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    विशेष रिपोर्ट। सद्भावना एवं मानवता का प्रतीक रमजान, रमजान में ही नाजिल हुआ पवित्र कुरान।

    विशेष रिपोर्ट। मानव इतिहास का सबसे बड़ा आश्चर्य हिदायत का सबसे बड़ा बेहतरीन नुस्खा, जीवन व्यतीत करने का संपूर्ण संविधान, विश्व शांति स्थापना का सबसे मिसाली कानून का विश्वव्यापी सबसे प्रमाणित ग्रंथ कुरान को अल्लाह ने इसी रमजान में उतारा है।

    इस पवित्र माह में कुरान का नाजिल होना रमजान को और महान बनाता है। यह बात स्पष्ट है कि आकाश की ऊंचाई जमीन की धरातल पर, दिन की रोशनी रात के अंधेरों पर, सूरज का प्रकाश चांदनी रात पर हावी है। उसी तरह मानवता को समर्पित की गई अमर ग्रंथ कुरान करीम की विशेषता सर्व विदित है। इस्लामी इतिहास के पन्नों से पता चलता है कि आखरी पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब जब मक्का छोड़कर मदीना गए, तो वहीं रमजान के रोजे का उन्हें  ईश्वरीय आदेश हुआ और तभी से इस्लाम धर्म मानने वालों पर रमजान के एक महीने रोजा रखने का जरूरी आदेश लागू हुआ। जो हर बालिग नौजवान, मर्द औरत के लिए जरूरी है। इससे पूर्व भी रोजा रखे जाने का इतिहास है, लेकिन तब कोई निश्चित अवधि नहीं थी, कभी साल में हर एक दिन बाद, तो कभी सप्ताह में एक या दो दिन उपवास रखे जाने की बातें इतिहास में जानने को मिलती है। लेकिन 10 शाबान 2 हिजरी से हर मुसलमान के लिए रमजान के महीने में लगातार एक महीने पाबंदी से रोजा रखने की परंपरा बनी। 

    रोजा शखावत का पैगाम देता है। इस महीने में इंसान का मानवीय चेहरा सामने आता है, और दूसरे के लिए भी  हृदय द्रवित हो जाता है, यदि जकात की व्यवस्था को ईमानदारी से लागू कर दिया जाए अर्थात सभी अपने माल का सही जकात अदा कर दे तो न केवल मुसलमान बल्कि विश्व के हर समुदाय का दामन खुशहाली से भर जाएगा। अल्लाह ने जमाखोरी को सख्त नापसंद किया है, इस पर यदि सच्चे हृदय से अमल किया जाए तो विश्व में कहीं भी गरीबी नहीं रह जाएगी, हम कह सकते हैं कि रमजान सद्भावना भाईचारे की अद्भुत मिसाल है, यह विश्व में न केवल शांति का प्रतीक है बल्कि मानवता का पाठ भी पढ़ाता है। रमजान हिंसा से बचने, त्यागने का एक सर्वोत्तम माध्यम है। इस्लाम का अगर बारीकी से जायजा लिया जाए तो यह बात साफ तौर पर देखने को मिलेगी कि इसका मुख्य उद्देश्य पाक और मानवीय मूल्यों पर आधारित समतामूलक समाज का निर्माण है। रोजा बिना किसी दबाव या प्रतिबंध के खुद के आगे स्वयं अपने आप को समर्पित कर देने और अल्लाह की हुकूमत के आगे सिर झुकाने का नाम है। 

    प्रमोद कुमार यादव

    Initiate News Agency (INA), पटना बिहार

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