा के पास जेल भिजवा दें। 

    मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की मुश्किल ये है कि वे उत्तर प्रदेश सरकार की नकल करना नहीं चाहते और राज को गिरफ्तार करने के लिए भी वे राजी नहीं है .लेकिन मुख्यमंत्री की चुप्पी का असर उनके राजनीतिक गठबंधन पर पड़ सकता है. राज ने महाराष्ट्र के स्थापित नेता शरद पंवार साहब का अपमान करने की कोशिश भी की है। राज ने पंवार पर जातिवादी होने तक का आरोप मढ़ दिया है। जाहिर है कि एनसीपी इसे बर्दाश्त नहीं करेगी और सरकार पर राज के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दबाब डालेगी। अब उद्धव ठाकरे की स्थिति सांप-छंछून्दर वाली हो गयी है । वे न एनसीपी को नाराज करना चाहते हैं और न मनसे प्रमुख के खिलाफ कार्रवाई करना चाहते हैं। 

    महाराष्ट्र नाम का महाराष्ट्र है ,उसे राष्ट्र से बड़ा नहीं माना और कहा जा सकता .महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार है उसे बनाये रखना उद्धव ठाकरे की जिम्मेदारी है,वे यदि ज़रा सी भी गलती करते हैं तो महाराष्ट्र में सत्ता भाजपा लपकने के लिए तैयार खड़ी है। शिवसेना से बिगाड़ की वजह से भाजपा को महाराष्ट्र में सत्ताच्युत होना पड़ा .आप कह सकते हैं कि  भाजपा के सामने से जैसे परोसी गयी थाली खींच ली गयी हो। महाराष्ट्र में राजनीतिक स्थिरता बनाये रखने के लिए उद्धव ठाकरे को यदि अपना पारिवारिक रिश्ता भी  दांव पर लगाना हो तो वे ऐसा करें अन्यथा मनसे की हरकतें महाराष्ट्र का 'महा नुक्सान' अवश्य कर सकतीं हैं। 

    इस समय देश में नफरत का जो माहौल है उसमें हिकमत अमली ही सबसे बड़ी चीज है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने हिकमत अमली से पार्टी का एजेंडा भी मनवा लिया और किसी को विवाद का मौक़ा भी नहीं दिया। सभी पूजाघरों से लाउड स्पीकर उतरवा लिए गए। मै तो कहता हूँ कि  केवल यूपी सरकार को ही क्यों, देश की हर राज्य सरकार को भी यूपी का अनुशरण करना चाहिए। कुछ चीजें ऐसी हैं जिनको लेकर राजनीति कम से कम हो या हो ही नहीं। दो दिन बाद देखते हैं कि  महाराष्ट्र में मनसे और शिवसेना के बीच विवाद किस सीमा तक जाता है ? महाराष्ट्र के इस मौजूदा एपिसोड में राजधर्म की अग्निपरीक्षा है। इसे दिए बिना महाराष्ट्र में जन सामान्य की स्वीकारोक्ति हासिल नहीं की जा सकती। 

     राकेश अचल (वरिष्ठ पत्रकार)

    Initiate News Agency (INA)

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