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    देवबंद। वर्ष 1968 में ही सुलझ गया था मथुरा की ईदगाह का मसला: डा. जहीर

    .............. बेवजह के मसलों में न पड़ कर प्यार मोहब्बत से रहें देशवासी

    देवबंद। देश के चर्चित मुद्दों में से एक मुथरा की ईदगाह मस्जिद व श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद को लेकर मथुरा की शाही ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष डा. जहीर हसन ने कहा कि अयोध्या के बाद देश में एक बार फिर से इबादतगाहों के नाम पर माहौल को खराब करने की साजिशें रची जा रही हैं। जिससे मुल्क का माहौल खराब हो रहा है।ईदगाह रोड स्थित महमूद हाल में पत्रकारों से बात करते हुए मथुरा शाही ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष डा. जहीर हसन ने कहा कि हम नहीं चाहते कि दो भाईयों (हिंदू-मुस्लिम) के बीच नाइत्तेफाकी पैदा की जाए। हमारा हमेशा से यह प्रयास रहा है कि हम सब एक हैं के संदेश को आम किया जाए। उन्होंने कहा कि ब्रजवासी हिंदू व मुस्लिम रहनुमाओं की मौजूदगी में वर्ष 1968 में ही लिखित रूप में यह विवाद सुलझ गया था। 

    उन्होंने आरोप लगाया कि देश के बड़े बड़े राजनीतिज्ञों और मंत्रियों के बच्चे विदेशों में पढ़ाई कर बडी बड़ी डिग्रियां हासिल कर रहे हैं। जबकि देश के आम बच्चों को शिक्षा और रोजगार देने के बजाए धार्मिक मसलों में उलझा कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। डा. जहीर हसन ने कहा कि जिस तरह की तस्वीर पेश की जा रही है हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं है। ब्रज का इतिहास रहा है कि यहां ईद के मौके पर जो गेट बनाया जाता है उस पर एक तरफ ईद मुबारक लिखा होता है तो दूसरी तरफ कृष्ण की बांसुरी और मोर पंख बना हुआ होता है। वहां इसी तरह से त्योहार मनाए जाते हैं। कहा कि इन आंखों से काम नहीं चलेगा बल्कि दिल की आंखें खोलनी पड़ेंगी। क्योंकि ब्रज में मुसलमान औरतें राधा की चुनरी बनाती हैं तो हज से वापस लौटे दाढ़ी वाले कृष्ण के कपड़े और मुकुट बनाते हैं। जिन्हें पूरी दुनिया में बेचा जाता है। कहा कि यह देश नफरत से नहीं बल्कि प्यार और मोहब्बत से चलेगा। सभी को चाहिए कि वह नफरत का बीज बोने वालों से सावधान रहें और भाईचारे के संदेश को आम करें।

    शिबली इकबाल

    Initiate News Agency (INA), देवबंद

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