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    कानपुर। कानपुर में दिखा एआरटीओ के रूप में बजरंगबली का स्वरूप।

    .................. बजरंगबली उड़ कर हिमालय पर्वत से लाए थे संजीवनी बूटी

    .......... कानपुर का एआरटीओ कानपुर से उड़ कर इंदौर जाकर कर आया चौदह चक्का ट्रक का रजिस्ट्रेशन

    कानपुर। आरटीओ विभाग इतना ज्यादा हाईटेक हो गया है कि आप कल्पना नही कर सकते, दरअसल एक चौदह चक्का ट्रक इंदौर के देवास में खड़ा था और कानपुर के एआरटीओ साहब ने कानपुर में बैठे बैठे उसका रजिस्ट्रेशन कर दिया। एआरटीओ साहब ने कानपुर में बैठ कर इंदौर में खड़े ट्रक के रजिस्ट्रेशन के मामले का जब खुलासा हुआ तो आरटीओ प्रशासन सहित सभी अधिकारी एक दूसरे की बगले झांकने लगे। शायद इन भ्रष्ट अफसरों के दिलो से बाबा बुलडोज़र का डर खत्म हो गया है। 

    कानपुर के आरटीओ विभाग के एआरटीओ प्रशासन सुधीर वर्मा ने आर आई अजीत सिंह के साथ मिलकर भ्रस्टाचार की ऐसी इबारत लिखी जिसे सुनकर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार के खिलाफ दावो की दम तोड़ती तस्वीर आपके ज़हन में बस जाएगी। जी हां दरअसल मध्यप्रदेश के इंदौर ज़िले के देवास में परवेज़ नाम के शख्स का एक चौदह चक्का ट्रक खड़ा है। ट्रक की बॉडी अभी बन रही थी और ट्रक का रजिस्ट्रेशन भी नही था लेकिन आरटीओ विभाग के क्रांतिकारी एआरटीओ प्रशासन सुधीर वर्मा ने कानपुर में बैठे बैठे इंदौर में खड़े ट्रक का राजिस्ट्रेशन कर दिया। जबकि एआरटीओ को अधिकार भी नही है वाहन को सीन करने का। 

    वही आरआई अजीत सिंह ने भी कानपुर से फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया। एआरटीओ प्रशासन सुधीर  वर्मा और आर आई अजीत सिंह गाज़ियाबाद की घटना लगता है भूल गए है। मौतों का आंकड़ा भी भूल गए मरने वालो के परिवार के लोगो की सिसकियां ओर मातम भूल गए। याद अगर कुछ रहा तो सिर्फ पैसा, देखिए सूबे के मुखिया ये है आपके ज़ीरो टॉलरेंस नीति वाले अधिकारी जो आपके दावो को बेच रहे है। जो आपके बुलडोज़र को कमज़ोर कर रहे है। आपके मंसूबो पर पानी फेर रहे है, इनको मॉनिटर करने वाले अधिकारी क्या कर रहे है उनकी भूमिका भी संदिग्ध है वह भी बराबर के दोषी है सज़ा सभी दोषियों को मिलनी चाहिए यही उम्मीद उत्तर प्रदेश की जनता सूबे के हाकिम से लगाए है। हालांकि आरोपो से घिरे एआरटीओ सुधीर कुमार ने  आरआई पर ठीकरा फोड़ते हुये जांच कराकर कार्रवाई की बात कही है। 

    इस गोलमाल जवाब और भ्रष्टाचार में घिरे आरआई अजित सिंह से बात करने पहुंचे तो वह भी गोलमोल जवाब देते हुये कैमरे के सामने बोलने से बचते दिखे। लेकिन काफी कुरेदने पर आरआई ऑन कैमरे के आगे बोल ही दिए कि लापरवाही एआरटीओ की तरफ से हुई होगी। उनकी कोई गलती नही है, उन्होंने बातो ही बातों में माना है कि हो सकता है कि ट्रक कोई और आय हो और नंबर कुछ लिखा हो..इस वजह से यह गलती हो गयी होगी..लेकिन उनका कोई लेना देना नही है। किसी भी गाड़ी के आरटीओ आफिस में आने के बाद एंट्री करने के बाद फ़ाइल एआरटीओ के पास भेज दी जाती है। गड़बड़ी उन्ही के स्तर पर हुई होगी। उनकी ढुल मूल  बातों से साफ है कि इस भ्रष्टाचार में फसे आरआई और एआरटीओ प्रशासन एक दूसरे पर मामला डालते हुये बगले झांक रहे है। क्योंकि मामला तूल पकड़ता जा रहा है। साथ ही आरआई ने बताया कि कमेटी बन गयी और जांच शुरू हो चुकी है। अब देखना होगा कि जांच की आंच किसी अधिकारी पर आती है।

    भ्रष्टाचार को लेकर आरटीओ पर हमेशा से सवाल उठते रहे है, लेकिन इस बार तो मामला काफी पेचीदा है..ट्रक आरटीओ आया नही और रजिस्ट्रेशन हो गया। मामले का खुलासा होते ही जांच शुरू हो गयी है, अब देखना होगा कि किस अधिकारी पर जांच के बाद गाज गिरेगी और भ्रष्टाचार फैलाने वाले पर क्या कार्रवाई होगी। क्या गाज एआरटीओ प्रशासन पर गिरती है या फिर आरआई पर, यह बड़ा सवाल ?

    इब्ने हसन ज़ैदी

    Initiate News Agency (INA) , कानपुर

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