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    राकेश अचल का लेख। हरिश्चंद्र से आदित्यनाथ तक।

    राकेश अचल का लेख। आज मुझे अचानक सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की याद आ गयी। कोई 109 साल पहले भारत में राजा हरिश्चंद्र पर जब पहली फिल्म बनी तो एक इतिहास सा रच गया था। राजा हरिश्चंद्र झूठ से भरे इस कलियुग में हमेशा याद किये जाते हैं। उनका नाम मुहावरा भी है और लोकोक्ति भी हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राजा हरिश्चंद्र का अवतार हैं। वे कभी झूठ नहीं बोलते ,लेकिन सच भी ,वे कभी स्वदेश में नहीं बोलते। उन्हें सच बोलने के लिए हमेशा विदेश जाना पड़ता है। माननीय ने अपनी जर्मन यात्रा के दौरान रहस्योद्घाटन किया कि भारत में मंहगाई की वजह भारत की अपनी नीतियां नहीं बल्कि रूस और यूक्रेन का युद्ध है। 

    भारत की जनता प्रधानमंत्री की जबान पर भरोसा करती है इसलिए ही उन्हें दोबारा सत्तारूढ़ कराती है। देश की जनता को विपक्ष पर कम प्रधानमंत्री पर ज्यादा भरोसा है। यदि प्रधानमंत्री महंगाई डायन के लिए रूस और यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार बताते हैं तो निश्चित ही बात सच होगी। युद्ध से पहले मंहगाई डायन की कोई ' डुप्लीकेट '  भारत आ गयी होगी। क्योंकि मंहगाई के लिए दुनिया में कहीं न कहीं युद्ध होना जरूरी है। मंहगाई का युद्ध और शान्ति से बहुत गहरा रिश्ता है। अब देश को ,विपक्ष को मंहगाई के लिए सरकार को निशाने पर नहीं रखना चाहिए। 

    प्रधानमंत्री जी ईद पर जर्मनी गए हैं। उन्हें जाना तो पहले था लेकिन बीच में रामनवमी आ गयी। देश में अजान और हनुमान चालीसा के विवाद आ गए। सच बताने के फेर में वे देश की जनता को और दुनिया को ईद की मुबारकबाद देना भूल गए। वैसे भी प्रधानमंत्री 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अन्न दे रहें हैं,ऐसे में यदि 20 करोड़  लोगों को ईद की मुबारकबाद देना भूल गए तो भूल गए। अब भूल-चूक तो चलती रहती है,इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लेना चाहिए ,ठीक वैसे ही जैसे की प्रधानमंत्री जी ने अच्छे दिनों को गंभीरता से नहीं लिया। दिन तो दिन होते हैं ,उनका अच्छा-बुरा होना किसी के हाथ में नहीं होता। इस सच्चाई को प्रधानमंत्री जी जानते हैं ,आपको भी जान लेना चाहिए तभी आप सुख से रह सकते हैं। 

    देश में बिना किसी को तुष्ट,संतुष्ट किये राजकाज चलाना भी एक कठिन काम है। लेकिन हमारे उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ये मुश्किल काम कर रहे हैं। जिस लाउडस्पीकर के लिए महाराष्ट्र में भाई को भाई की सत्ता के खिलाफ आंदोलन करना पड़ रहा है,एक महिला संसद को राजद्रोह का आरोप सहना पड़ रहा है ,उसी काम को योगी जी ने नागपुर का महादेश मानकर बड़ी ही आसानी से निबटा लिया। कहीं कोई पत्ता तक नहीं खड़का और अकेले मस्जिदों से नहीं बल्कि सभी धर्मों के पूजाघरों से लाउडस्पीकर उतार दिए गए। योगी ने अपने गोरखपुर वाली पीठ से भी लाउडस्पीकर उतार दिया। लाउड होने के लिए स्पीकर की कोई जरूरत नहीं पड़ती। 

    आप गौर कीजिये की नागपुर का हर हिडन एजेंडा योगी जी हँसते-हँसते पूरा किये जा रहे हैं। उन्होंने ईद पर न सड़कों पर किसी को नमाज पढ़ने दी और न परशुराम जयंती पर सड़कें बाधित करने वाले जुलूस निकालने दिए। सब आपस में बातचीत कर किया। अब ये कला दूसरे मुख्यमंत्रियों को नहीं आती तो कोई क्या करे। भाजपा शासित राज्यों के तमाम मुख्यमंत्री हैं लेकिन उनमने योगी जैसी दूरदृष्टि नहीं है। योगी की तरह कोई और प्रधानमंत्री के कारकेट के पीछे दौड़ने की कुब्बत नहीं रखता। ऐसा ही आदमी यदि भविष्य में नागपुर की पसंद से मोदी का उत्तराधिकारी बन जाये तो किसी को हैरानी नहीं होना चाहिए। 

    दरअसल हमारा देश विविधताओं  का देश है। जैसे हमारे देश में विविध जातियां,धर्म और संस्कृतियां हैं ,ठीक वैसे ही राजनीति भी विवधताओं वाली है। हमारे याहं जो राज्य में भाजपा का विरोधी है वो ही केंद्र में भाजपा का समर्थक है। कोई भाजपा की ' ए ' टीम है तो कोई ' बी ' टीम .यानि जैसे एक जमाने में हर राजनीतिक दल में कांग्रेस के लोग प्रतिनियुक्ति पर होते थे वैसे ही आज हर राजनीतक दल में भाजपा के लोग प्रतिनियुक्ति पर हैं। कुछ लोग कहते हैं की गैर भाजपा दलों में भाजपा के लिए पेरोल पर काम करने वाले लोगों की कोई कमी नहीं है। देश के बाहर भी भाजपा केलए पेरोल पर काम करने वाले लोग हैं। अपने ट्रम्प को तो आप नहीं भूले होंगे। भूलना भी नहीं चाहिए। 

    भारत में राजा हरिश्चंद्र होना कठिन काम है लेकिन लोग हैं की करते हैं। महात्मा गाँधी तो राजा हरिश्चंद्र से बहुत प्रभावित थे। पहले यानि बचपन में वे झूठ बोल भी लेते थे किन्तु जबसे उन्होंने 1913 में बनी राजा हरिश्चंद्र फिल्म देखी थी तब से झूठ बोलना छोड़ दिया था। इसी फिल्म से प्रभावित होकर बापू ने ' सत्य के प्रयोग ' भी किये और किये ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को बताये भी, राजा हरिश्चंद्र तब बनी थी जब देश में अंग्रेजों का राज था ,लेकिन ये फिल्म 'दी कश्मीर फ़ाइल' की तरह नहीं थी। जैसी थी अच्छी थी ,कम से कम इस फिल्म ने एक महात्मा का जीवन तो बदला। कश्मीर फ़ाइल से तो सिवाय विवेक अग्निहोत्री की माली हालत के कुछ नहीं बदला .बेचारे कश्मीरी पंडित इस फिल्म बनने के बाद जितने उत्साहित थे उतने ही अब बुझे हुए हैं। उनके पुनर्वास के बारे में कहीं कोई पत्ता भी नहीं खड़का। 

    मुझे लगता है की राजा हरिश्चंद्र फिल्म 1913  में बनने के बजाय आज बनती तो ज्यादा ठीक रहता। 1913  में तो सच बोलने वाले बहुत से लोग थे।आज उनकी नितांत कमी है। ये फिल्म आज बनती तो न जाने कितने नेता देश और विदेश में छाती ठोंककर झूठ बोलना छोड़ देते.यदि ऐसा होता तो देश की मान-प्रतिष्ठा कितनी बढ़ जाती ? दुर्भाग्य से झूठ बोलना हमारा राष्ट्रीय चरित्र बन गया है। इसे कोई फिल्म बनाकर ही दूर किया जा सकता है। दूर न भी किया जा सके ,कम से कम दूर करने का नाटक तो किया ही जा सकता है। 

    बहरहाल हम अपने प्रधानमंत्री और उत्तरप्रदेश के उत्तरदायी मुख्यमंत्री योगी जी से अभिभूत हैं। चाहते हैं कि प्रधानमंत्री की तरह हर कोई पूरा सच बोले। योगी की तरह समावेशी सियासत करे और लाउडस्पीकर की तरह डीजे पर भी पाबंदी लगा दे। क्योंकि लाउड स्पीकर तो सिर्फ आपके आराम में खलल डालते हैं लेकिन डीजे तो आपको बीमार बना देते हैं। डीजे की ढंक दिल हिला देती है। वीपी बढ़ा देती है। चाहे रामनवमी का जुलूस हो चाहे मीलाद उल नबी का जलसा ,कहीं भी डीजे नहीं बजना चाहिए। डीजे केवल रेव पार्टियों के लिए ही बजाए जाएँ ,क्योंकि अक्सर रेव पार्टियां वीराने में होतीं है ,जहां पुलिस भी नहीं पहुँच पाती। 

    राकेश अचल (वरिष्ठ पत्रकार)

    Initiate News Agency (INA) 

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