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    देवबंद। रमजान में रोजा रखने वालों पर ही बरसती हैं अल्लाह की रहमतें।

    .......... जान बूझकर रोजा छोडने वाला अल्लाह से करता है बगावत का एलान

    देवबंद। पवित्र रमजान माह तमाम महीनों का सरदार तो है ही साथ ही इस महीने में अल्लाह अपने बंदों की हर नेकी के बदले में इजाफा कर देता है। रमजान की इन्हीं विशेषताओं पर रोशनी डालते हुए दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि इस महीने में अल्लाह अपने बंदों को खास नेअमतों से नवाजता है।

    मंगलवार को मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा की रमजान में हर इबादत और नेक अमल का सवाब बढ़ा दिया जाता है और इंसान की हर नेकी के बदले में इजाफा हो जाता है। इसलिए रमजान को महीनों का सरदार कहा गया है। उन्होंने कहा कि रमजान माह में तीन हिस्से हैं और हर हिस्से का नाम दिया गया है। पहले हिस्से को जो 10 दिन का है उसे रहमत कहा जाता है, दूसरा हिस्सा जो रमजान की 11 तारीख से 20 रमजान तक होता है उसे मगफिरत कहा जाता है और तीसरा हिस्सा जो 21 रमजान से शुरु होकर 30 रमजान को खत्म होता है उसे जहान्नुम से आजादी का हिस्सा कहा जाता है। यानि रमजान माह में अल्लाह अपने बंदों पर रहमत, मगफिरत और जहान्नुम से आजादी के दरवाजे खोल देता है। मौलाना नसीम ने कहा कि यह सब चीजें रोजा रखने वाले को मिलती है जो अल्लाह की नजदीकी पाने के लिए और उसे खुश रखने के लिए रोजा रखता है। यदि कोई रोजा नहीं रखता और जान बूझकर ऐसा करता है तो वो खुदा से बगावत का एलान करता है और अल्लाह ऐसे बागियों को सजा देता है। उन्होंने कहा कि जो लोग चाहते हैं कि उन्हें दुनिया और दूसरी दुनिया में आराम की जिंदगी गुजारें वो सिर्फ रमजान ही नहीं बल्कि आम दिनों में भी अल्लाह के हुक्म पर चले। 

    शिबली इकबाल

    Initiate News Agency (INA), देवबंद

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