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    नैमिषारण्य\सीतापुर। श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर हवन व पूजन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया।

    नैमिषारण्य\सीतापुर। तीर्थ स्थित सत्य नारायण धाम में गत एक सप्ताह से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर हवन व पूजन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान कथा व्यास राजेंद्र मिश्रा ने सात दिन तक चली कथा में भक्तों को श्रीमद भागवत कथा की महिमा बताई। उन्होंने लोगों से भक्ति मार्ग से जुड़ने और सत्कर्म करने को कहा। कथा व्यास ने कहा कि हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। 

    उन्होंने बताया कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है। श्रीमद भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है।उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन। जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। हर कथा या अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन बुद्धि व चित को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान का लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। कथा समापन के दिन सोमवार को विधिविधान से व्यास पूजन हुआ। इसके बाद हवन,कन्या भोज एवं भोजन प्रसाद व दक्षिणा वितरित किया गया उक्त क्रम देर शाम तक चलता रहा। 

    इस दौरान विलासपुर छत्तीसगढ़ आए यजमान श्रीमती आरती शाहू, सुमन शाहू, नंद किशोर शाहू, तुलसी साहू, जीएल शाहू, वतन शाहू, कविता शाहू व समस्त शाहू परिवार, सत्य नारायण धाम के संस्थापक पूर्व सभासद देवीप्रसाद तिवारी, प्रबंधक पप्पू तिवारी, विकास दीक्षित समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

    गौरव दीक्षित

    Initiate News Agency (INA), नैमिषारण्य\सीतापुर 

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