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    विकास का मुद्दा चुनाव भर ही क्यों रहता है

    यूपी विधानसभा चुनाव के माध्यम से सत्ता पक्ष लोकसभा 2024 के चुनाव की चाबी अपने पास बरकरार रखने का प्रयास एवं विपक्ष भी उतनी ही मजबूती से राज्य की सत्ता पाने की कोशिश कर रहा है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख प्रदेश के साथ और चार राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। लेकिन जितना मुंहजबानी विकास की गंगा उत्तर प्रदेश में सब दलों के द्वारा बहाई जा रही है उतना अन्य प्रदेशों में नहीं। क्योंकि सबको मालूम है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता यूपी से ही जाता है।

    विपक्षियों को जब मौका मिला था तब वे अपने पसंदीदा स्थान तक ही सीमित रहे। अब पूरे प्रदेश एवं देश के विकास की चर्चा कर रहे हैं। इसी के साथ-साथ जो अपराधी अभी तक बुलडोजर मुख्यमंत्री के भय से भूमिगत थे अब वे विपक्षी पार्टियों के प्रत्याशी बनकर सरकार को कोस रहे हैं। इनके इस पैतरे को प्रदेश की जनता खूब समझ रही है इसीलिए योगी अपने हर चुनावी भाषण में बुलडोजर की चर्चा करते हैं और इसे जनता खूब पसंद कर रही है।

    पहले चुनाव में बिजली, सड़क, पानी, सफाई का मुद्दा विपक्ष उठाता था लेकिन योगी सरकार ने इस कार्य को पूरा करके मुद्दा ही खत्म कर दिया, अब विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है। अब विपक्ष अपनी दुकान चलाने के लिए केवल किसान, युवा, महंगाई की बात करके अपनी नाकामियों एवं किए गए कारनामों को छुपाना चाहती है। जिसको जनता बखूबी समझ रही है। जब प्रदेश की बागडोर इन लोगों के पास थी तो इन लोगों द्वारा क्या किया गया यह किसी से छिपा नहीं है। इसीलिए जनता ने 2017 के चुनाव में समूचे विपक्ष को औंधे मुंह खड़ा कर दिया था, लगता है इस बार भी विपक्ष का यही हाल होगा।

    योगी सरकार के कुछ मंत्री भी योगी की साख में बट्टा लगाने की कोशिश कर रहे थे, जिसकी चर्चा आमजन में होने लगी। जब इसकी जानकारी योगी जी को हुई तो उनमें से कुछ मंत्रियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। कुछ के महत्वपूर्ण विभाग बदल कर कोई मामूली विभाग दे दिया गया। ऐसा पिछली सरकारों में कभी नहीं देखा गया था बल्कि उन्हें लूटने का पूरा मौका दिया जाता था, यहां तक कि विपक्ष के हर काम में हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ता था। पहले समूचा विपक्ष भाजपा से सवाल करता था कि मंदिर कब बनेगा। इसे डबल इंजन की सरकार ने पूरा करके समूचे विपक्ष का मुंह बंद कर दिया।

    विपक्ष द्वारा सरकारी नौकरी सहित आदि विभागों में गड़बड़ी की बात उठाई जा रही है। इनके कार्यकाल में किस तरह से कार्य होते थे जिसका जवाब जनता इनको पिछले कई चुनावों से देती चली आ रही है, इसके बावजूद विपक्ष द्वारा वर्तमान सरकार के कार्यकाल में कानून व्यवस्था गड़बड़ बताया जा रहा है। जबकि पिछली सपा सरकार में कानून व्यवस्था कैसी थी, कहां थी, किस प्रकार से थी जिससे कराह कर प्रदेश की जनता ने इन्हें उखाड़ कर फेंका था, इसके बावजूद विपक्ष द्वारा अपने कार्यकाल की उपलब्धियां बताई जा रही हैं। अब इस उपलब्धि को क्या कहा जाएगा, जनता इसका जवाब इस चुनाव में इनको फिर देगी।

    प्रदेश की वर्तमान योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा जिस प्रकार हर विभाग में जनहित के लिए अमूलचूल परिवर्तन करने का प्रयास किया गया वह किसी से छिपा नहीं है। लेकिन इसी बीच दो साल पूरा कोरोना महामारी ने ले लिया, साथ ही सरकार में शामिल कुछ अन्य दलों के असहयोग, कुछ अपनों के असहयोग और नए होने के कारण पूरा कार्य नहीं कर सके, जिसको जनता समझ रही है।

    जहां सरकारी स्कूलों में अध्यापक स्टाफ दिखाई नहीं पड़ते थे वहां योगी के भय से टाइम टू टाइम खड़े दिखने लगे। कमोबेश इसी तरह हर जगह दिखाई पड़ने लगे। यह भी दिखाई पड़ रहा था कि योगी सरकार के गांव, मोहल्ला, नगर पंचायत, ब्लॉक, थाना, तहसील, नगर निकाय जिला, मंडल, रेंज, जोन, प्रदेश के कुछ निठल्ले कर्मचारियों एवं अधिकारियों द्वारा सरकार की मंशा के विपरीत कार्य किया गया, जिसको देखने की जिम्मेदारी उनकी पार्टी के नेताओं पदाधिकारियों, विधायकों, सांसदों, मंत्रियों की थी लेकिन वे चुप बैठे रहे जिसकी वजह से जनता में कुछ क्षोभ है। जिसकी वजह से योगी को कुछ नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    इसे देखकर मुद्दाविहीन विपक्ष जनता को गुमराह करना चाह रहा है। हालांकि जनता सब जानती है। जनता यह भी जानती है कि पश्चिम से पूरब, उत्तर से दक्षिण में पिछली सरकारों में क्या हो रहा था और वर्तमान सरकार में क्या हो रहा है। पहले की सरकारों में कहां कब दंगा हो जाएगा, इसका कोई ठिकाना नहीं रहता था लेकिन वर्तमान सरकार में अमन शांति है।


    आचार्य श्रीकांत शास्त्री

    Initiate News Agency(INA)

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