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    सम्भल। रमजान के तीनो अशरो में बरसती है अल्लाह की रहमत

    सम्भल। रमजान आगामी माह से शुरू होने वाले हैं। इसे लेकर उलेमाओ ने बयान जारी करते हुए कहा कि रमजान में अशरे होते हैं। तीनों अशरो में अल्लाह की रहमत बरसती है। पहला अशरा रहमत का होता है, दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का होता है और तीसरा अशरा जहन्नम की आग से खुद को बचाने के लिए होता है।

    मौलाना मोहम्मद मियां, प्रधानाचार्य मदरसा सिराज उल उलूम

    शहर के मदरसा सिराज उल उलूम के प्रधानाचार्य मौलाना मोहम्मद मियाँ व कारी गुलज़ार अशरफ ने बताया कि 2 या 3 अप्रैल को रमजान शुरू होंगे। रमजान का महीना हर मुसलमान के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जिसमें 30 दिनों तक रोजे रखे जाते हैं। इस्लाम के मुताबिक, पूरे रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है, जो पहला, दूसरा और तीसरा अशरा कहलाता है। अशरा अरबी का 10 नंबर होता है। इस तरह रमजान के पहले 10 दिन (1-10) में पहला अशरा, दूसरे 10 दिन (11-20) में दूसरा अशरा और तीसरे दिन (21-30) में तीसरा अशरा बंटा होता है। इस तरह रमजान के महीने में तीन अशरे होते हैं। पहला अशरा रहमत का होता है, दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का होता है और तीसरा अशरा जहन्नम की आग से खुद को बचाने के लिए होता है। 

    कारी गुलज़ार अशरफ

    रमजान के महीने को लेकर पैगंबर मोहम्मद ने कहा है, रमजान की शुरुआत में रहमत है, बीच में मगफिरत यानी माफी है और इसके अंत में जहन्नम की आग से बचाव है। रमजान के शुरुआती 10 दिनों में रोजा-नमाज करने वालों पर अल्लाह की रहमत होती है। रमजान के बीच यानी दूसरे अशरे में मुसलमान अपने गुनाहों से पवित्र हो सकते हैं। वहीं, रमजान के आखिरी यानी तीसरे अशरे में जहन्नम की आग से खुद को बचा सकते हैं।

    उवैस दानिश

    Initiate News Agency (INA), सम्भल

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