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    नई दिल्ली। बौद्धिक संपदा अधिकार' पर जागरूकता अभियान की शुरुआत

    नई दिल्ली। 'विश्व बौद्धिक संपदा दिवस' के अवसर पर अंग्रेजी संचार-कौशल विकास के प्रति समर्पित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्थान ब्रिटिश लिंगुआ के द्वारा एक उच्चस्तरीय जागरूकता गोष्ठी का आयोजन  किया गया जिसका लक्ष्य युवाओं में बौद्धिक संपदा अधिकार के प्रति समझ और सुरक्षा को लेकर जागरूकता पैदा करना है। उल्लेखनीय है कि अपने देश में बौद्धिक संपदा अधिकार के प्रति वैसी रुचि एवं जागरूकता का सर्वथा अभाव है जैसा की पश्चिमी देशों में देखने को मिलता है। इस दृष्टिकोण से यह कार्यक्रम एक सामाजिक एवं  शिक्षाप्रद अभियान की तरह है जो प्रतिभाशाली व सृजनात्मकता लोगों में अपनी बौद्धिक संपदा के प्रति सुरक्षा का भाव पैदा करता है। 

    इस जागरूकता अभियान कार्यक्रम के अवसर पर गोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध लेखक एवं सामाजिक कार्यकर्ता  डॉ. बीरबल झा ने कहा कि बौद्धिक संपदा (आईपी) एक व्यक्ति के दिमाग की रचनाओं  यथा, कलात्मक कार्य, साहित्यिक उत्पादन, डिजाइन, प्रतीक, नाम, चित्र को संदर्भित करता है। इस तरह की कृतियों को किसी विशेष अधिकार क्षेत्र के तहत कानून द्वारा निर्दिष्ट उपयुक्त प्राधिकारण से कॉपीराइट, पेटेंट या ट्रेडमार्क करने की आवश्यकता होती है।

    मिथिला के 'यंगेस्ट  लिविंग लीजेंड' के रूप में चर्चित एवं सुप्रसिद्ध अंग्रेजी भाषाविद डॉ बीरबल झा का कहना था कि बौद्धिक संपदा कानून के तहत केवल पंजीकृत बौद्धिक संपदा के मालिक या निर्माता को ही अपने उत्पाद पर अधिकार व संरक्षण प्राप्त होता है जिससे उसे व्यापार में बढ़त मिलती है। इस संबंध में कानून के प्रति अज्ञानता अथवा जानकारी का अभाव कई तरह की समस्याओं को पैदा करता है। अतः जरुरी है कि इस क्षेत्र में कार्य कर रहे युवा प्रतिभाओं को उनकी कड़ी मेहनत, नवाचारों, आविष्कारों और कृतियों का लाभ मिले ताकि वे तेजी से आगे बढ़ सकें। अपने कार्य क्षेत्र के विषय में कानूनी जानकारी के अनेक फायदे हैं जिन्हे नज़रअंदाज़  नहीं किया जा सकता। ब्रिटिश लिंगुआ के प्रबंध निदेशक डॉ बीरबल झा के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए, सुप्रीम कोर्ट के वकील राजेश सेन ने कहा कि 'आईपीआर जिसका अर्थ  बौद्धिक सम्पदाओं के अधिकार से है, एक निश्चित अवधि के लिए  व्यक्तियों को उनके दिमागी रचनाओं  व कृतियों पर विशेष कानून अधिकार दिया जाता है।


    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के पूर्वी दिल्ली से 'आईपीआर जागरूकता अभियान' को हरी झंडी दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट वकील डॉ अरुण झा ने कहा कि विचार और सृजन के संबंध में जागरूकता फ़ैलाने वाले इस तरह के अभियान युवा पीढ़ी में सकारात्मक प्रभाव पैदा करने की दिशा में बेहद सार्थक प्रयास साबित होंगे। आवश्यकता है कि इसके बारे में अधिकाधिक सूचनाओं व क़ानून की बारीकियों से लोगों को अवगत कराया जाए। उन्होंने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि देश के भीतर या बाहर आप जब भी कोई भी व्यवसाय शुरू करते हैं तो आईपी का निबंधन बेहद जरुरी हो जाता है और इसलिए इसके कानूनी पक्षों को समझना भी जरुरी हो जाता है। जागरूकता अभियान कार्यक्रम में शामिल होने वाले अन्य लोगों में  'पेस्टल इंडिया' की  फैशन डिजाइनर गौरी रानी, स्टेफ़नियन विनोद सुखिजा और  समाजसेवी रमाकांत चौधरी आदि प्रमुख रहे।

    Initiate News Agency (INA), नई दिल्ली

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